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Banda News: जिला पंचायत के आश्वासन के बाद छह साल पुराना मुकदमा खत्म
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- किराया जमा कराने की बात मानने पर वादी ने बिना शर्त वापस लिया वाद
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। वर्ष 2020 से जिला पंचायत और अशफाक अहमद के बीच चल रहा दीवानी विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। जिला पंचायत की ओर से किराया जमा कराने का आश्वासन मिलने के बाद वादी ने अदालत में अपना मुकदमा बिना किसी शर्त के वापस लेने की अर्जी दी। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अंशुमाली पांडेय की अदालत ने अर्जी स्वीकार करते हुए वाद वापसी की अनुमति दे दी।
वर्ष 2020 से अशफाक अहमद और जिला पंचायत के बीच स्थायी व्यादेश को लेकर न्यायालय में वाद विचाराधीन था। 15 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान वादी अशफाक अहमद ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आदेश-23, नियम-1 सीपीसी के तहत वाद वापस लेने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। प्रार्थना पत्र में कहा गया कि प्रतिवादी जिला पंचायत ने किराया जमा कराने का भरोसा दिया है। इस आश्वासन से संतुष्ट होकर वादी बिना किसी शर्त के स्वेच्छा से अपना मुकदमा वापस लेना चाहता है।
पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने कहा कि कानून का स्थापित सिद्धांत है कि वादी अपने वाद का स्वामी होता है और वह किसी भी स्तर पर उसे वापस ले सकता है। इसके आधार पर अदालत ने वाद वापसी की अनुमति प्रदान कर दी। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वादी भविष्य में इस आधार पर दोबारा नया मुकदमा दायर नहीं कर सकेगा। अदालत के आदेश के साथ करीब छह वर्षों से लंबित यह दीवानी वाद समाप्त हो गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। वर्ष 2020 से जिला पंचायत और अशफाक अहमद के बीच चल रहा दीवानी विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। जिला पंचायत की ओर से किराया जमा कराने का आश्वासन मिलने के बाद वादी ने अदालत में अपना मुकदमा बिना किसी शर्त के वापस लेने की अर्जी दी। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अंशुमाली पांडेय की अदालत ने अर्जी स्वीकार करते हुए वाद वापसी की अनुमति दे दी।
वर्ष 2020 से अशफाक अहमद और जिला पंचायत के बीच स्थायी व्यादेश को लेकर न्यायालय में वाद विचाराधीन था। 15 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान वादी अशफाक अहमद ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आदेश-23, नियम-1 सीपीसी के तहत वाद वापस लेने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। प्रार्थना पत्र में कहा गया कि प्रतिवादी जिला पंचायत ने किराया जमा कराने का भरोसा दिया है। इस आश्वासन से संतुष्ट होकर वादी बिना किसी शर्त के स्वेच्छा से अपना मुकदमा वापस लेना चाहता है।
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पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने कहा कि कानून का स्थापित सिद्धांत है कि वादी अपने वाद का स्वामी होता है और वह किसी भी स्तर पर उसे वापस ले सकता है। इसके आधार पर अदालत ने वाद वापसी की अनुमति प्रदान कर दी। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वादी भविष्य में इस आधार पर दोबारा नया मुकदमा दायर नहीं कर सकेगा। अदालत के आदेश के साथ करीब छह वर्षों से लंबित यह दीवानी वाद समाप्त हो गया।
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