{"_id":"6a5622895c9dc1b58f08b0d0","slug":"yajna-japa-and-virtuous-deeds-are-the-invaluable-heritage-of-indian-culture-acharya-vijaypal-baghpat-news-c-28-1-bpt1002-155189-2026-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"यज्ञ, जप व सत्कर्म भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर : आचार्य विजयपाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यज्ञ, जप व सत्कर्म भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर : आचार्य विजयपाल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरनावा के महर्षि वेदव्यास वानप्रस्थ आश्रम में हुआ स्वस्ति यज्ञ
फोटो-एक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिनौली। बरनावा के महर्षि वेदव्यास वानप्रस्थ आश्रम में अमावस्या के अवसर पर स्वस्ति यज्ञ हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि के लिए आहुतियां दीं।
यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य विजयपाल शास्त्री ने विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न कराया। राजू और मुनेश देवी यजमान के रूप में उपस्थित रहे। अक्षांश और आकाश ने वैदिक मंत्रों का पाठ किया। आचार्य विजयपाल शास्त्री ने कहा कि अमावस्या पर वैदिक विधि से किया गया यज्ञ वातावरण को शुद्ध करता है। यह मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। उन्होंने बताया कि यज्ञ, जप और सत्कर्म भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिन्हें हर व्यक्ति को अपनाना चाहिए। आचार्य विजय कुमार ने इस अवसर पर कहा कि नियमित यज्ञ, सत्संग और स्वाध्याय से व्यक्ति का जीवन संस्कारित होता है। यह आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। इस धार्मिक आयोजन में रमेशचंद त्यागी, राजपाल भाटी, रजवीर राणा, दुष्यंत कुमार, इंद्र मुनि, मूलचंद गुप्ता और धनुषपाल सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञापन
फोटो-एक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिनौली। बरनावा के महर्षि वेदव्यास वानप्रस्थ आश्रम में अमावस्या के अवसर पर स्वस्ति यज्ञ हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि के लिए आहुतियां दीं।
यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य विजयपाल शास्त्री ने विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न कराया। राजू और मुनेश देवी यजमान के रूप में उपस्थित रहे। अक्षांश और आकाश ने वैदिक मंत्रों का पाठ किया। आचार्य विजयपाल शास्त्री ने कहा कि अमावस्या पर वैदिक विधि से किया गया यज्ञ वातावरण को शुद्ध करता है। यह मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। उन्होंने बताया कि यज्ञ, जप और सत्कर्म भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिन्हें हर व्यक्ति को अपनाना चाहिए। आचार्य विजय कुमार ने इस अवसर पर कहा कि नियमित यज्ञ, सत्संग और स्वाध्याय से व्यक्ति का जीवन संस्कारित होता है। यह आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। इस धार्मिक आयोजन में रमेशचंद त्यागी, राजपाल भाटी, रजवीर राणा, दुष्यंत कुमार, इंद्र मुनि, मूलचंद गुप्ता और धनुषपाल सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञापन