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Baghpat News: घरों में चल रहे अस्पताल, नाबालिग व अनपढ़ कर रहे उपचार
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बागपत। यहां घरों में अस्पताल चलाए जा रहे हैं और यह अस्पताल भी कोई एक-दो नहींए बल्कि इनकी भरमार है। इन अस्पतालों में कोई डिग्रीधारक चिकित्सक नहीं है और नाबालिग व अनपढ़ उपचार कर रहे हैं। इस तरह मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।
बागपत की माता कॉलोनी में कई घरों में अस्पताल
बागपत की माता कॉलोनी में जब संवाद की टीम पहुंची तो घरों के अंदर कई अस्पताल चलते मिले। अंदर बड़े बरामदे में फॉल्डिंग डालकर मरीजों के लिए बेड बनाए गए हैं। उन पर मरीजों को भर्ती करके उपचार किया जाता है। ग्लूकोज चढ़ाया जाता है और वहीं पर दवाइयां दी जाती हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि वहां उपचार करने वाले युवक को दवाइयों के नाम तक पता नहीं थे और वह देखकर दवाइयों को पहचानते हैं। किसी को बुखार है तो वह दवाई न लिख सकते और न नाम बता सकते। दवाई के रेपर को देखकर मरीजों को खिला देते हैं। माता कॉलोनी में दूसरे घर में चल रहे अस्पताल में नाबालिग भी ग्लूकोज लगाता हुआ मिला।
जिला अस्पताल से चंद दूरी पर स्टोर रूम में चल रहा अस्पताल
निवाड़ा में सबसे बुरी हालत मिली। वहां आगे मेडिकल सेंटर लिखा हुआ है और अंदर स्टोर रूम में फॉल्डिंग डालकर अस्पताल बनाया हुआ है। बेड के नाम पर तीन फॉल्डिंग डाले गए हैं। यहां सबसे बड़ी बात यह है कि जिला अस्पताल से यह जगह चंद दूर है। यहां भी मरीज भर्ती करके ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था और दवाइयां दी जा रही थीं।
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माता कॉलोनी का अस्पताल
रिपोर्टर: मुझे कई दिन से उल्टी-दस्त हो रहे हैं। बहुत परेशान हूं।
युवक: ज्यादा समस्या लग रही है। ग्लूकोज भी चढ़वानी है क्या?
रिपोर्टर: पहले दवाई लेकर देख लेता हूं। कल तक आराम नहीं लगा तो भर्ती हो जाऊंगा।
युवक: यह दवाइयां सुबह-शाम ले लेना। कल दोबारा आ जाना।
रिपोर्टर: आज काफी मरीज आ रहे हैं, क्या बात है?
युवक: रविवार है न। अस्पताल की छुट्टी रहती है, इसलिए ज्यादा मरीज आते हैं।
--
सुभाष गेट के पास
रिपोर्टर: डॉक्टर साहब मेरे बेटे को दस्त लग रहे हैं। उसके लिए दवाई लेनी है।
युवक: कब से हो रहे हैं।
रिपोर्टर: दो दिन से परेशान है, ठीक नहीं हो रहे।
युवक: उसे लेकर आ जाते तो देख भी लेते और जरूरत पड़ती तो भर्ती कर लेते।
रिपोर्टर: अभी दवाइयां लिख दो, मैं उन दवाइयों को खिलाकर देख लेता हूं।
युवक: ये दवाइयां ले जाओ, इनसे आराम लग जाएगा।
रिपोर्टर: ये कौनसी गोली है?
