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Ballia News: जनगणना ड्यूटी से पढ़ाई प्रभावित, छुट्टियों में भी काम करेंगे शिक्षक

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2026 10:42 PM IST
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Census duty affects studies, teachers will work even on holidays
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बलिया। जनगणना कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। इसमें जिले के सभी शिक्षा क्षेत्र के शिक्षक शामिल हैं। शिक्षकों को प्रगणक व सुपरवाइजर का कार्य सौंपा गया है। शिक्षकों का प्रशिक्षण 20 अप्रैल से चल रहा है। इसका सीधा असर स्कूलों में चल रही पढ़ाई पर पड़ रहा है। 20 मई से परिषदीय विद्यालयों का ग्रीष्म अवकाश हो जाएगा। उसके बाद भी शिक्षक जनगणना कार्य करेंगे।
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प्राथमिक विद्यालय सहतवार नंबर दो, रेवती पर तीन शिक्षक कार्यरत हैं। इस विद्यालय के सभी शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाई गई है। इस विद्यालय में एक शिक्षा मित्र हैं। विद्यालय शिक्षामित्र के सहारे है। प्राथमिक विद्यालय दुहीजान, बांसडीह में दो शिक्षक हैं। दोनों शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में है। इस विद्यालय पर एक भी शिक्षामित्र नहीं है। प्राथमिक विद्यालय सहतवार नंबर एक केवल एक शिक्षा मित्र के सहारे संचालित है। प्राथमिक विद्यालय सुहवल में दो शिक्षक हैं, सभी की जनगणना में ड्यूटी है। प्राथमिक विद्यालय अंदौर में तीन शिक्षक हैं, सभी जनगणना कार्य में हैं। प्राथमिक विद्यालय पिठाइच, बांसडीह में तीन शिक्षक हैं, सभी की जनगणना ड्यूटी लगी है। इन विद्यालयों में छात्र संख्या 100 के पार है। यही स्थिति कमोवेश जिले के ज्यादातर परिषदीय विद्यालयों की है। बच्चे मध्याह्न भोजन कर घर चले जाते हैं।
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विभाग के अनुसार, परिषदीय विद्यालय के करीब 92 प्रतिशत शिक्षक प्रशिक्षण कार्य में लगे हैं। शिक्षक घर-घर जाकर आंकड़े जुटाने, फॉर्म भरने और डाटा अपडेट करने जैसे कार्य कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर है, जहां पहले से ही शिक्षकों की कमी है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जनगणना कार्य अत्यंत जरूरी है। इसे तय समय में पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है। इसी कारण शिक्षकों की सेवाएं ली जा रही हैं। हालांकि, पढ़ाई के नुकसान को कम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा रहा है। कार्य में तेजी लाने के लिए अब छुट्टियों में भी शिक्षकों से काम लेने का निर्णय लिया गया है।
शिक्षकों का कहना है कि लगातार काम के दबाव से कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा है। सरकार अवकाश में कार्य करने के बदले कुछ नहीं दे रही है। अभिभावकों ने भी चिंता जताई है कि बच्चों की पढ़ाई पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। शिक्षकों को गैर-शैक्षिक कार्यों में लगाने से स्थिति और बिगड़ सकती है।
विसंगतियों से शिक्षकों में आक्रोश
शिक्षकों की जनगणना में ड्यूटी उनके पद के अनुसार नहीं लगाई गई है। ऐसी शिकायत शिक्षक कर रहे हैं। उनका कहना है कि जूनियर शिक्षकों की ड्यूटी सुपरवाइजर के पद पर तथा सीनियर शिक्षकों की ड्यूटी प्रगणक के रूप में लगाई गई है। इससे साफ है कि सीनियर शिक्षक जूनियर को आख्या प्रेषित करेगा। इससे सीनियर शिक्षकों में आक्रोश है। शिक्षकों ने बताया कि शिक्षकों की ड्यूटी लगाने में लापरवाही बरती गई है। इससे उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंच रही है।

जनगणना का कार्य काफी महत्वपूर्ण है। इसे हर हाल में समय से पूरा करना है। ग्रीष्मावकाश में बच्चों की छुट्टी रहेगी। लेकिन शिक्षकों को अवकाश नहीं मिलेगा। शिक्षक अवकाश में जनगणना का कार्य करेंगे। - मनीष कुमार सिंह, बीएसए।
विशेष समय पर काम के बदले मिले प्रतिकर अवकाश
बलिया। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष व राज्यकर्मचारी संयुक्त परिषद के संघर्ष समिति चेयरमैन डॉ़ घनश्याम चौबे ने मांग की है कि जनगणना कार्य एवं अन्य अवकाश दिवसों में कराए जाने वाले शासकीय कार्यों के बदले बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों-कर्मचारियों को प्रतिकर अवकाश अथवा अर्जित-विशेष अवकाश प्रदान किया जाय। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिला मंत्री धीरज राय के कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक एवं कर्मचारी नियमित शैक्षणिक कार्यों के साथ जनगणना, निर्वाचन, सर्वेक्षण, मतदाता पुनरीक्षण, प्रशिक्षण, विशेष अभियान आदि का निर्वहन करते हैं। कई बार ग्रीष्मावकाश, शीतावकाश, रविवार एवं अन्य घोषित सार्वजनिक अवकाश दिवसों में भी काम कराए जाते हैं। कुछ अवसरों पर अवकाश दिवसों में कार्य के बदले अल्प पारिश्रमिक दिया जाता है। यह न्यायोचित नहीं है। यह न्याय की भावना के विपरीत है।
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