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Banda News: मानक से अधिक नमी, लौटा रहे किसानों का गेहूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 13 Apr 2026 12:48 AM IST
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फोटो - 10 तिंदवारी में विपणन केंद्र प्रभारी से जानकारी लेता किसान। संवाद
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बांदा। बुंदेलखंड क्षेत्र में बेमौसम हुई बारिश ने गेहूं की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है। क्रय केंद्रों पर बिकने के लिए लाए जा रहे गेहूं में मानक से अधिक नमी पाई जा रही है। जिसके चलते किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गेहूं की चमक भी फीकी पड़ गई है और केंद्र प्रभारी खरीद को लेकर दुविधा में हैं।
जिले में 30 मार्च से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद शुरू की गई थी। हालांकि, पहली अप्रैल से रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण गेहूं गीला हो गया है और उसके दाने की प्राकृतिक चमक भी खत्म हो गई है। बारिश से बचाव के लिए किसान जल्दबाजी में गेहूं की थ्रेसिंग कर उसे क्रय केंद्रों पर बेचने के लिए ला रहे हैं। मंडी समिति के विपणन केंद्र प्रभारी संदीप ने बताया कि वर्तमान में जो गेहूं बिकने आ रहा है, उसमें 20 से 25 फीसदी तक नमी है, जबकि गेहूं में 12 फीसदी तक नमी होने पर ही छूट का प्रावधान है।
अधिक नमी के कारण खरीद को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यदि गेहूं लौटाया जाता है तो अधिकारियों की फटकार सुननी पड़ती है। यदि खरीदा जाता है तो गेहूं के सूखने पर प्रति बोरी पांच से 10 किलो की रिकवरी केंद्र प्रभारियों को अपनी जेब से भरनी पड़ सकती है। यूपीएसएस के केंद्र प्रभारी शिव प्रसाद गुप्ता ने भी बारिश से गेहूं के भीग जाने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि कुछ किसानों को रुपयों की तत्काल आवश्यकता है, जैसे शादी-विवाह या बीमारी के कारण, इसलिए वे थ्रेसिंग के तुरंत बाद गेहूं बेचने आ रहे हैं। उन्होंने शासन से नमी के मानकों में ढील देने की अपील की है।
बोरे और बायोमेट्रिक मशीन का अभाव, खरीद प्रभावित
गेहूं खरीद से जुड़ी एक अन्य बड़ी समस्या बोरे की अनुपलब्धता है। जिले के अधिकांश क्रय केंद्रों पर किसानों को अपने बोरे खुद लाने पड़ रहे हैं। विभाग से गेहूं खरीद शुरू तो करा दी गई है, लेकिन बोरे उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इससे भी किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
पैलानी तहसील के खप्टिहा कलां गांव में स्थित गेहूं खरीद केंद्र पर तो स्थिति और भी गंभीर है। यहां न तो बायोमेट्रिक मशीन उपलब्ध है और न ही बोरे। ऐसे में किसान अपना गेहूं खरीद केंद्र के बाहर खुले आसमान के नीचे रखकर खरीद का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि खुले बाजार में गेहूं की कीमत कम मिल रही है, इसलिए वे सरकारी खरीद का इंतजार कर रहे हैं। केंद्र प्रभारी सुनील लाला ने भी बायोमेट्रिक मशीन और बोरियों के न मिलने की बात स्वीकार की है, जो खरीद प्रक्रिया को बाधित कर रहा है।
जिले में अब तक गेहूं खरीद का विवरण
एजेंसी लक्ष्य (एमटी) खरीद
खाद्य विभाग 14000 295
पीसीएफ 12850 352
यूपीएसएस 5650 146
नोट: नैफेड और भारतीय खाद्य निगम (भा.खा.नि.) की खरीद शून्य रही है।
घर में शादी है, नहीं बिक रहा गेहूं
मवई के किसान भरोसी का कहना है कि घर में भतीजी की रविवार की शादी है। पैसों की जरूरत है। एक तो आपदा ने सब बिगाड़ दिया। जो थोड़ा बहुत गेहूं बचा तो नमी अधिक बता कर लौटा रहे हैं।
किसानों को टरकाया जा रहा
जमालपुर के किसान सीताराम का कहना है दो दिन से मौसम खुला है। थ्रेसिंग का काम किया जा रहा है। पैसों की जरूरत है ऐसे में गेहूं लेकर केंद्र जाते है जो नमी अधिक बताकर लौटाया जा रहा है।
बाजार में भी नहीं खरीद रहे गेहूं
पिपगवां के किसान मैया दिन यादव का कहना है कि ओलावृष्टि और बारिश से गेहूं की चमक कम हो गई है। इक्का-दुक्का काला पड़ गया है। क्रय केंद्र में गेहूं ले नहीं रहे, बाजार में भी बिक रहा।
ओलों से भूरे रंग का हो गया है गेहूं
माटा के किसान बच्चा ने बताया कि बारिश से गेहूं की फसल भीग गई थी। गेहूं भूरे रंग का हो गया है। गेहूं में नमी भी अधिक है। क्रय केंद्र में बिक नहीं रहा। बाजार में भी बेचने में दिक्कत हो रही है।
