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Banda News: अब बांदा में होगी निलंबित आईपीएस पाटीदार व अंसारी के प्राथमिकी दर्ज की सुनवाई
Sun, 03 May 2026 01:49 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sun, 03 May 2026 01:49 AM IST
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फोटो - 10 मणिलाल पाटीदार।
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बांदा। महोबा के बर्खास्त आईपीएस मणिलाल पाटीदार और सपा विधायक अब्बास अंसारी व उनकी पत्नी निखत बानो से जुड़े बहुचर्चित प्राथमिकी दर्ज की सुनवाई अब बांदा की नवगठित एंटी करप्शन कोर्ट में होगी। हाल ही में इस मंडल स्तरीय भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट की स्थापना के बाद लखनऊ की एंटी करप्शन कोर्ट में चल रहे मंडल के 174 प्राथमिकी दर्ज बांदा स्थानांतरित कर दिए गए हैं। इनमें बर्खास्तआईपीएस पाटीदार और सपा विधायक अब्बास अंसारी के मामले भी शामिल हैं।
यह स्थानांतरण उन सभी भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों के लिए महत्वपूर्ण है जो पहले लखनऊ की विशेष अदालतों में सुनवाई के लिए भेजे जाते थे। बांदा में इस विशेष अदालत के खुलने से अब जनपद के साथ-साथ महोबा, हमीरपुर और चित्रकूट जनपदों में दर्ज होने वाली भ्रष्टाचार की प्राथमिकी का ट्रायल भी यहीं संपन्न होगा। इससे न्याय प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
बर्खास्त आईपीएस मणिलाल पाटीदार पर महोबा में 2020 में एक क्रशर व्यापारी इंद्रकांत की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में हत्या और भ्रष्टाचार का आरोप है। व्यापारी के भाई द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार, तत्कालीन कबरई इंस्पेक्टर और अन्य पुलिस कर्मियों पर पैसों की मांग और हत्या का आरोप लगाया गया था। बाद में 22 जुलाई को एसपी सहित दो के खिलाफ एक और भ्रष्टाचार की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
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इन मामलों की सुनवाई पूर्व में लखनऊ की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में चल रही थी। इसके अलावा फरवरी 2023 में, सपा विधायक अब्बास अंसारी की पत्नी निखत बानो और चालक नियाज सहित जेल के कुछ अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। यह मामला जेल अधिकारियों की मिलीभगत से निखत बानो के अनाधिकृत रूप से जेल में रहने से जुड़ा था, जब वह छापे के दौरान पकड़ी गई थीं। यह मामला भी लखनऊ की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में विचाराधीन था।
नई अदालत और अगली सुनवाई की तारीखें अब यह दोनों चर्चित मामले बांदा में स्थापित मंडल स्तरीय भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में भेजे गए हैं। एडीजे न्यायिक चंद्रपाल द्वितीय विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण के मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार पाटीदार मामले में अगली सुनवाई 11 मई को नियत की गई है, वहीं, अब्बास अंसारी अभी तक अदालत में पेश नहीं हुए हैं, हालांकि उन्हें समन जारी किए गए हैं।
एपीओ मौर्या ने बताया कि इस स्थानांतरण से स्थानीय न्याय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और संबंधित पक्षों को अपने मामले की सुनवाई के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। यह मंडल स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- महोबा के पूर्व एसपी पाटीदार पर आरोप
बांदा। पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार पर क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी से प्रतिमाह 6 लाख रुपये रिश्वत मांगने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप हैं। इंद्रकांत त्रिपाठी ने 7 सितंबर 2020 को रिश्वत मांगने का वीडियो वायरल किया था, जिसके बाद 8 सितंबर 2020 को उन्हें गोली लगी और 13 सितंबर 2020 को उनकी मौत हो गई।
इंद्रकांत के भाई की शिकायत पर पाटीदार व अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिसके बाद 22 जुलाई 2021 को भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया। विशेष अदालत द्वारा जारी संज्ञान और समन आदेश को पाटीदार ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने खुद को झूठे प्राथमिकी दर्ज में फंसाने का आरोप लगाया।
