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हल्दी-बैना बाईपास: मार्ग परिवर्तन पर भड़के किसान
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बांसडीहरोड क्षेत्र के मां भगवती मंदिर परिसर में बाईपास हटाओ संघर्ष समिति के तत्वावधान में बैठक
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बांसडीहरोड। विकास खंड दुबहड़ अंतर्गत मां भगवती मंदिर परिसर में बाईपास हटाओ संघर्ष समिति के बैनर तले क्षेत्रीय किसानों की एक बैठक हुई। बैठक में किसानों ने हल्दी-बैना बाईपास के लिए किए जा रहे नए चिह्नांकन और सर्वे का पुरजोर विरोध करते हुए इसे तानाशाही रवैया करार दिया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने क्षेत्रीय किसानों को बिना किसी पूर्व सूचना या सहमति के अनधिकृत तरीके से मार्ग परिवर्तित कर दिया है। अब घनी आबादी और उपजाऊ जमीनों पर पिलर लगाए जा रहे हैं, जिससे किसानों में भारी रोष है।
किसान नेता राकेश सिंह पिंटू ने कहा कि करीब दो साल पहले हल्दी-बैना बाईपास का मार्ग सुरहा ताल के निर्जन और अनुपजाऊ क्षेत्र से प्रस्तावित था। पूर्व मार्ग पर सभी किसान सहमत थे और उसका सर्वे भी हो चुका था। वह मार्ग एनजीटी के दायरे से भी बाहर था।
अचानक बिना जनसुनवाई के मार्ग बदलकर उसे उपजाऊ खेतों की ओर मोड़ दिया गया है। किसान अनिल गिरी ने बताया कि वर्तमान में आमघाट टघरौली, टघरौली के मठिया, मझौली, सोनपुर कलां, दुबौली, सलेमपुर और सलेमपुर की मठिया जैसे गांवों की बेहद उपजाऊ जमीन और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पिलर लगाए जा रहे हैं। इससे छोटे किसानों के सामने रोजी-रोटी और सिर छिपाने की छत का संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही उनकी बात सुनी गई। हम जल्द ही मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे। अगर हमारी उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए पुराना नक्शा बहाल नहीं किया गया, तो हम सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन और संघर्ष के लिए बाध्य होंगे। प्रमोद चौबे, शंभू गुप्ता, बृज बिहारी भारती, प्रवीण चौबे, रमाशंकर चौबे, विजय यादव समेत बड़ी संख्या में प्रभावित किसान उपस्थित रहे। सीआरआर त्रिभुवन ने बताया कि एनजीटी के कारण कुछ बदलाव हुआ होगा। लोक निर्माण विभाग की तरफ से कार्य किया जा रहा है।
ये रखी मुख्य मांगें
-- नया सर्वे रद्द कर पूर्व प्रस्तावित (अनुपजाऊ जमीन वाले) मार्ग पर ही बाईपास बनाया जाए।
-- किसानों के साथ जनसुनवाई की जाए और उनकी लिखित सहमति ली जाए।
-- घनी आबादी और उपजाऊ कृषि भूमि को नष्ट होने से बचाया जाए।
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किसान नेता राकेश सिंह पिंटू ने कहा कि करीब दो साल पहले हल्दी-बैना बाईपास का मार्ग सुरहा ताल के निर्जन और अनुपजाऊ क्षेत्र से प्रस्तावित था। पूर्व मार्ग पर सभी किसान सहमत थे और उसका सर्वे भी हो चुका था। वह मार्ग एनजीटी के दायरे से भी बाहर था।
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अचानक बिना जनसुनवाई के मार्ग बदलकर उसे उपजाऊ खेतों की ओर मोड़ दिया गया है। किसान अनिल गिरी ने बताया कि वर्तमान में आमघाट टघरौली, टघरौली के मठिया, मझौली, सोनपुर कलां, दुबौली, सलेमपुर और सलेमपुर की मठिया जैसे गांवों की बेहद उपजाऊ जमीन और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पिलर लगाए जा रहे हैं। इससे छोटे किसानों के सामने रोजी-रोटी और सिर छिपाने की छत का संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही उनकी बात सुनी गई। हम जल्द ही मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे। अगर हमारी उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए पुराना नक्शा बहाल नहीं किया गया, तो हम सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन और संघर्ष के लिए बाध्य होंगे। प्रमोद चौबे, शंभू गुप्ता, बृज बिहारी भारती, प्रवीण चौबे, रमाशंकर चौबे, विजय यादव समेत बड़ी संख्या में प्रभावित किसान उपस्थित रहे। सीआरआर त्रिभुवन ने बताया कि एनजीटी के कारण कुछ बदलाव हुआ होगा। लोक निर्माण विभाग की तरफ से कार्य किया जा रहा है।
ये रखी मुख्य मांगें
