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Bahraich News: कतर्नियाघाट में हथिनी की मौत, एक सप्ताह सड़ता रहा शव
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कतर्नियाघाट में मृत मिला हाथी।
- फोटो : कतर्नियाघाट में मृत मिला हाथी।
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मिहीपुरवा/बिछिया। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के कोर जोन में एक मादा हाथी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। खास ये कि बिछिया बीट के घने जंगल में नाले के किनारे पड़ा हाथी का शव कई दिनों तक सड़ता रहा, लेकिन वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। क्षेत्र में दुर्गंध फैलने पर सोमवार रात हाथी की मौत का पता चला। इसके बाद मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम करवाकर बिसरा परीक्षण के लिए बरेली भेजा गया है।
मंगलवार सुबह बिछिया-आंबा मार्ग पर वन विभाग की गाड़ियों का जमावड़ा देखकर ग्रामीणों को पहले किसी अनहोनी की आशंका हुई। बाद में पता चला कि मादा हाथी की मौत हो गई है। मार्ग से करीब दो किलोमीटर अंदर घने जंगल में सोमवार रात को गश्ती टीम को मादा हाथी मृत अवस्था में मिली। वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ की सूचना पर मंगलवार सुबह दुधवा के मुख्य वन संरक्षक एच राजा मोहन, प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित और एसडीओ सहित पूरी टीम मौके पर पहुंची। दुर्गम रास्ता होने के कारण टीम को गाड़ियां सड़क किनारे छोड़कर पैदल जंगल के अंदर जाना पड़ा।
घने जंगलों के बीच मादा हाथी का शव पड़ा मिला। डॉ. तल्हा और डॉ. दीपक की अगुवाई में तीन सदस्यीय चिकित्सकीय टीम ने शव का पोस्टमार्टम किया। डॉक्टरों की टीम ने विसरा सुरक्षित कर उसे आईवीआरआई, बरेली भेजा है। इसके बाद जेसीबी से गड्ढा खोदकर शव को अधिकारियों ने अपने सामने दफन करवाया। मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि मादा हाथी की उम्र करीब 20 से 25 वर्ष के बीच थी। शव लगभग एक सप्ताह पुराना लग रहा है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम में मौत के कारणों का सही पता नहीं लग सका है। बिसरा की रिपोर्ट आने के बाद मौत का राज खुलेगा। वहीं, प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला स्वाभाविक मौत का प्रतीत होता है, लेकिन वास्तविक कारण विसरा रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा।
ग्रामीण बोले- कई दिनों से आ रही थी दुर्गंध
जंगल के निकट स्थित आंबा, बर्दिया आदि गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों से इलाके में तेज दुर्गंध फैल रही थी, जिससे लगता है कि शव काफी समय से वहां पड़ा था। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इन दिनों इलाके में हाथियों के झुंड सक्रिय हैं और टस्कर हाथियों का व्यवहार आक्रामक हो गया है। ऐसे में आपसी संघर्ष में मौत की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
वन विभाग की पेट्रोलिंग पर उठे सवाल
जहां मादा हाथी का शव मिला है वह अति संवेदनशील कोर जोन है। ऐसे में इस क्षेत्र में इतने बड़े वन्यजीव के शव की जानकारी समय रहते वन विभाग को क्यों नहीं हो सकी। क्या गश्ती व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है। यदि नियमित निगरानी होती, तो यह घटना इतने दिनों तक छिपी नहीं रहती।
इससे पहले हुई हाथियों की मौत पर नजर
- 5 मार्च 2021 में कतर्नियाघाट के सदर बीट के जंगल में नर हाथी की मौत।
- फरवरी 2025 में कतर्नियाघाट जंगल से सटे नेपाल के खाता कॉरिडोर के जंगल में नर हाथी की मौत।
- फरवरी 2025 में ट्रांस गेरुआ कतर्नियाघाट के जंगल में नर हाथी की मौत।
- दिसम्ब 2025 में गेरुआ नदी में हाथी के बच्चे की मौत।
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मंगलवार सुबह बिछिया-आंबा मार्ग पर वन विभाग की गाड़ियों का जमावड़ा देखकर ग्रामीणों को पहले किसी अनहोनी की आशंका हुई। बाद में पता चला कि मादा हाथी की मौत हो गई है। मार्ग से करीब दो किलोमीटर अंदर घने जंगल में सोमवार रात को गश्ती टीम को मादा हाथी मृत अवस्था में मिली। वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ की सूचना पर मंगलवार सुबह दुधवा के मुख्य वन संरक्षक एच राजा मोहन, प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित और एसडीओ सहित पूरी टीम मौके पर पहुंची। दुर्गम रास्ता होने के कारण टीम को गाड़ियां सड़क किनारे छोड़कर पैदल जंगल के अंदर जाना पड़ा।
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घने जंगलों के बीच मादा हाथी का शव पड़ा मिला। डॉ. तल्हा और डॉ. दीपक की अगुवाई में तीन सदस्यीय चिकित्सकीय टीम ने शव का पोस्टमार्टम किया। डॉक्टरों की टीम ने विसरा सुरक्षित कर उसे आईवीआरआई, बरेली भेजा है। इसके बाद जेसीबी से गड्ढा खोदकर शव को अधिकारियों ने अपने सामने दफन करवाया। मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि मादा हाथी की उम्र करीब 20 से 25 वर्ष के बीच थी। शव लगभग एक सप्ताह पुराना लग रहा है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम में मौत के कारणों का सही पता नहीं लग सका है। बिसरा की रिपोर्ट आने के बाद मौत का राज खुलेगा। वहीं, प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला स्वाभाविक मौत का प्रतीत होता है, लेकिन वास्तविक कारण विसरा रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा।
ग्रामीण बोले- कई दिनों से आ रही थी दुर्गंध
जंगल के निकट स्थित आंबा, बर्दिया आदि गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों से इलाके में तेज दुर्गंध फैल रही थी, जिससे लगता है कि शव काफी समय से वहां पड़ा था। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इन दिनों इलाके में हाथियों के झुंड सक्रिय हैं और टस्कर हाथियों का व्यवहार आक्रामक हो गया है। ऐसे में आपसी संघर्ष में मौत की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
वन विभाग की पेट्रोलिंग पर उठे सवाल
जहां मादा हाथी का शव मिला है वह अति संवेदनशील कोर जोन है। ऐसे में इस क्षेत्र में इतने बड़े वन्यजीव के शव की जानकारी समय रहते वन विभाग को क्यों नहीं हो सकी। क्या गश्ती व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है। यदि नियमित निगरानी होती, तो यह घटना इतने दिनों तक छिपी नहीं रहती।
इससे पहले हुई हाथियों की मौत पर नजर
- 5 मार्च 2021 में कतर्नियाघाट के सदर बीट के जंगल में नर हाथी की मौत।
- फरवरी 2025 में कतर्नियाघाट जंगल से सटे नेपाल के खाता कॉरिडोर के जंगल में नर हाथी की मौत।
- फरवरी 2025 में ट्रांस गेरुआ कतर्नियाघाट के जंगल में नर हाथी की मौत।
- दिसम्ब 2025 में गेरुआ नदी में हाथी के बच्चे की मौत।