वर्जन-
शासन के आदेश पर केंद्र प्रभारियों से गेहूं में नमी, चमक, टूटन की रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। उम्मीद है कि शासन स्तर पर नमी के मानकों में छूट को बढ़ाया जा सकता है।
रामानंद
जिला विपणन अधिकारी, बांदा
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जिले में 30 मार्च से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद शुरू की गई थी। हालांकि, पहली अप्रैल से रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण गेहूं गीला हो गया है और उसके दाने की प्राकृतिक चमक भी खत्म हो गई है। बारिश से बचाव के लिए किसान जल्दबाजी में गेहूं की थ्रेसिंग कर उसे क्रय केंद्रों पर बेचने के लिए ला रहे हैं। मंडी समिति के विपणन केंद्र प्रभारी संदीप ने बताया कि वर्तमान में जो गेहूं बिकने आ रहा है, उसमें 20 से 25 फीसदी तक नमी है, जबकि गेहूं में 12 फीसदी तक नमी होने पर ही छूट का प्रावधान है।
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अधिक नमी के कारण खरीद को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यदि गेहूं लौटाया जाता है तो अधिकारियों की फटकार सुननी पड़ती है। यदि खरीदा जाता है तो गेहूं के सूखने पर प्रति बोरी पांच से 10 किलो की रिकवरी केंद्र प्रभारियों को अपनी जेब से भरनी पड़ सकती है। यूपीएसएस के केंद्र प्रभारी शिव प्रसाद गुप्ता ने भी बारिश से गेहूं के भीग जाने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि कुछ किसानों को रुपयों की तत्काल आवश्यकता है, जैसे शादी-विवाह या बीमारी के कारण, इसलिए वे थ्रेसिंग के तुरंत बाद गेहूं बेचने आ रहे हैं। उन्होंने शासन से नमी के मानकों में ढील देने की अपील की है।
बोरे और बायोमेट्रिक मशीन का अभाव, खरीद प्रभावित
गेहूं खरीद से जुड़ी एक अन्य बड़ी समस्या बोरे की अनुपलब्धता है। जिले के अधिकांश क्रय केंद्रों पर किसानों को अपने बोरे खुद लाने पड़ रहे हैं। विभाग से गेहूं खरीद शुरू तो करा दी गई है, लेकिन बोरे उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इससे भी किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
पैलानी तहसील के खप्टिहा कलां गांव में स्थित गेहूं खरीद केंद्र पर तो स्थिति और भी गंभीर है। यहां न तो बायोमेट्रिक मशीन उपलब्ध है और न ही बोरे। ऐसे में किसान अपना गेहूं खरीद केंद्र के बाहर खुले आसमान के नीचे रखकर खरीद का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि खुले बाजार में गेहूं की कीमत कम मिल रही है, इसलिए वे सरकारी खरीद का इंतजार कर रहे हैं। केंद्र प्रभारी सुनील लाला ने भी बायोमेट्रिक मशीन और बोरियों के न मिलने की बात स्वीकार की है, जो खरीद प्रक्रिया को बाधित कर रहा है।
जिले में अब तक गेहूं खरीद का विवरण
एजेंसी लक्ष्य (एमटी) खरीद
खाद्य विभाग 14000 295
पीसीएफ 12850 352
यूपीएसएस 5650 146
नोट: नैफेड और भारतीय खाद्य निगम (भा.खा.नि.) की खरीद शून्य रही है।
घर में शादी है, नहीं बिक रहा गेहूं
मवई के किसान भरोसी का कहना है कि घर में भतीजी की रविवार की शादी है। पैसों की जरूरत है। एक तो आपदा ने सब बिगाड़ दिया। जो थोड़ा बहुत गेहूं बचा तो नमी अधिक बता कर लौटा रहे हैं।
किसानों को टरकाया जा रहा
जमालपुर के किसान सीताराम का कहना है दो दिन से मौसम खुला है। थ्रेसिंग का काम किया जा रहा है। पैसों की जरूरत है ऐसे में गेहूं लेकर केंद्र जाते है जो नमी अधिक बताकर लौटाया जा रहा है।
बाजार में भी नहीं खरीद रहे गेहूं
पिपगवां के किसान मैया दिन यादव का कहना है कि ओलावृष्टि और बारिश से गेहूं की चमक कम हो गई है। इक्का-दुक्का काला पड़ गया है। क्रय केंद्र में गेहूं ले नहीं रहे, बाजार में भी बिक रहा।
ओलों से भूरे रंग का हो गया है गेहूं
माटा के किसान बच्चा ने बताया कि बारिश से गेहूं की फसल भीग गई थी। गेहूं भूरे रंग का हो गया है। गेहूं में नमी भी अधिक है। क्रय केंद्र में बिक नहीं रहा। बाजार में भी बेचने में दिक्कत हो रही है।
वर्जन-
शासन के आदेश पर केंद्र प्रभारियों से गेहूं में नमी, चमक, टूटन की रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। उम्मीद है कि शासन स्तर पर नमी के मानकों में छूट को बढ़ाया जा सकता है।
रामानंद
जिला विपणन अधिकारी, बांदा

फोटो - 10 तिंदवारी में विपणन केंद्र प्रभारी से जानकारी लेता किसान। संवाद