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Bahraich News: सरयू लाल निशान पार, महसी के छह गांवों में बाढ़, चारों ओर पानी
Fri, 07 Aug 2026 12:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Fri, 07 Aug 2026 12:13 AM IST
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महसी के महंतपुरा-जोधेपुरवा मार्ग पर बह रहा पानी। -संवाद
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बहराइच/बौंडी। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने बहराइच में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। शारदा, गिरिजापुरी और सरयू बैराजों से छोड़े जा रहे 2.79 लाख क्यूसेक पानी के दबाव से सरयू नदी एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 14 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है। महसी तहसील के छह गांवों में पानी घुस गया है, इससे करीब 2,500 लोग प्रभावित हैं, महंतपुरवा-जोधेपुरवा गांव का सड़क से संपर्क टूटने से दिक्कत बढ़ गई है।
एल्गिन ब्रिज पर सरयू ने खतरे का निशान पार कर लिया है। बृहस्पतिवार शाम चार बजे ब्रिज पर नदी का जलस्तर 106.21 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 106.07 मीटर से 14 सेंटीमीटर ऊपर है। नदी के उफान से महसी तहसील के तटवर्ती छह गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। खेतों के बाद अब गांवों में भी पानी घुसने लगा है, करीब ढाई हजार की आबादी प्रभावित हो गई है।
नदी का पानी मांझा दरियाबुर्द ग्राम पंचायत के लोनियनपुरवा, जैतापुर के जोगलापुरवा, महंतपुरवा, जोधेपुरवा, गोलागंज, कोठार नई बस्ती समेत कई बस्तियों में फैल गया है। कई गांवों की स्थिति ऐसी हो गई है कि एक ओर नदी और तीन ओर बाढ़ का पानी है।
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ग्रामीणों के लिए अब नाव ही आवागमन का एकमात्र साधन बचा है। महंतपुरवा-जोधेपुरवा संपर्क मार्ग पर लगभग चार फीट पानी बहने से सड़क का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। नाव की व्यवस्था न होने से लोग गृहस्थी का सामान भी सुरक्षित स्थानों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम के अनुसार बैराजों से कुल 2,79,728 क्यूसेक पानी बृहस्पतिवार शाम से छोड़ा जा रहा है। जल मापक विवेक चौधरी ने बताया कि जलस्तर लगभग एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
महसी उपजिलाधिकारी राजेश अग्रवाल ने बताया कि राजस्व टीमें लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रही हैं। प्रशासन का दावा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है, हालांकि प्रभावित गांवों के लोगों का कहना है कि राहत एवं बचाव की व्यवस्था अभी जरूरत के अनुरूप नहीं है। ग्रामीणों ने नाव, राशन और पशुओं के चारे की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की है।
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प्रशासन के इंतजाम नाकाफी
महंतपुरवा गांव निवासी राजित राम ने बताया कि सुबह तक खेत बचे थे, दोपहर में पानी गांव की तरफ बढ़ने लगा। यदि रात तक जलस्तर और बढ़ा तो घर छोड़ना पड़ेगा। मुंशीलाल ने कहा कि संपर्क मार्ग डूब चुका है। बीमार और बुजुर्गों को बाहर निकालना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। लेकिन अब तक नाव की व्यवस्था नहीं है। राजकुमार ने बताया कि धान की पूरी फसल पानी में डूब रही है। अगर पानी नहीं घटा तो बड़ा नुकसान होगा।
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एल्गिन ब्रिज पर सरयू ने खतरे का निशान पार कर लिया है। बृहस्पतिवार शाम चार बजे ब्रिज पर नदी का जलस्तर 106.21 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 106.07 मीटर से 14 सेंटीमीटर ऊपर है। नदी के उफान से महसी तहसील के तटवर्ती छह गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। खेतों के बाद अब गांवों में भी पानी घुसने लगा है, करीब ढाई हजार की आबादी प्रभावित हो गई है।
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नदी का पानी मांझा दरियाबुर्द ग्राम पंचायत के लोनियनपुरवा, जैतापुर के जोगलापुरवा, महंतपुरवा, जोधेपुरवा, गोलागंज, कोठार नई बस्ती समेत कई बस्तियों में फैल गया है। कई गांवों की स्थिति ऐसी हो गई है कि एक ओर नदी और तीन ओर बाढ़ का पानी है।
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ग्रामीणों के लिए अब नाव ही आवागमन का एकमात्र साधन बचा है। महंतपुरवा-जोधेपुरवा संपर्क मार्ग पर लगभग चार फीट पानी बहने से सड़क का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। नाव की व्यवस्था न होने से लोग गृहस्थी का सामान भी सुरक्षित स्थानों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम के अनुसार बैराजों से कुल 2,79,728 क्यूसेक पानी बृहस्पतिवार शाम से छोड़ा जा रहा है। जल मापक विवेक चौधरी ने बताया कि जलस्तर लगभग एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
महसी उपजिलाधिकारी राजेश अग्रवाल ने बताया कि राजस्व टीमें लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रही हैं। प्रशासन का दावा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है, हालांकि प्रभावित गांवों के लोगों का कहना है कि राहत एवं बचाव की व्यवस्था अभी जरूरत के अनुरूप नहीं है। ग्रामीणों ने नाव, राशन और पशुओं के चारे की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की है।
प्रशासन के इंतजाम नाकाफी
महंतपुरवा गांव निवासी राजित राम ने बताया कि सुबह तक खेत बचे थे, दोपहर में पानी गांव की तरफ बढ़ने लगा। यदि रात तक जलस्तर और बढ़ा तो घर छोड़ना पड़ेगा। मुंशीलाल ने कहा कि संपर्क मार्ग डूब चुका है। बीमार और बुजुर्गों को बाहर निकालना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। लेकिन अब तक नाव की व्यवस्था नहीं है। राजकुमार ने बताया कि धान की पूरी फसल पानी में डूब रही है। अगर पानी नहीं घटा तो बड़ा नुकसान होगा।