युवक: इसपर देख लो लिखा होगा।
रिपोर्टर: मुझे अंग्रेजी नहीं आती है, आप बता दो या लिखकर दे दो।
युवक: कल जब दोबारा आओगे तो लिखकर दे दूंगा, अभी इनको ले जाओ।
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बागपत में इस तरह के क्लीनिक व अस्पताल शुरू होने की काफी शिकायतें आ रही हैं। घरों के अंदर अस्पताल चलने की जानकारी नहीं थी, क्योंकि बाहर कोई बोर्ड लगा होता है तो अंदर जाकर जांच कर लेते हैं। अब घरों में अस्पताल चलने की जानकारी मिली है, सभी जगह छापा मारा जाएगा।
9डॉ. विभाष राजपूत, डिप्टी सीएमओ
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बागपत की माता कॉलोनी में कई घरों में अस्पताल
बागपत की माता कॉलोनी में जब संवाद की टीम पहुंची तो घरों के अंदर कई अस्पताल चलते मिले। अंदर बड़े बरामदे में फॉल्डिंग डालकर मरीजों के लिए बेड बनाए गए हैं। उन पर मरीजों को भर्ती करके उपचार किया जाता है। ग्लूकोज चढ़ाया जाता है और वहीं पर दवाइयां दी जाती हैं।
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सबसे बड़ी बात यह है कि वहां उपचार करने वाले युवक को दवाइयों के नाम तक पता नहीं थे और वह देखकर दवाइयों को पहचानते हैं। किसी को बुखार है तो वह दवाई न लिख सकते और न नाम बता सकते। दवाई के रेपर को देखकर मरीजों को खिला देते हैं। माता कॉलोनी में दूसरे घर में चल रहे अस्पताल में नाबालिग भी ग्लूकोज लगाता हुआ मिला।
जिला अस्पताल से चंद दूरी पर स्टोर रूम में चल रहा अस्पताल
निवाड़ा में सबसे बुरी हालत मिली। वहां आगे मेडिकल सेंटर लिखा हुआ है और अंदर स्टोर रूम में फॉल्डिंग डालकर अस्पताल बनाया हुआ है। बेड के नाम पर तीन फॉल्डिंग डाले गए हैं। यहां सबसे बड़ी बात यह है कि जिला अस्पताल से यह जगह चंद दूर है। यहां भी मरीज भर्ती करके ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था और दवाइयां दी जा रही थीं।
माता कॉलोनी का अस्पताल
रिपोर्टर: मुझे कई दिन से उल्टी-दस्त हो रहे हैं। बहुत परेशान हूं।
युवक: ज्यादा समस्या लग रही है। ग्लूकोज भी चढ़वानी है क्या?
रिपोर्टर: पहले दवाई लेकर देख लेता हूं। कल तक आराम नहीं लगा तो भर्ती हो जाऊंगा।
युवक: यह दवाइयां सुबह-शाम ले लेना। कल दोबारा आ जाना।
रिपोर्टर: आज काफी मरीज आ रहे हैं, क्या बात है?
युवक: रविवार है न। अस्पताल की छुट्टी रहती है, इसलिए ज्यादा मरीज आते हैं।
सुभाष गेट के पास
रिपोर्टर: डॉक्टर साहब मेरे बेटे को दस्त लग रहे हैं। उसके लिए दवाई लेनी है।
युवक: कब से हो रहे हैं।
रिपोर्टर: दो दिन से परेशान है, ठीक नहीं हो रहे।
युवक: उसे लेकर आ जाते तो देख भी लेते और जरूरत पड़ती तो भर्ती कर लेते।
रिपोर्टर: अभी दवाइयां लिख दो, मैं उन दवाइयों को खिलाकर देख लेता हूं।
युवक: ये दवाइयां ले जाओ, इनसे आराम लग जाएगा।
रिपोर्टर: ये कौनसी गोली है?
युवक: इसपर देख लो लिखा होगा।
रिपोर्टर: मुझे अंग्रेजी नहीं आती है, आप बता दो या लिखकर दे दो।
युवक: कल जब दोबारा आओगे तो लिखकर दे दूंगा, अभी इनको ले जाओ।
बागपत में इस तरह के क्लीनिक व अस्पताल शुरू होने की काफी शिकायतें आ रही हैं। घरों के अंदर अस्पताल चलने की जानकारी नहीं थी, क्योंकि बाहर कोई बोर्ड लगा होता है तो अंदर जाकर जांच कर लेते हैं। अब घरों में अस्पताल चलने की जानकारी मिली है, सभी जगह छापा मारा जाएगा।
9डॉ. विभाष राजपूत, डिप्टी सीएमओ

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