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Banda News: डीजल अनियमितता में दो स्टेशन प्रभारियों पर गिरी गाज, निलंबित
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-एक फोरमैन को भी शासन ने जारी किया आरोप पत्र, मची खलबली
-तीन लिपिक हुए थे निलंबित, अन्य के खिलाफ शासन को लिखा था पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। रोडवेज डिपो बांदा में एक माह पहले सामने आई 14 हजार डीजल की अनियमितता के मामले में शासन ने वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी और स्टेशन प्रभारी को निलंबित कर दिया। एक फोरमैन को आरोप पत्र जारी किया है। प्रकरण सामने आने के बाद यह दूसरी कार्रवाई है। इससे पहले स्थानीय स्तर से तीन डीजल लिपिकों को निलंबित किया जा चुका है।
जुलाई में रोडवेज डिपो में 14 हजार लीटर डीजल अनियमितता का मामला सामने आया था। डीजल लिपिक अनिल साहू ने क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज चित्रकूटधाम मंडल राम लवट से शिकायत कर डीजल घोटाले की बात कही थी। आरएम ने जांच कराई तो डीजल घोटाले के बजाय अनियमितता की बात सामने आई है। रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार 8 जुलाई को 14 हजार डीजल लेकर एक ट्रक बांदा डिपो आया था। यहां डिपो के टैंक में जगह न होने के कारण वह खाली नहीं हो सका, लेकिन कर्मचारियों ने उसे 8 जुलाई को ही खाली दिखा दिया। अधिकारियों का दावा है कि बाद में 9 जुलाई को टैंकर को खाली कराया गया, लेकिन वास्तव में टैंकर खाली हुआ या नहीं, इसके प्रमाण दे पाना मुश्किल है।
इसके बाद लापरवाही के लिए आरएम ने डीजल लिपिक अनिल साहू, अनिल शुक्ला और सुधीर को निलंबित कर दिया था। साथ ही लापरवाही के लिए वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी सुशीला सचान, स्टेशन प्रभारी आरके वर्मा, जूनियर फोरमैन सरोज कुमार और लेखाकार वीके गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखा था। शासन ने इसका संज्ञान लेते हुए बृहस्पतिवार को वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी सुशीला सचान और स्टेशन प्रभारी आरके वर्मा को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही फोरमैन सरोज कुमार को आरोप पत्र जारी किया है। ये सभी शिथिल पर्यवेक्षण के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए थे। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर डिपो में खलबली मच गई है। अभी इस मामले अन्य अधिकारी और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
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अभिलेख हैं अधूरे, कैसे होगी जांच
पूरे प्रकरण की जांच आरएम ने एआरएम वित्त एसके गुप्ता को सौंपी गई थी। लेकिन जांच कैसे संभव होगी जब डीजल संबंधी अभिलेख ही अपूर्ण है। प्राथमिक जांच में इसकी पुष्टि हुई है कि डीजल विभाग में नियमित अभिलेखों को अपडेट ही नहीं किया गया। ऐसे में यह जांच हो पाना बेहद मुश्किल है। यही कारण है कि जांच अधिकारी ने भी पूर्व में हाथ खड़े कर दिए थे। उन्होंने स्वयं यह जांच उनसे हटाकर किसी अन्य को देने की मांग की थी। लेकिन आरएम ने उन्हें ही जांच करने के आदेश दिए थे।
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वर्जन
डीजल अनियमितता के प्रकरण में शासन को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया था। इसी के तहत वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी व स्टेशन प्रभारी को निलंबित किया गया है। एक फोरमैन को भी आरोप पत्र जारी किया गया है। अभी जांच चल रही है, जो भी दोषी होगा बख्शा नहीं जाएगा। -राम लवट, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज चित्रकूटधाम मंडल।
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-तीन लिपिक हुए थे निलंबित, अन्य के खिलाफ शासन को लिखा था पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। रोडवेज डिपो बांदा में एक माह पहले सामने आई 14 हजार डीजल की अनियमितता के मामले में शासन ने वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी और स्टेशन प्रभारी को निलंबित कर दिया। एक फोरमैन को आरोप पत्र जारी किया है। प्रकरण सामने आने के बाद यह दूसरी कार्रवाई है। इससे पहले स्थानीय स्तर से तीन डीजल लिपिकों को निलंबित किया जा चुका है।
जुलाई में रोडवेज डिपो में 14 हजार लीटर डीजल अनियमितता का मामला सामने आया था। डीजल लिपिक अनिल साहू ने क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज चित्रकूटधाम मंडल राम लवट से शिकायत कर डीजल घोटाले की बात कही थी। आरएम ने जांच कराई तो डीजल घोटाले के बजाय अनियमितता की बात सामने आई है। रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार 8 जुलाई को 14 हजार डीजल लेकर एक ट्रक बांदा डिपो आया था। यहां डिपो के टैंक में जगह न होने के कारण वह खाली नहीं हो सका, लेकिन कर्मचारियों ने उसे 8 जुलाई को ही खाली दिखा दिया। अधिकारियों का दावा है कि बाद में 9 जुलाई को टैंकर को खाली कराया गया, लेकिन वास्तव में टैंकर खाली हुआ या नहीं, इसके प्रमाण दे पाना मुश्किल है।
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इसके बाद लापरवाही के लिए आरएम ने डीजल लिपिक अनिल साहू, अनिल शुक्ला और सुधीर को निलंबित कर दिया था। साथ ही लापरवाही के लिए वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी सुशीला सचान, स्टेशन प्रभारी आरके वर्मा, जूनियर फोरमैन सरोज कुमार और लेखाकार वीके गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखा था। शासन ने इसका संज्ञान लेते हुए बृहस्पतिवार को वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी सुशीला सचान और स्टेशन प्रभारी आरके वर्मा को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही फोरमैन सरोज कुमार को आरोप पत्र जारी किया है। ये सभी शिथिल पर्यवेक्षण के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए थे। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर डिपो में खलबली मच गई है। अभी इस मामले अन्य अधिकारी और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
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अभिलेख हैं अधूरे, कैसे होगी जांच
पूरे प्रकरण की जांच आरएम ने एआरएम वित्त एसके गुप्ता को सौंपी गई थी। लेकिन जांच कैसे संभव होगी जब डीजल संबंधी अभिलेख ही अपूर्ण है। प्राथमिक जांच में इसकी पुष्टि हुई है कि डीजल विभाग में नियमित अभिलेखों को अपडेट ही नहीं किया गया। ऐसे में यह जांच हो पाना बेहद मुश्किल है। यही कारण है कि जांच अधिकारी ने भी पूर्व में हाथ खड़े कर दिए थे। उन्होंने स्वयं यह जांच उनसे हटाकर किसी अन्य को देने की मांग की थी। लेकिन आरएम ने उन्हें ही जांच करने के आदेश दिए थे।
वर्जन
डीजल अनियमितता के प्रकरण में शासन को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया था। इसी के तहत वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी व स्टेशन प्रभारी को निलंबित किया गया है। एक फोरमैन को भी आरोप पत्र जारी किया गया है। अभी जांच चल रही है, जो भी दोषी होगा बख्शा नहीं जाएगा। -राम लवट, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज चित्रकूटधाम मंडल।