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Banda News: पंडित जेएन कॉलेज प्राचार्य का वेतन रोका
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 13 Apr 2026 12:36 AM IST
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बांदा। पंडित जवाहर लाल नेहरू डिग्री कॉलेज के प्राचार्य का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन न करने पर की गई है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।
शिकायतकर्ता ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी झांसी-चित्रकूट धाम मंडल से शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि प्राचार्य उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। उच्च न्यायालय ने कॉलेज प्रबंधन में पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्षों से इन निर्देशों को लागू नहीं किया गया था। इससे कॉलेज में प्रशासनिक अनियमितताएं बनी हुई थीं। प्रो. सुशील बाबू ने मामले में प्राचार्य का वेतन रोकने का आदेश दिया। उन्होंने शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए एकल संचालन व्यवस्था लागू करने को कहा। अब वेतन भुगतान प्राचार्य के माध्यम से नियमानुसार प्रस्तुत किया जाएगा।
कार्रवाई का आधार
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के प्रावधानों के तहत की गई है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिनियम 1977 के नियम भी इसमें शामिल हैं। 28 फरवरी 2026 को की गई शिकायत में उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लेख था। आदेश में कहा गया है कि न्यायालय के निर्देशों के विधि सम्मत निस्तारण के बाद ही प्राचार्य का वेतन पारित होगा। प्राचार्य डॉ. केएस कुशवाहा ने आदेश की जानकारी न होने की बात कही है।
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शिकायतकर्ता ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी झांसी-चित्रकूट धाम मंडल से शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि प्राचार्य उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। उच्च न्यायालय ने कॉलेज प्रबंधन में पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्षों से इन निर्देशों को लागू नहीं किया गया था। इससे कॉलेज में प्रशासनिक अनियमितताएं बनी हुई थीं। प्रो. सुशील बाबू ने मामले में प्राचार्य का वेतन रोकने का आदेश दिया। उन्होंने शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए एकल संचालन व्यवस्था लागू करने को कहा। अब वेतन भुगतान प्राचार्य के माध्यम से नियमानुसार प्रस्तुत किया जाएगा।
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कार्रवाई का आधार
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के प्रावधानों के तहत की गई है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिनियम 1977 के नियम भी इसमें शामिल हैं। 28 फरवरी 2026 को की गई शिकायत में उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लेख था। आदेश में कहा गया है कि न्यायालय के निर्देशों के विधि सम्मत निस्तारण के बाद ही प्राचार्य का वेतन पारित होगा। प्राचार्य डॉ. केएस कुशवाहा ने आदेश की जानकारी न होने की बात कही है।