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Ballia News: बिना सर्जन 6 महिलाओं का ऑपरेशन, अतुल्यम नर्सिंग होम सील
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बलिया। सिकंदरपुर तहसील में नगरा मार्ग पर संचालित अतुल्यम हॉस्पिटल को शनिवार की देर रात सील कर दिया गया। जांच में अस्पताल में लापरवाही मिली है। बिना सर्जन और एनेस्थीसिया के 6 महिलाओं का ऑपरेशन कर दिया गया था। एक महीने मानक विहीन संचालित छह निजी अस्पताल सील किए जा चुके हैं।
उपजिलाधिकारी सुनील कुमार, क्षेत्राधिकारी रजनीश कुमार एवं सीएचसी के अधीक्षक डॉ. दिग्विजय की संयुक्त टीम ने जांच में पाया कि दूसरे के नाम पर पंजीकृत अस्पताल को बीएमएस चिकित्सक चला रहा था। मानक विहीन ओटी मिली। स्थानीय लोगों के अनुसार तहसील क्षेत्र में 30 से ज्यादा निजी अस्पताल व जांच केंद्र संचालित हो रहे हैं। डीएम के निर्देश पर सभी तहसीलों में निजी अस्पतालों, जांच केंद्रों की जांच चल रही है। शनिवार जांच के दौरान अतुल्यम अस्पताल में पंजीकरण अलीगढ़ निवासी डॉ. मसूद के नाम पर मिला। लेकिन वह मौके पर उपस्थित नहीं थे और उनका संपर्क नंबर भी उपलब्ध नहीं कराया जा सका। मौके पर मौजूद बीएएमएस चिकित्सक डॉ. विकसित गौरव जांच टीम को संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
टीम ने यह भी पाया कि 10 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में मात्र दो पैरामेडिकल स्टाफ थे। इसके अलावा अस्पताल का बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट प्रमाण पत्र भी समाप्त पाया गया। जांच में बिना सर्जन और एनेस्थीसिया के डॉक्टर की मौजूदगी में छह मरीजों का ऑपरेशन किया गया था। इसे प्रशासन ने मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करार दिया। जरूरी दस्तावेजों का अभाव और सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी जांच में सामने आई।
एसडीएम सुनील कुमार ने कहा कि क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सिकंदरपुर क्षेत्र में ऐसे 30 से ज्यादा निजी अस्पताल, जच्चा-बच्चा केंद्र संचालित हैं। इनकी जांच की जाएगी।
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केस 01 : शहर के अपूर्वा अस्पताल में 22 मार्च को पथरी के ऑपरेशन के दौरान लापरवाही के कारण अनीशा राय (24) की मौत हो गई। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने अस्पताल संचालक सहित पांच चिकित्सकों पर मुकदमा दर्ज कर ओटी को सील किया।
केस 02 : पूर्वाचल अस्पताल में 13 मार्च को ऑपरेशन के दौरान प्रसूता व दो नवजात बच्चों की मौत हो गई। पति की तहरीर पर पुलिस ने चिकित्सक पर मुकदमा दर्ज कर अस्पताल को सील किया।
केस 03 शहर से सटे हनुमागंज के आकाश नर्सिंग होम में ऑपरेशन में लापरवाही से प्रसूता की हालत बिगड़ने से वाराणसी में मौत हो गई। चिकित्सक ने नवजात को 50 हजार रुपये के लिए बंधक बना लिया था। पति की तहरीर पर चिकित्सक पर मुकदमा दर्ज कर अस्पताल को सील कर दिया गया।
केस 04 : बैरिया कस्बा के एक निजी अस्पताल में फरवरी में आपरेशन में लापरवाही से प्रसूता ममता (26) की मौत हो गई। परिजन की तहरीर पर पुलिस ने चिकित्सक पर मुकदमा दर्ज कर अस्पताल को सील कर दिया।
केस 05 : रसड़ा कस्बे के आयुष अस्पताल में 9 मार्च को ऑपरेशन के दौरान प्रसूता प्रियांशु (23)की मौत हो गई। परिजनों ने गलत इंजेक्शन और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। अस्पताल संचालक पर मुकदमा दर्ज कर अस्पताल को सील कर दिया गया।
