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Bahraich News: चित्तौरा झील बनेगी पर्यटन का डेस्टिनेशन

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2026 12:09 AM IST
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Chittaura Lake will become a tourist destination
चित्तौरा ​स्थित महाराजा सुहेलदेव पर्यटन स्थल। - फोटो : चित्तौरा ​स्थित महाराजा सुहेलदेव पर्यटन स्थल।
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बहराइच। जिला मुख्यालय से सटे महाराजा सुहेलदेव स्मारक के समीप चित्तौरा झील के तट को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने 4.10 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। साथ ही प्रथम किस्त के रूप में 50 लाख रुपये जारी कर दिए हैं।
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उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि अवमुक्त राशि से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को तेजी मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में महाराजा सुहेलदेव स्मारक के निकट स्थित चित्तौरा झील को ईको-पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह क्षेत्र महान योद्धा महाराजा सुहेलदेव के पराक्रम का साक्षी रहा है। वर्ष 2025 में 34 लाख से अधिक पर्यटकों ने बहराइच का भ्रमण किया।
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आधारभूत संरचना विकास पर करोड़ों रुपये होंगे खर्च
परियोजना के तहत विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें कैफेटेरिया ब्लॉक पर सबसे अधिक 158.83 लाख रुपये की लागत प्रस्तावित है, जबकि डेक और बोट जेट्टी के निर्माण पर 56.41 लाख रुपये खर्च होंगे। टिकट काउंटर ब्लॉक, शौचालय, बोरिंग एवं सबमर्सिबल पंप और सेप्टिक टैंक जैसी आवश्यक सुविधाओं के विकास पर भी अलग-अलग मदों में धनराशि निर्धारित की गई है।

चित्तौरा झील का है पौराणिक महत्व

चित्तौरा झील पर्यटन स्थल के साथ-साथ वीरता और पराक्रम की गाथा समेटे हुए है। 11वीं शताब्दी में यहीं सबसे भीषण युद्ध लड़ा गया। महाराजा सुहेलदेव की सेना ने महमूद गजनवी के भांजे सैयद सालार मसूद गाजी को परास्त किया था। इस झील की पौराणिक मान्यता है कि त्रेता युग में यह टेढ़ी नदी के रूप में जानी जाती थी। राजा जनक के गुरु मुनि अष्टावक्र का इसी झील के तट पर आश्रम था। मुनि अष्टावक्र का शरीर जिस प्रकार आठ जगहों से मुड़ा हुआ था, उसी प्रकार यह टेढ़ी नदी भी अपने आकार के लिए विख्यात है। कालांतर में यह चित्तौरा झील के रूप में लोकप्रिय हुई।
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