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Banda News: ऑक्सीजन प्लांट की थम गईं सांसे, सिलिंडर के भरोसे मरीजों का इलाज
Tue, 14 Jul 2026 11:35 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 14 Jul 2026 11:35 PM IST
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जिला अस्पताल में थमी ऑक्सीजन प्लांट की सांस, सिलिंडर के भरोसे मरीजों का इलाज
- फोटो : निजी अस्पताल में घायल दिनेश चंद का होता उपचार। स्त्रोत: स्वयं
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बांदा। जिला अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट लंबे समय से बंद है। ऐसे में अस्पताल की ऑक्सीजन आपूर्ति पूरी तरह सिलिंडर के सहारे चल रही है। करोड़ों रुपये की लागत से कोविड काल में स्थापित प्लांट के बंद होने से मरीजों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। यदि किसी दिन सिलिंडरों की आपूर्ति बाधित हुई तो अस्पताल में गंभीर मरीजों के इलाज पर संकट खड़ा हो सकता है।
प्लांट बंद होने के कारण अस्पताल प्रशासन बाहरी एजेंसियों से सिलिंडर मंगाकर व्यवस्था चला रहा है। इससे न केवल खर्च बढ़ रहा है बल्कि आपूर्ति बाधित होने का भी खतरा बना रहता है। जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में औसतन हर दिन तीन सिलिंडर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी खराबी के कारण प्लांट बंद है और इसे चालू कराने की प्रक्रिया चल रही है। सीएमएस डॉ. किशुन कुमार का कहना है कि प्लांट ठीक कराने को लेकर शासन को पत्राचार किया है।
बरसात के मौसम में बढ़ेंगे सांस के रोगी
विशेषज्ञों का मानना है कि जिला अस्पताल जैसे प्रमुख चिकित्सा केंद्र में ऑक्सीजन प्लांट का बंद रहना गंभीर लापरवाही है। बरसात के मौसम में श्वास संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ने के बीच प्लांट जल्द चालू न होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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प्लांट बंद होने के कारण अस्पताल प्रशासन बाहरी एजेंसियों से सिलिंडर मंगाकर व्यवस्था चला रहा है। इससे न केवल खर्च बढ़ रहा है बल्कि आपूर्ति बाधित होने का भी खतरा बना रहता है। जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में औसतन हर दिन तीन सिलिंडर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी खराबी के कारण प्लांट बंद है और इसे चालू कराने की प्रक्रिया चल रही है। सीएमएस डॉ. किशुन कुमार का कहना है कि प्लांट ठीक कराने को लेकर शासन को पत्राचार किया है।
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बरसात के मौसम में बढ़ेंगे सांस के रोगी
विशेषज्ञों का मानना है कि जिला अस्पताल जैसे प्रमुख चिकित्सा केंद्र में ऑक्सीजन प्लांट का बंद रहना गंभीर लापरवाही है। बरसात के मौसम में श्वास संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ने के बीच प्लांट जल्द चालू न होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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