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Ballia News: पुजारी ने बेटों के नाम कर दी 32 बीघा जमीन की वसीयत
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पंदह। पकड़ी थाना क्षेत्र के उकछी गांव स्थित करीब 200 वर्ष पुराने शिवजी भगवती जी सर्वकार मठ की 32 बीघा जमीन का बड़ा विवाद सामने आया है। मठ की देखरेख करने वाले पुजारी रामाश्रय यति पर गंभीर आरोप है कि उन्होंने धार्मिक संपत्ति को निजी स्वार्थवश अपने तीन पुत्रों के नाम वसीयत कर दी।
ग्राम प्रधान राजकुमार प्रसाद ने बताया कि पुजारी ने 10 मार्च 2025 को मठ की पूरी 32 बीघा भूमि सहित समस्त चल-अचल संपत्तियों की वसीयत अपने पुत्रों संतोष गिरी, कृष्णा गिरी और अमरेश गिरी के नाम कर दी। हैरानी की बात यह है कि वसीयत के लगभग चार माह बाद ही पुजारी की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके पुत्रों ने उक्त वसीयत के आधार पर राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की थी।
करीब एक वर्ष तक यह मामला दबा रहा, लेकिन जैसे ही इसकी जानकारी ग्रामीणों को तो इसे धार्मिक आस्था के साथ छल बताते हुए आपत्ति जताई है। कहना है कि मठ की संपत्ति किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि जन आस्था और धार्मिक कार्यों की धरोहर होती है, जिसे निजी संपत्ति में बदलना गंभीर अनियमितता है।
ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में इस मठ की देखरेख विश्वनाथ यति करते थे। उनके निधन के बाद उनके शिष्य रामाश्रय यति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने इस विश्वास को निभाने के बजाय संपत्ति को अपने परिवार के नाम करने का प्रयास किया। इस पूरे प्रकरण को लेकर ग्राम प्रधान राजकुमार प्रसाद ने तहसीलदार सिकंदरपुर के न्यायालय में राजस्व अधिनियम की धारा 34 के तहत आपत्ति दर्ज कराई है।
उन्होंने वसीयत को निरस्त कर मठ की भूमि को पूर्व स्थिति में बहाल करने की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार न्यायालय ने दोनों पक्षों को 11 अप्रैल को साक्ष्यों सहित उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
मठ की जमीन की वरासत करने की जानकारी मुझे नहीं है और न ही ये जनता हूं कि प्रधान की ओर से किस बात की आपत्ति दर्ज कराई गई है। तहसीलदार कोर्ट द्वारा की ओर से तीनों भाइयों के नाम नोटिस जारी किए जाने की बात भी हमें नहीं पता है। - अमरेश गिरी
आपत्ति दर्ज कर ली गई है तथा मामले की सुनवाई के लिए 11 अप्रैल की तिथि निर्धारित की गई है। दोनों पक्षों को नियमानुसार सूचना प्रेषित कर दी गई है और उन्हें निर्धारित तिथि पर साक्ष्यों सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।- देवेंद्र कुमार पाण्डेय, अपर जिला मजिस्ट्रेट/तहसीलदार, सिकंदरपुर
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ग्राम प्रधान राजकुमार प्रसाद ने बताया कि पुजारी ने 10 मार्च 2025 को मठ की पूरी 32 बीघा भूमि सहित समस्त चल-अचल संपत्तियों की वसीयत अपने पुत्रों संतोष गिरी, कृष्णा गिरी और अमरेश गिरी के नाम कर दी। हैरानी की बात यह है कि वसीयत के लगभग चार माह बाद ही पुजारी की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके पुत्रों ने उक्त वसीयत के आधार पर राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की थी।
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करीब एक वर्ष तक यह मामला दबा रहा, लेकिन जैसे ही इसकी जानकारी ग्रामीणों को तो इसे धार्मिक आस्था के साथ छल बताते हुए आपत्ति जताई है। कहना है कि मठ की संपत्ति किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि जन आस्था और धार्मिक कार्यों की धरोहर होती है, जिसे निजी संपत्ति में बदलना गंभीर अनियमितता है।
ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में इस मठ की देखरेख विश्वनाथ यति करते थे। उनके निधन के बाद उनके शिष्य रामाश्रय यति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने इस विश्वास को निभाने के बजाय संपत्ति को अपने परिवार के नाम करने का प्रयास किया। इस पूरे प्रकरण को लेकर ग्राम प्रधान राजकुमार प्रसाद ने तहसीलदार सिकंदरपुर के न्यायालय में राजस्व अधिनियम की धारा 34 के तहत आपत्ति दर्ज कराई है।
उन्होंने वसीयत को निरस्त कर मठ की भूमि को पूर्व स्थिति में बहाल करने की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार न्यायालय ने दोनों पक्षों को 11 अप्रैल को साक्ष्यों सहित उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
मठ की जमीन की वरासत करने की जानकारी मुझे नहीं है और न ही ये जनता हूं कि प्रधान की ओर से किस बात की आपत्ति दर्ज कराई गई है। तहसीलदार कोर्ट द्वारा की ओर से तीनों भाइयों के नाम नोटिस जारी किए जाने की बात भी हमें नहीं पता है। - अमरेश गिरी
आपत्ति दर्ज कर ली गई है तथा मामले की सुनवाई के लिए 11 अप्रैल की तिथि निर्धारित की गई है। दोनों पक्षों को नियमानुसार सूचना प्रेषित कर दी गई है और उन्हें निर्धारित तिथि पर साक्ष्यों सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।- देवेंद्र कुमार पाण्डेय, अपर जिला मजिस्ट्रेट/तहसीलदार, सिकंदरपुर