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Banda News: चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि बरकरार, सजा दो साल से घटाकर 10 माह की
Mon, 13 Jul 2026 01:39 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 13 Jul 2026 01:39 AM IST
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बांदा। चेक बाउंस के मामले में सत्र न्यायालय ने दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए आरोपी की सजा में आंशिक राहत दी है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही माना, लेकिन आरोपी की आर्थिक स्थिति और पहले से जेल में बिताई अवधि को देखते हुए दो वर्ष के कारावास को घटाकर 10 माह कर दिया।
मामले के अनुसार शहर कोतवाली क्षेत्र निवासी मोहम्मद यूसुफ ने आरोप लगाया था कि मोहल्ला खाईपार निवासी अफजल खान ने वर्ष 2019 में वेल्डिंग का काम शुरू करने के लिए उनसे 1.30 लाख रुपये उधार लिए थे। भुगतान के लिए दिया गया चेक बैंक में लगाने पर खाता बंद होने के कारण अनादृत हो गया। कानूनी नोटिस के बावजूद रकम वापस न मिलने पर परिवाद दायर किया गया। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने 18 जनवरी 2025 को अफजल खान को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के कारावास और 2.60 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की। सत्र न्यायाधीश अल्पना ने 7 जुलाई 2026 को दिए फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया था और दोषसिद्धि में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। हालांकि आरोपी करीब नौ माह से जेल में है, उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के आधार पर अदालत ने सजा घटाकर 10 माह का कारावास और अर्थदंड 2.60 लाख रुपये से घटाकर 1.30 लाख रुपये कर दिया। अर्थदंड की राशि जमा होने पर यह धनराशि परिवादी को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।
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मामले के अनुसार शहर कोतवाली क्षेत्र निवासी मोहम्मद यूसुफ ने आरोप लगाया था कि मोहल्ला खाईपार निवासी अफजल खान ने वर्ष 2019 में वेल्डिंग का काम शुरू करने के लिए उनसे 1.30 लाख रुपये उधार लिए थे। भुगतान के लिए दिया गया चेक बैंक में लगाने पर खाता बंद होने के कारण अनादृत हो गया। कानूनी नोटिस के बावजूद रकम वापस न मिलने पर परिवाद दायर किया गया। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने 18 जनवरी 2025 को अफजल खान को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के कारावास और 2.60 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की। सत्र न्यायाधीश अल्पना ने 7 जुलाई 2026 को दिए फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया था और दोषसिद्धि में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। हालांकि आरोपी करीब नौ माह से जेल में है, उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के आधार पर अदालत ने सजा घटाकर 10 माह का कारावास और अर्थदंड 2.60 लाख रुपये से घटाकर 1.30 लाख रुपये कर दिया। अर्थदंड की राशि जमा होने पर यह धनराशि परिवादी को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।
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