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Banda News: मानसून पर ब्रेक, बुंदेलखंड में खेती पर संकट गहराया

Thu, 16 Jul 2026 11:27 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Thu, 16 Jul 2026 11:27 PM IST
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Monsoon stalls; agricultural crisis deepens in Bundelkhand.
फोटो-19-बृहस्पतिवार को बांदा में आसमान में बादल छाए रहे, लेकिन बारिश नहीं हुई। ब्यूरो
बांदा। जुलाई के शुरुआती दिनों में सक्रिय रहा मानसून अब थम-सा गया है। इसका सबसे अधिक असर बुंदेलखंड पर पड़ रहा है। लगातार कई दिनों से बारिश न होने से खेतों में नमी खत्म होने लगी है। खरीफ की सबसे महत्वपूर्ण फसलें तिल और धान संकट में आ गई हैं। धान की रोपाई की रफ्तार थम गई है, जबकि तिल की बोआई भी प्रभावित हो रही है। खेतों में पानी नहीं पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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बुंदेलखंड में सिंचाई का बड़ा आधार बारिश ही है। अधिकांश किसान वर्षा आधारित खेती करते हैं। ऐसे में मानसून की रफ्तार थमते ही खेती पर संकट गहराने लगा है। जिले के कई इलाकों में खेत तैयार होने के बावजूद किसान रोपाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं। जिन किसानों ने शुरुआती बारिश के भरोसे बोआई कर दी थी, उनकी फसल भी अब नमी की कमी से प्रभावित होने लगी है।
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बांदा में इस वर्ष 15 जुलाई तक केवल 134 मिमी बारिश दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में 313.3 मिमी बारिश हुई थी। यानी इस बार अब तक 179.3 मिमी कम वर्षा हुई है। इस बार शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश के बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई। मौसम में आए इस ठहराव ने खेतों की नमी तेजी से कम कर दी है और किसानों की निगाहें अब अगली अच्छी बारिश पर टिकी हैं।
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हालांकि वर्ष 2024, 2023, 2022 और 2021 की तुलना में इस बार बारिश अधिक है, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले भारी कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

कृषि एवं मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिनेश शाहा का कहना है कि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की रोपाई का समय प्रभावित होगा। वहीं तिल की बोआई में देरी होने से पैदावार पर भी असर पड़ सकता है। लगातार सूखे जैसे हालात बने रहने पर किसानों को नलकूप और डीजल पंप के सहारे सिंचाई करनी पड़ेगी, जिससे खेती की लागत बढ़ जाएगी।

किसानों का कहना है कि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ की फसल पर बड़ा असर पड़ेगा। फिलहाल पूरे बुंदेलखंड में किसान मानसून के दोबारा सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं।

बारिश का रिकॉर्ड (15 जुलाई तक)

वर्ष वर्षा (मिलीमीटर)

2025 313.3

2026 134.0

2024 74.3

2023 58.5

2022 0.0

2021 24.9

सबसे ज्यादा असर धान और तिल पर

बुंदेलखंड में खरीफ की प्रमुख फसलों में धान और तिल शामिल हैं। धान की रोपाई के लिए खेतों में पर्याप्त पानी जरूरी होता है, जबकि तिल की बोआई के बाद शुरुआती नमी फसल के अंकुरण के लिए अहम होती है। मानसून की बेरुखी लंबी खिंची तो दोनों फसलों के रकबे और उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।


पूरे बुंदेलखंड में बारिश की बेरुखी, कई जिलों में हाल और खराब

मानसून की सुस्ती केवल बांदा तक सीमित नहीं है। पूरे बुंदेलखंड में सामान्य से कम बारिश होने से खरीफ की खेती संकट में है। 15 जुलाई तक जालौन में मात्र 42 मिमी, चित्रकूट में 60 मिमी और हमीरपुर में सिर्फ 38 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि पूरे क्षेत्र में मानसून अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सका है। बुंदेलखंड के अधिकांश जिलों में खरीफ फसलों की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
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