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Ballia News: लगातार 7 से 8 घंटे की अघोषित कटौती ने लोग परेशान, 5 बार हो जाती है ट्रिपिंग
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मझौवां। 42 डिग्री रिकॉर्ड तापमान के बीच बिजली आपूर्ति चरमरा गई है। 60 से ज्यादा गांवों की 52 हजार की आबादी बिजली का इंतजार करती रहती है।
मझौवां क्षेत्र के 132/33 केवी सब-स्टेशन से जुड़े इन गांवों में पिछले एक सप्ताह से बिजली को लेकर परेशानी है। हालात ऐसे हो चुके हैं कि गांवों में अब बिजली का आना किसी संयोग से कम नहीं है। लगातार 7 से 8 घंटे की अघोषित कटौती ने लोगों का चैन और नींद सब छीन लिया है। बिजली कब आएगी और कब जाएगी, इसका कोई ठिकाना नहीं रहता। उमस भरी रातों में लोग पसीने से तरबतर होकर करवटें बदलते रहते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी मासूम बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। गर्मी से बिलखते बच्चे पूरी रात रोते हैं, वहीं बुजुर्गों को सांस लेने तक में तकलीफ हो रही है।
महिलाएं पूरी रात हाथ के पंखे झलने को मजबूर हैं। घरों में रखे कूलर और पंखे सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। अगर रात में गलती से 40-45 मिनट के लिए बिजली आ भी जाए, तो उसमें भी 4 से 5 बार ट्रिपिंग होती है। हर घंटे बिजली गुल होने से हम लोग मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुके हैं।भीषण संकट के इस दौर में बिजली विभाग पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है। जब इस गंभीर समस्या को लेकर विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। एक्सईएन मूलचंद शर्मा ने इस मामले में कुछ भी बताने से साफ इनकार कर दिया। एसई विनोद कुमार जायसवाल लगातार फोन रिसीव करने से परहेज करते रहे।
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रोस्टर के अनुसार आपूर्ति की मांग
ग्रामीणों ने सरकार द्वारा तय किए गए ग्रामीण रोस्टर के अनुरूप नियमित बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने की मांग की है। बिजली की आंख-मिचौली से नाराज ग्रामीणों ने विभाग को दो टूक चेतावनी दी है। यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ेगा। ग्रामीण जल्द ही बिजली विभाग के कार्यालय का घेराव कर उग्र जन आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।
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बिजली संकट पर सलेमपुर सांसद रमाशंकर राजभर सख्त, शासन को लिखा पत्र
सिकंदरपुर। भीषण गर्मी के बीच पूर्वांचल के कई विधानसभा क्षेत्रों में लगातार हो रही बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और बार-बार फॉल्ट की समस्या को लेकर सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद रमाशंकर राजभर विद्यार्थी ने विद्युत निगम के को पत्र भेजा है। सांसद रमाशंकर राजभर ने प्रमुख सचिव ऊर्जा को भेजे पत्र में बलिया और देवरिया जनपद की खराब बिजली व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि 7 से 8 घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक को भेजे एक अन्य पत्र में सांसद ने बलिया के नगरा क्षेत्र का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नगरा को वर्षों पहले ही नगर पंचायत का दर्जा मिल चुका है। इसके बावजूद विद्युत निगम इसे ग्रामीण क्षेत्र मान रहा है और ग्रामीण रोस्टर के अनुसार बिजली दे रहा है। सांसद के मीडिया प्रभारी जितेश कुमार वर्मा ने बताया कि क्षेत्र की जनता लगातार बिजली संकट की मार झेल रही है। संवाद
मझौवां क्षेत्र के 132/33 केवी सब-स्टेशन से जुड़े इन गांवों में पिछले एक सप्ताह से बिजली को लेकर परेशानी है। हालात ऐसे हो चुके हैं कि गांवों में अब बिजली का आना किसी संयोग से कम नहीं है। लगातार 7 से 8 घंटे की अघोषित कटौती ने लोगों का चैन और नींद सब छीन लिया है। बिजली कब आएगी और कब जाएगी, इसका कोई ठिकाना नहीं रहता। उमस भरी रातों में लोग पसीने से तरबतर होकर करवटें बदलते रहते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी मासूम बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। गर्मी से बिलखते बच्चे पूरी रात रोते हैं, वहीं बुजुर्गों को सांस लेने तक में तकलीफ हो रही है।
महिलाएं पूरी रात हाथ के पंखे झलने को मजबूर हैं। घरों में रखे कूलर और पंखे सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। अगर रात में गलती से 40-45 मिनट के लिए बिजली आ भी जाए, तो उसमें भी 4 से 5 बार ट्रिपिंग होती है। हर घंटे बिजली गुल होने से हम लोग मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुके हैं।भीषण संकट के इस दौर में बिजली विभाग पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है। जब इस गंभीर समस्या को लेकर विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। एक्सईएन मूलचंद शर्मा ने इस मामले में कुछ भी बताने से साफ इनकार कर दिया। एसई विनोद कुमार जायसवाल लगातार फोन रिसीव करने से परहेज करते रहे।
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रोस्टर के अनुसार आपूर्ति की मांग
ग्रामीणों ने सरकार द्वारा तय किए गए ग्रामीण रोस्टर के अनुरूप नियमित बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने की मांग की है। बिजली की आंख-मिचौली से नाराज ग्रामीणों ने विभाग को दो टूक चेतावनी दी है। यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ेगा। ग्रामीण जल्द ही बिजली विभाग के कार्यालय का घेराव कर उग्र जन आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।
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