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Ballia News: दबाव में हो रहे आधे से ज्यादा सीटी स्कैन, इसकी किरणें एक्स-रे से 10 गुना खतरनाक
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जिला अस्पताल के नए भवन स्थित सीटी स्कैन कराने की लगी मरीजों और तीमारदारों की भीड़।संवाद
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बलिया। जिला अस्पताल में सीटी स्कैन (कंप्यूटेड टॉमोग्राफी) की सुविधा का दुरुपयोग हो रहा है। बिना चिकित्सकीय परामर्श के लोग सीटी स्कैन करा रहे हैं। जब चिकित्सक मना करते हैं तो जुगाड़ लगाते हैं। किसी भी दर्द या आंतरिक दिक्कत की स्थिति में मरीज खुद या फिर अप्रशिक्षित चिकित्सक की सलाह पर स्कैन कराने का दबाव बनाते हैं। इस कारण मरीजों की भारी भीड़ दोपहर बाद तक लग रही है।
जिला अस्पताल में रोजाना होने वाले 100 से अधिक सीटी स्कैन में आधे से ज्यादा दबाव वाले होते हैं, जिनमें एजेंटों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। जिला अस्पताल प्रशासन की लचर व्यवस्था के कारण गरीब मरीजों को मिलने वाली सुविधा का दुरुपयोग हो रहा है। वहीं, सीटी स्कैन की खतरनाक रेडिएशन के संपर्क में आने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है। सोमवार और मंगलवार को दोपहर बाद तक जांच कराने के लिए गहमा गहमी बनी रही।
एक्स-रे से 10 गुना ज्यादा रेडिएशन
जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एसडी बिंद ने बताया कि विशेष परिस्थितियों में तो सीटी स्कैन ठीक है, लेकिन अकारण स्कैन दीर्घकालिक दुष्प्रभावों का कारण बनता है। एक्स-रे की तुलना में सीटी स्कैन से तीन से 10 गुना तक हानिकारक रेडिएशन निकलते हैं। बार-बार संपर्क में आने से मानव ऊतकों की संरचना बदल जाती है, जिससे कैंसर और अन्य बीमारियों का खतरा होता है।
रोजाना हो रहे सौ से ज्यादा सीटी स्कैन
जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 70 से 120 एक्स-रे और 100 से अधिक सीटी स्कैन होते हैं। सीटी स्कैन की मशीन प्राइवेट कंपनी के जरिये लगी हुई है, जिस पर अस्पताल रोजाना 60 से 70 हजार रुपये व्यय करता है। 100 में आधे से ज्यादा सीटी स्कैन जुगाड़ वाले होते हैं। जांच रिपोर्ट में 100 में सिर्फ 10 से 20 मरीजों की जांच में कोई गंभीर बीमारी पाई जाती है। रोजाना 40 से 60 मरीज सिर्फ सीटी स्कैन के लिए ओपीडी में पहुंचते हैं, जो कि चिकित्सकों के समझाने पर भी नहीं मानते। यही स्थिति एक्स-रे की भी है। फिजिशियन डाॅ. पंकज झा ने बताया कि सर्दी से सिरदर्द व छाती में संक्रमण के मरीज भी आते ही पहले सीटी स्कैन के लिए दबाव बनाते हैं। इन्हें समझाना मुश्किल होता है। स्थिति ये है कि प्राइवेट के चिकित्सकों की ओर से भी सीटी स्कैन लिखने पर पैसे बचाने के लिए लोग जिला अस्पताल के चिकित्सकों पर दबाव बनाकर यहीं से सीटी स्कैन कराते हैं।
रेडिएशन से इन बीमारियों का खतरा
सीएमएस डॉ. एसके यादव ने बताया की सीटी स्कैन पर निगरानी रखी गई है। सिर्फ सर्जन और कुछ वरिष्ठ चिकित्सक के हस्ताक्षर पर ही इसे कराया जाता है। बार-बार रेडिएशन के संपर्क में आने से डीएनए क्षतिग्रस्त होता है। इससे कैंसर, फेफड़ों का कमजोर होना, हड्डियों में टेड़ापन व कमजोर होना, गर्भधारण में समस्या, गुर्दों के खराब होने का जोखिम, मस्तिष्क में कमी, जन्म लेने वाले बच्चों में दिव्यांगता आदि समस्या हो सकती है।
