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Bahraich News: सूख गई गेरुआ, 23 दिन नहीं होगी बोटिंग, डॉल्फिन भी नहीं दिखेंगी
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बैराज पर क्लोजर के बाद सूखी पड़ी गेरुआ नदी।
- फोटो : बैराज पर क्लोजर के बाद सूखी पड़ी गेरुआ नदी।
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बिछिया। कतर्नियाघाट की जीवनरेखा मानी जाने वाली गेरुआ नदी इन दिनों सूखी नजर आ रही है। नेपाल से पानी बहुत कम आने और इसी बीच चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज की मरम्मत के लिए गेट खोल दिए जाने से कई स्थानों पर नदी का तल साफ दिखाई देने लगा है। इससे न सिर्फ क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य प्रभावित हुआ है, बल्कि कतर्नियाघाट आने वाले पर्यटकों की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है। अगले 23 दिनों तक न तो पर्यटक बोटिंग का आनंद ले सकेंगे और न ही गेरुआ की लहरों में डॉल्फिन व अन्य जलीय जीवों की अठखेलियां देख सकेंगे।
नेपाल के पहाड़ों से निकलने वाली गेरुआ और कौड़ियाला नदियां कतर्नियाघाट स्थित चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज पर मिलकर सरयू नदी का रूप लेती हैं। हर वर्ष मानसून से पहले बैराज और उसके फाटकों की मरम्मत व तकनीकी परीक्षण के लिए क्लोजर किया जाता है। इसी के तहत इस वर्ष भी 22 मई से 13 जून तक के लिए बैराज के गेट को खोल दिया गया है। इससे अपस्ट्रीम क्षेत्र में गेरुआ नदी लगभग सूख गई है, जबकि डाउन स्ट्रीम में थोड़ा-बहुत पानी बचा है।
कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य में आने वाले पर्यटकों के लिए गेरुआ नदी बोटिंग और डॉल्फिन दर्शन का प्रमुख आकर्षण है। नदी सूखने से पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं। स्थानीय नाविकों और पर्यटन से जुड़े लोगों की आमदनी पर भी इसका असर पड़ा है। बैराज प्रभारी नितिन यादव ने बताया कि मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। 13 जून को क्लोजर समाप्त होते ही पानी छोड़ा जाएगा और गेरुआ नदी फिर अपने पुराने स्वरूप में लौट आएगी।
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जानिए क्या है क्लोजर
क्लोजर वह प्रक्रिया है, जिसमें बैराज के फाटकों को निर्धारित अवधि के लिए खोलकर मरम्मत, तकनीकी जांच और रखरखाव का कार्य किया जाता है। इस दौरान पानी का प्रवाह नहीं रहता है, जिससे अपस्ट्रीम क्षेत्र में नदी का जलस्तर घट जाता है।
नेपाल के पहाड़ों से निकलने वाली गेरुआ और कौड़ियाला नदियां कतर्नियाघाट स्थित चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज पर मिलकर सरयू नदी का रूप लेती हैं। हर वर्ष मानसून से पहले बैराज और उसके फाटकों की मरम्मत व तकनीकी परीक्षण के लिए क्लोजर किया जाता है। इसी के तहत इस वर्ष भी 22 मई से 13 जून तक के लिए बैराज के गेट को खोल दिया गया है। इससे अपस्ट्रीम क्षेत्र में गेरुआ नदी लगभग सूख गई है, जबकि डाउन स्ट्रीम में थोड़ा-बहुत पानी बचा है।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य में आने वाले पर्यटकों के लिए गेरुआ नदी बोटिंग और डॉल्फिन दर्शन का प्रमुख आकर्षण है। नदी सूखने से पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं। स्थानीय नाविकों और पर्यटन से जुड़े लोगों की आमदनी पर भी इसका असर पड़ा है। बैराज प्रभारी नितिन यादव ने बताया कि मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। 13 जून को क्लोजर समाप्त होते ही पानी छोड़ा जाएगा और गेरुआ नदी फिर अपने पुराने स्वरूप में लौट आएगी।
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