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Banda News: बैंक खाताधारक को 19 साल बाद उपभोक्ता फोरम से मिला न्याय
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- शाखा प्रबंधक को 6.57 लाख रुपये अदा करने के आदेश
- 19 साल का देना पड़ेगा ब्याज
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। एक बैंक प्रबंधक की ओर से खाताधारक को विश्वास में लेकर उसके रुपये हड़पने के मामले में 19 साल बाद पीड़ित को न्याय मिला। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बांदा की ओर से यह न्याय दिया गया। उन्होंने बैंक प्रबंधक को 45 दिन के अंदर पीड़ित पक्ष को छह लाख 57 हजार 370 रुपये ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। ब्याज की गणना, फोरम में वाद दाखिल होने की तारीख से फैसले की तारीख तक जोड़ा जाएगा।
शहर के बलखंडी नाका निवासी रामप्रकाश द्विवेदी ने छह सितंबर 2006 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बांदा में वाद दाखिल किया था। बताया कि तुलसी ग्रामीण बैंक जिसका वर्तमान नाम त्रिवेणी क्षेत्रीय बैंक है। जिसकी शाखा जखौरा में खुली है। यहां के तत्कालीन शाखा प्रबंधक प्रमोद कुमार मिश्रा ने उनसे एक बचत खाता खोलने के लिए बातचीत की। उन्होंने एक बड़ी धनराशि से खाता खुलवाने की बात कही। विश्वास में आकर उन्होंने शाखा प्रबंधक प्रमोद कुमार मिश्रा को छह लाख रुपये की एक चेक दे दी और खाता खोलकर रुपया जमा करने को कहा। आरोप लगाया कि प्रबंधक ने यह चेक अपने बेटे पंकज मिश्रा के एसबीआई बांदा से 30 मार्च 2005 को कैश करा ली। इसके बाद चार लाख रुपये उसके नए खाते में जमा किया और दो लाख रुपये हड़प गए। जब उसने पासबुक प्रिंट कराने की बात रखी तो बैंक प्रबंधक उसे आज-कल का बहाना करके टालते रहे और वह भी विश्वास होने के कारण कुछ नहीं कर पाया।
बताया कि उसे आयकर विभाग बांदा की ओर से एकाउंट पेयी ओनली का चेक 9080 रुपये और दूसरा चेक 48290 रुपये का दिया था। इसे भी उसने प्रमोद मिश्रा को दे दिया था। इसमें 9080 वाली चेक तो प्रमोद ने खाते में लगा दी, लेकिन 48 हजार वाली चेक खाते में नहीं लगाई और यह रकम उन्होंने स्वयं हड़प ली। इस पूरी साजिश का खुलासा तब हुआ जब रामप्रकाश अपने खाते से रुपये निकालने बैंक पहुंचे तो बताया गया कि उनके खाते में 500 रुपये से अधिक नहीं है। यह सुनकर वह स्तब्ध रह गया। जांच के बाद उन्होंने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। करीब 19 साल 10 महीने और 25 दिन चले इस मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के प्रधान न्यायाधीश राघवेन्द्र और न्यायाधीश गीतांजलि भारती ने दोनों पक्षों को सुना और उनकी ओर से दिए गए साक्ष्यों का भी अवलोकन किया। सुनवाई के बाद प्रधान न्यायाधीश व न्यायाधीश ने विपक्षी शाखा प्रबंधक को सेवा में त्रुटि और व्यापारिक कदाचरण का दोषी पाया। उन्होंने विपक्षीगण को 45 दिन के अंदर 6,57,370 रुपये रामप्रकाश द्विवेदी को अदा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही 19 साल 10 महीने 25 दिन का सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार रुपये और वाद व्यय पर आए खर्च के लिए पांच हजार रुपये अलग से अदा करने के आदेश दिए हैं।
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- 19 साल का देना पड़ेगा ब्याज
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। एक बैंक प्रबंधक की ओर से खाताधारक को विश्वास में लेकर उसके रुपये हड़पने के मामले में 19 साल बाद पीड़ित को न्याय मिला। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बांदा की ओर से यह न्याय दिया गया। उन्होंने बैंक प्रबंधक को 45 दिन के अंदर पीड़ित पक्ष को छह लाख 57 हजार 370 रुपये ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। ब्याज की गणना, फोरम में वाद दाखिल होने की तारीख से फैसले की तारीख तक जोड़ा जाएगा।
शहर के बलखंडी नाका निवासी रामप्रकाश द्विवेदी ने छह सितंबर 2006 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बांदा में वाद दाखिल किया था। बताया कि तुलसी ग्रामीण बैंक जिसका वर्तमान नाम त्रिवेणी क्षेत्रीय बैंक है। जिसकी शाखा जखौरा में खुली है। यहां के तत्कालीन शाखा प्रबंधक प्रमोद कुमार मिश्रा ने उनसे एक बचत खाता खोलने के लिए बातचीत की। उन्होंने एक बड़ी धनराशि से खाता खुलवाने की बात कही। विश्वास में आकर उन्होंने शाखा प्रबंधक प्रमोद कुमार मिश्रा को छह लाख रुपये की एक चेक दे दी और खाता खोलकर रुपया जमा करने को कहा। आरोप लगाया कि प्रबंधक ने यह चेक अपने बेटे पंकज मिश्रा के एसबीआई बांदा से 30 मार्च 2005 को कैश करा ली। इसके बाद चार लाख रुपये उसके नए खाते में जमा किया और दो लाख रुपये हड़प गए। जब उसने पासबुक प्रिंट कराने की बात रखी तो बैंक प्रबंधक उसे आज-कल का बहाना करके टालते रहे और वह भी विश्वास होने के कारण कुछ नहीं कर पाया।
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बताया कि उसे आयकर विभाग बांदा की ओर से एकाउंट पेयी ओनली का चेक 9080 रुपये और दूसरा चेक 48290 रुपये का दिया था। इसे भी उसने प्रमोद मिश्रा को दे दिया था। इसमें 9080 वाली चेक तो प्रमोद ने खाते में लगा दी, लेकिन 48 हजार वाली चेक खाते में नहीं लगाई और यह रकम उन्होंने स्वयं हड़प ली। इस पूरी साजिश का खुलासा तब हुआ जब रामप्रकाश अपने खाते से रुपये निकालने बैंक पहुंचे तो बताया गया कि उनके खाते में 500 रुपये से अधिक नहीं है। यह सुनकर वह स्तब्ध रह गया। जांच के बाद उन्होंने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। करीब 19 साल 10 महीने और 25 दिन चले इस मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के प्रधान न्यायाधीश राघवेन्द्र और न्यायाधीश गीतांजलि भारती ने दोनों पक्षों को सुना और उनकी ओर से दिए गए साक्ष्यों का भी अवलोकन किया। सुनवाई के बाद प्रधान न्यायाधीश व न्यायाधीश ने विपक्षी शाखा प्रबंधक को सेवा में त्रुटि और व्यापारिक कदाचरण का दोषी पाया। उन्होंने विपक्षीगण को 45 दिन के अंदर 6,57,370 रुपये रामप्रकाश द्विवेदी को अदा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही 19 साल 10 महीने 25 दिन का सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार रुपये और वाद व्यय पर आए खर्च के लिए पांच हजार रुपये अलग से अदा करने के आदेश दिए हैं।
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