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Banda News: बिना स्टेबलाइजर चल रहे एसी, सैकड़ों मरीजों की जान को खतरा

Wed, 06 May 2026 12:33 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Wed, 06 May 2026 12:33 AM IST
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ACs running without stabilizers, endangering the lives of hundreds of patients
फोटो - 07 जिला अस्पताल के पुरुष वार्ड में डारेक्ट चलता एसी। संवाद
बांदा। जिला अस्पताल और रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की जा रही है। मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करते हुए, अधिकांश एयर कंडीशनर (एसी) बिना स्टेबलाइजर के चलाए जा रहे हैं। यह स्थिति न केवल बिजली के झटके और आग लगने के खतरे को बढ़ाती है, बल्कि अनगिनत मरीजों की जान को भी गंभीर खतरे में डालती है। वहीं, हाल ही में दिल्ली में एसी विस्फोट और आग लगने की घटनाओं ने सुरक्षा के प्रति लापरवाही के गंभीर परिणामों को उजागर किया है।
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जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर, महिला, पुरुष, इमरजेंसी और बर्न वार्ड सहित चिल्ड्रेन वार्ड में करीब एक दर्जन एसी और कूलर लगे हुए हैं। चिंताजनक बात यह है कि ट्रामा सेंटर को छोड़कर, लगभग सभी वार्डों में एसी सीधे बिजली से जुड़े हुए हैं, जिनमें स्टेबलाइजर का अभाव है। स्टेबलाइजर वोल्टेज के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने का काम करते हैं, जिससे उपकरण सुरक्षित रहते हैं। इनके बिना, बिजली के वोल्टेज में अचानक वृद्धि होने पर एसी में विस्फोट या आग लगने की आशंका बढ़ जाती है, जो सीधे तौर पर वार्डों में भर्ती सैकड़ों मरीजों की जान के लिए खतरा पैदा कर सकती है। लापरवाही यहीं खत्म नहीं होती। एसी की नियमित सफाई न होने के कारण उनमें धूल और मकड़ी के जाले जमा हो गए हैं। यह धूल न केवल एसी के प्रदर्शन को प्रभावित करती है, बल्कि ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट का कारण भी बन सकती है। बिजली की लाइनों में भी कई जगह कट लगे हुए हैं, जो एक और गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है।
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मेडिकल कॉलेज की स्थिति भी चिंताजनक

जिला अस्पताल की तरह ही रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में भी स्थिति चिंताजनक है। हालांकि यहां के प्रत्येक एसी में स्टेबलाइजर लगे हुए हैं लेकिन नियमित सफाई के अभाव में उनमें भी धूल की मोटी परत जमी हुई है। बिजली की लाइनों में कट लगना यहां भी एक आम समस्या है। इन सब अनदेखी के बावजूद, दोनों संस्थानों के अधिकारी एसी को पूरी तरह सुरक्षित बता रहे हैं, जो उनकी गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है।
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एसी विस्फोट का खतरा निम्नलिखित कारणों से बढ़ जाता है:



पुरानी वायरिंग और उनमें लगे कट।

लगातार एसी को चालू रखना।

एसी के अंदर धूल जमा होना।

कई सालों तक एसी की सर्विस न होना।

मरीजों और नर्सों की व्यथा



मरीजों का कहना है कि एसी को धीमा या तेज करने की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे कमरे का तापमान नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। मरीजों की देखभाल में लगी नर्सों ने बताया कि जब से एसी लगाए गए हैं, उन्होंने केवल उन्हें चलाने के अलावा कुछ नहीं देखा है। उन्हें एसी को सुरक्षित रखने के संबंध में कोई टिप्स या प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। पंखों की स्थिति भी वैसी ही है। वे सीधे चलते हैं और उनकी गति को नियंत्रित नहीं किया जा सकता।




सुरक्षा के उपाय और अधिकारियों का दावा



सीजन शुरू होने से पहले एसी की सर्विस अवश्य कराएं।

एसी के लिए एक अलग पावर लाइन की व्यवस्था करें।

एसी को लगातार कई घंटों तक चालू न रखें।

एसी से किसी भी असामान्य आवाज आने पर उसे गंभीरता से लें।

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वर्जन-

एसी दो साल पुराना व पूरी तरह से सुरक्षित हैं। हर साल सीजन के पहले रखरखाव के दौरान जांच कराई जाती है।

- आर कुमार

सीएमएस, जिला अस्पताल, बांदा

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गर्मी शुरू होने से पहले एसी की जांच कराई जाती है। कोई कमी होती है तो उसे दूर कराया जाता है। फिलहाल वह सुरक्षित है।

- सुनील कौशल

प्राचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज, बांदा

फोटो - 07 जिला अस्पताल के पुरुष वार्ड में डारेक्ट चलता एसी। संवाद

फोटो - 07 जिला अस्पताल के पुरुष वार्ड में डारेक्ट चलता एसी। संवाद

फोटो - 07 जिला अस्पताल के पुरुष वार्ड में डारेक्ट चलता एसी। संवाद

फोटो - 07 जिला अस्पताल के पुरुष वार्ड में डारेक्ट चलता एसी। संवाद

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