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Ballia News: चार डैंपनर के बीच छोड़े गैप से कटान की आशंका
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मझौवां। क्षेत्र में बलिया-बैरिया तटबंध को गंगा नदी के कटान से बचाने के नाम पर बाढ़ विभाग की कार्यशैली को लेकर तटवर्ती इलाकों के लोगों में नाराजगी है। पिछले वर्ष के अधूरे पड़े दो परियोजनाओं को आधार बनाकर चार डैंपनर (कटर) और स्पर निर्माण का पिचिंग कराई जा रही है। तटवर्ती लोगों का आरोप है कि इससे कटान की आशंका बनी रहेगी।
रामगढ़ में किमीटर 27.500 से 27.950 के बीच 8 करोड़ 30 लाख 59 हजार रुपये की भारी-भरकम लागत से चल रहे बचाव कार्य को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष है। जिसमें नागेन्द्र सिंह, जयप्रकाश ओझा, अनिल ओझा, जीतू सिंह और गुड्डू प्रसाद ने बाढ़ विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि कटान होना तय मानकर फ्लड फाइटिंग के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने की नीति पहले से ही बनाई जा चुकी है। स्थानीय लोगों ने कहा कि चार डैम्पनरों के बीच जानबूझकर छोड़ा गया गैप क्या कटान की आशंका है।
लोगों ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या गंगा की प्रचंड धारा को सिर्फ 20 मीटर चौड़ी जालियों में बंधे पत्थरों से रोका जा सकता है। लोगों ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले करोड़ों रुपये की लागत से बने 9 लेयर के रिवेटमेंट और कटर खुद को सुरक्षित नहीं रख पाए। फिर आधे-अधूरे और खानापूर्ति वाले इस कार्य से कटान रुकने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उधर हुकुम छपरा में राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को बचाने के नाम पर किमी. 26.250 पर 6 करोड़ 32 लाख 95 हजार रुपये की लागत से स्पर निर्माण और पीचिंग कार्य चल रहा है। लेकिन यहां भी हालात चिंताजनक हैं।
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दोनों परियोजनाओं का कार्य जेई की देखरेख में कराया जा रहा है। डैंपनर के बीच गैपिंग को इसलिए छोड़ा गया जिससे कास्टिंग बढ़ जा रही है। इससे कोई खतरा नहीं है। अधूरे पड़े कार्य को पूर्ण कराया जा रहा है। स्पर निर्माण कार्य में किसी भी स्तर पर कोई कोताही नहीं बरती जा रही है।- अशोक सिंह ,एक्सक्यूटिव इंजीनियर, बाढ़ विभाग, बलिया
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फोटो। 1. रामगढ़ में कराया जा रहा कटान रोधी कार्य।
2. हुकुम छपरा में अधूरे कार्य कर मौके से ठेकेदार फरार।
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रामगढ़ में किमीटर 27.500 से 27.950 के बीच 8 करोड़ 30 लाख 59 हजार रुपये की भारी-भरकम लागत से चल रहे बचाव कार्य को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष है। जिसमें नागेन्द्र सिंह, जयप्रकाश ओझा, अनिल ओझा, जीतू सिंह और गुड्डू प्रसाद ने बाढ़ विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि कटान होना तय मानकर फ्लड फाइटिंग के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने की नीति पहले से ही बनाई जा चुकी है। स्थानीय लोगों ने कहा कि चार डैम्पनरों के बीच जानबूझकर छोड़ा गया गैप क्या कटान की आशंका है।
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लोगों ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या गंगा की प्रचंड धारा को सिर्फ 20 मीटर चौड़ी जालियों में बंधे पत्थरों से रोका जा सकता है। लोगों ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले करोड़ों रुपये की लागत से बने 9 लेयर के रिवेटमेंट और कटर खुद को सुरक्षित नहीं रख पाए। फिर आधे-अधूरे और खानापूर्ति वाले इस कार्य से कटान रुकने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उधर हुकुम छपरा में राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को बचाने के नाम पर किमी. 26.250 पर 6 करोड़ 32 लाख 95 हजार रुपये की लागत से स्पर निर्माण और पीचिंग कार्य चल रहा है। लेकिन यहां भी हालात चिंताजनक हैं।
दोनों परियोजनाओं का कार्य जेई की देखरेख में कराया जा रहा है। डैंपनर के बीच गैपिंग को इसलिए छोड़ा गया जिससे कास्टिंग बढ़ जा रही है। इससे कोई खतरा नहीं है। अधूरे पड़े कार्य को पूर्ण कराया जा रहा है। स्पर निर्माण कार्य में किसी भी स्तर पर कोई कोताही नहीं बरती जा रही है।- अशोक सिंह ,एक्सक्यूटिव इंजीनियर, बाढ़ विभाग, बलिया
फोटो। 1. रामगढ़ में कराया जा रहा कटान रोधी कार्य।
2. हुकुम छपरा में अधूरे कार्य कर मौके से ठेकेदार फरार।