अकारण लोग सीटी स्कैन कराना चाहते हैं, जबकि यहां के चिकित्सक का परामर्श नहीं होता। बाहर छोटी से छोटी समस्या के लिए भी सीटी स्कैन कराने का परामर्श दे दिया जाता है। समझाने पर भी लोग नहीं मानते, इसके लिए एडवाइजरी करनी पड़ी है। प्राकृतिक स्रोतों से एक साल में मानव शरीर पर दो एमएसवी का प्रभाव पड़ता है, जबकि एक बार का सीटी स्कैन इससे कई गुना अधिक प्रभाव छोड़ता है। जिला अस्पताल के चिकित्सक की सलाह पर ही स्कैन किया जाता है। अस्पताल में भटकने वाले अवांछनीय तत्वों पर भी अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे मरीजों को समस्या न हो। -डाॅ. एसएन राय, सर्जन
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जिला अस्पताल में रोजाना होने वाले 100 से अधिक सीटी स्कैन में आधे से ज्यादा दबाव वाले होते हैं, जिनमें एजेंटों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। जिला अस्पताल प्रशासन की लचर व्यवस्था के कारण गरीब मरीजों को मिलने वाली सुविधा का दुरुपयोग हो रहा है। वहीं, सीटी स्कैन की खतरनाक रेडिएशन के संपर्क में आने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है। सोमवार और मंगलवार को दोपहर बाद तक जांच कराने के लिए गहमा गहमी बनी रही।
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एक्स-रे से 10 गुना ज्यादा रेडिएशन
जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एसडी बिंद ने बताया कि विशेष परिस्थितियों में तो सीटी स्कैन ठीक है, लेकिन अकारण स्कैन दीर्घकालिक दुष्प्रभावों का कारण बनता है। एक्स-रे की तुलना में सीटी स्कैन से तीन से 10 गुना तक हानिकारक रेडिएशन निकलते हैं। बार-बार संपर्क में आने से मानव ऊतकों की संरचना बदल जाती है, जिससे कैंसर और अन्य बीमारियों का खतरा होता है।
रोजाना हो रहे सौ से ज्यादा सीटी स्कैन
जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 70 से 120 एक्स-रे और 100 से अधिक सीटी स्कैन होते हैं। सीटी स्कैन की मशीन प्राइवेट कंपनी के जरिये लगी हुई है, जिस पर अस्पताल रोजाना 60 से 70 हजार रुपये व्यय करता है। 100 में आधे से ज्यादा सीटी स्कैन जुगाड़ वाले होते हैं। जांच रिपोर्ट में 100 में सिर्फ 10 से 20 मरीजों की जांच में कोई गंभीर बीमारी पाई जाती है। रोजाना 40 से 60 मरीज सिर्फ सीटी स्कैन के लिए ओपीडी में पहुंचते हैं, जो कि चिकित्सकों के समझाने पर भी नहीं मानते। यही स्थिति एक्स-रे की भी है। फिजिशियन डाॅ. पंकज झा ने बताया कि सर्दी से सिरदर्द व छाती में संक्रमण के मरीज भी आते ही पहले सीटी स्कैन के लिए दबाव बनाते हैं। इन्हें समझाना मुश्किल होता है। स्थिति ये है कि प्राइवेट के चिकित्सकों की ओर से भी सीटी स्कैन लिखने पर पैसे बचाने के लिए लोग जिला अस्पताल के चिकित्सकों पर दबाव बनाकर यहीं से सीटी स्कैन कराते हैं।
रेडिएशन से इन बीमारियों का खतरा
सीएमएस डॉ. एसके यादव ने बताया की सीटी स्कैन पर निगरानी रखी गई है। सिर्फ सर्जन और कुछ वरिष्ठ चिकित्सक के हस्ताक्षर पर ही इसे कराया जाता है। बार-बार रेडिएशन के संपर्क में आने से डीएनए क्षतिग्रस्त होता है। इससे कैंसर, फेफड़ों का कमजोर होना, हड्डियों में टेड़ापन व कमजोर होना, गर्भधारण में समस्या, गुर्दों के खराब होने का जोखिम, मस्तिष्क में कमी, जन्म लेने वाले बच्चों में दिव्यांगता आदि समस्या हो सकती है।
अकारण लोग सीटी स्कैन कराना चाहते हैं, जबकि यहां के चिकित्सक का परामर्श नहीं होता। बाहर छोटी से छोटी समस्या के लिए भी सीटी स्कैन कराने का परामर्श दे दिया जाता है। समझाने पर भी लोग नहीं मानते, इसके लिए एडवाइजरी करनी पड़ी है। प्राकृतिक स्रोतों से एक साल में मानव शरीर पर दो एमएसवी का प्रभाव पड़ता है, जबकि एक बार का सीटी स्कैन इससे कई गुना अधिक प्रभाव छोड़ता है। जिला अस्पताल के चिकित्सक की सलाह पर ही स्कैन किया जाता है। अस्पताल में भटकने वाले अवांछनीय तत्वों पर भी अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे मरीजों को समस्या न हो। -डाॅ. एसएन राय, सर्जन