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Banda News: चकबंदी अधिकारी के खिलाफ अधिवक्ताओं का प्रदर्शन, कोर्ट का बहिष्कार
Sat, 09 May 2026 01:17 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 09 May 2026 01:17 AM IST
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बांदा। बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी के कार्य व्यवहार के विरोध में जिला अधिवक्ता संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने न्यायालय का बहिष्कार करते हुए जिलाधिकारी से अधिकारी के निस्तारित मामलों की जांच और निलंबन की मांग की है।
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विमल कुमार सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र दिया है। पत्र में कहा गया कि बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी अजय कुमार वर्मा दिसंबर 2024 को यहां आए थे। संघ के करीब एक सौ सदस्यों ने उन पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में करीब पांच सौ मामलों का निस्तारण किया है। इसमें मनमानी और भ्रष्ट आचरण साफ दिख रहा है। मनमानी का विरोध करने पर वह सदस्यों से अमर्यादित भाषा में बात करते हैं। अधिवक्ताओं और वादकारियों के साथ उनका व्यवहार संतोषजनक नहीं है।
भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप
अध्यक्ष ने निस्तारित मुकदमों की जांच और चकबंदी अधिकारी के तत्काल निलंबन की मांग की है। उनके भ्रष्ट आचरण से चकों की अदला-बदली में मनमानी होती है, जिससे छोटे किसान परेशान हैं। कई प्राथमिकी दर्ज समय पर निस्तारित नहीं हो रहे हैं। बंदोबस्त अधिकारी अजय कुमार ने आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि कुछ अधिवक्ता अपने मामलों के निस्तारण का दबाव बनाते हैं और मना करने पर आरोप लगाते हैं।
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जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विमल कुमार सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र दिया है। पत्र में कहा गया कि बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी अजय कुमार वर्मा दिसंबर 2024 को यहां आए थे। संघ के करीब एक सौ सदस्यों ने उन पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में करीब पांच सौ मामलों का निस्तारण किया है। इसमें मनमानी और भ्रष्ट आचरण साफ दिख रहा है। मनमानी का विरोध करने पर वह सदस्यों से अमर्यादित भाषा में बात करते हैं। अधिवक्ताओं और वादकारियों के साथ उनका व्यवहार संतोषजनक नहीं है।
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भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप
अध्यक्ष ने निस्तारित मुकदमों की जांच और चकबंदी अधिकारी के तत्काल निलंबन की मांग की है। उनके भ्रष्ट आचरण से चकों की अदला-बदली में मनमानी होती है, जिससे छोटे किसान परेशान हैं। कई प्राथमिकी दर्ज समय पर निस्तारित नहीं हो रहे हैं। बंदोबस्त अधिकारी अजय कुमार ने आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि कुछ अधिवक्ता अपने मामलों के निस्तारण का दबाव बनाते हैं और मना करने पर आरोप लगाते हैं।
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