इस बीच व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी हत्याकांड में आरोपी मणिलाल पाटीदार को उच्चतम न्यायालय से सशर्त जमानत मिल चुकी है। उच्चतम न्यायालय ने उन्हें पासपोर्ट जमा कराने और अपराध वाले जिले महोबा में प्रवेश न करने की शर्त लगाई है। पाटीदार लगभग दो साल तक फरार रहे और 2022 में आत्मसमर्पण करने के बाद 2 सितंबर 2022 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
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यह स्थानांतरण उन सभी भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों के लिए महत्वपूर्ण है जो पहले लखनऊ की विशेष अदालतों में सुनवाई के लिए भेजे जाते थे। बांदा में इस विशेष अदालत के खुलने से अब जनपद के साथ-साथ महोबा, हमीरपुर और चित्रकूट जनपदों में दर्ज होने वाली भ्रष्टाचार की प्राथमिकी का ट्रायल भी यहीं संपन्न होगा। इससे न्याय प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
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बर्खास्त आईपीएस मणिलाल पाटीदार पर महोबा में 2020 में एक क्रशर व्यापारी इंद्रकांत की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में हत्या और भ्रष्टाचार का आरोप है। व्यापारी के भाई द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार, तत्कालीन कबरई इंस्पेक्टर और अन्य पुलिस कर्मियों पर पैसों की मांग और हत्या का आरोप लगाया गया था। बाद में 22 जुलाई को एसपी सहित दो के खिलाफ एक और भ्रष्टाचार की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
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इन मामलों की सुनवाई पूर्व में लखनऊ की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में चल रही थी। इसके अलावा फरवरी 2023 में, सपा विधायक अब्बास अंसारी की पत्नी निखत बानो और चालक नियाज सहित जेल के कुछ अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। यह मामला जेल अधिकारियों की मिलीभगत से निखत बानो के अनाधिकृत रूप से जेल में रहने से जुड़ा था, जब वह छापे के दौरान पकड़ी गई थीं। यह मामला भी लखनऊ की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में विचाराधीन था।
नई अदालत और अगली सुनवाई की तारीखें अब यह दोनों चर्चित मामले बांदा में स्थापित मंडल स्तरीय भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में भेजे गए हैं। एडीजे न्यायिक चंद्रपाल द्वितीय विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण के मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार पाटीदार मामले में अगली सुनवाई 11 मई को नियत की गई है, वहीं, अब्बास अंसारी अभी तक अदालत में पेश नहीं हुए हैं, हालांकि उन्हें समन जारी किए गए हैं।
एपीओ मौर्या ने बताया कि इस स्थानांतरण से स्थानीय न्याय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और संबंधित पक्षों को अपने मामले की सुनवाई के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। यह मंडल स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बांदा। पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार पर क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी से प्रतिमाह 6 लाख रुपये रिश्वत मांगने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप हैं। इंद्रकांत त्रिपाठी ने 7 सितंबर 2020 को रिश्वत मांगने का वीडियो वायरल किया था, जिसके बाद 8 सितंबर 2020 को उन्हें गोली लगी और 13 सितंबर 2020 को उनकी मौत हो गई।
इंद्रकांत के भाई की शिकायत पर पाटीदार व अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिसके बाद 22 जुलाई 2021 को भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया। विशेष अदालत द्वारा जारी संज्ञान और समन आदेश को पाटीदार ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने खुद को झूठे प्राथमिकी दर्ज में फंसाने का आरोप लगाया।
इस बीच व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी हत्याकांड में आरोपी मणिलाल पाटीदार को उच्चतम न्यायालय से सशर्त जमानत मिल चुकी है। उच्चतम न्यायालय ने उन्हें पासपोर्ट जमा कराने और अपराध वाले जिले महोबा में प्रवेश न करने की शर्त लगाई है। पाटीदार लगभग दो साल तक फरार रहे और 2022 में आत्मसमर्पण करने के बाद 2 सितंबर 2022 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

फोटो - 10 मणिलाल पाटीदार।