केस 06 : शहर के जगदीशपुर स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसूता की हालत बिगड़ने पर चिकित्सक ने वाराणसी रेफर कर दिया, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों ने 24 मार्च को अस्पताल पर हंगामा किया था, लेकिन शिकायत न देने के कारण अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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उपजिलाधिकारी सुनील कुमार, क्षेत्राधिकारी रजनीश कुमार एवं सीएचसी के अधीक्षक डॉ. दिग्विजय की संयुक्त टीम ने जांच में पाया कि दूसरे के नाम पर पंजीकृत अस्पताल को बीएमएस चिकित्सक चला रहा था। मानक विहीन ओटी मिली। स्थानीय लोगों के अनुसार तहसील क्षेत्र में 30 से ज्यादा निजी अस्पताल व जांच केंद्र संचालित हो रहे हैं। डीएम के निर्देश पर सभी तहसीलों में निजी अस्पतालों, जांच केंद्रों की जांच चल रही है। शनिवार जांच के दौरान अतुल्यम अस्पताल में पंजीकरण अलीगढ़ निवासी डॉ. मसूद के नाम पर मिला। लेकिन वह मौके पर उपस्थित नहीं थे और उनका संपर्क नंबर भी उपलब्ध नहीं कराया जा सका। मौके पर मौजूद बीएएमएस चिकित्सक डॉ. विकसित गौरव जांच टीम को संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
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टीम ने यह भी पाया कि 10 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में मात्र दो पैरामेडिकल स्टाफ थे। इसके अलावा अस्पताल का बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट प्रमाण पत्र भी समाप्त पाया गया। जांच में बिना सर्जन और एनेस्थीसिया के डॉक्टर की मौजूदगी में छह मरीजों का ऑपरेशन किया गया था। इसे प्रशासन ने मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करार दिया। जरूरी दस्तावेजों का अभाव और सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी जांच में सामने आई।
एसडीएम सुनील कुमार ने कहा कि क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सिकंदरपुर क्षेत्र में ऐसे 30 से ज्यादा निजी अस्पताल, जच्चा-बच्चा केंद्र संचालित हैं। इनकी जांच की जाएगी।
केस 01 : शहर के अपूर्वा अस्पताल में 22 मार्च को पथरी के ऑपरेशन के दौरान लापरवाही के कारण अनीशा राय (24) की मौत हो गई। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने अस्पताल संचालक सहित पांच चिकित्सकों पर मुकदमा दर्ज कर ओटी को सील किया।
केस 02 : पूर्वाचल अस्पताल में 13 मार्च को ऑपरेशन के दौरान प्रसूता व दो नवजात बच्चों की मौत हो गई। पति की तहरीर पर पुलिस ने चिकित्सक पर मुकदमा दर्ज कर अस्पताल को सील किया।
केस 03 शहर से सटे हनुमागंज के आकाश नर्सिंग होम में ऑपरेशन में लापरवाही से प्रसूता की हालत बिगड़ने से वाराणसी में मौत हो गई। चिकित्सक ने नवजात को 50 हजार रुपये के लिए बंधक बना लिया था। पति की तहरीर पर चिकित्सक पर मुकदमा दर्ज कर अस्पताल को सील कर दिया गया।
केस 04 : बैरिया कस्बा के एक निजी अस्पताल में फरवरी में आपरेशन में लापरवाही से प्रसूता ममता (26) की मौत हो गई। परिजन की तहरीर पर पुलिस ने चिकित्सक पर मुकदमा दर्ज कर अस्पताल को सील कर दिया।
केस 05 : रसड़ा कस्बे के आयुष अस्पताल में 9 मार्च को ऑपरेशन के दौरान प्रसूता प्रियांशु (23)की मौत हो गई। परिजनों ने गलत इंजेक्शन और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। अस्पताल संचालक पर मुकदमा दर्ज कर अस्पताल को सील कर दिया गया।
केस 06 : शहर के जगदीशपुर स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसूता की हालत बिगड़ने पर चिकित्सक ने वाराणसी रेफर कर दिया, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों ने 24 मार्च को अस्पताल पर हंगामा किया था, लेकिन शिकायत न देने के कारण अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।