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Banda News: मंडी में हड़ताल से एक हजार से अधिक पल्लेदारों पर रोजी-रोटी का संकट
Thu, 16 Jul 2026 11:23 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Thu, 16 Jul 2026 11:23 PM IST
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फोटो-10-रामदास कुशवाहा। संवाद
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बांदा। पिछले छह दिन से मंडी समिति में गल्ला कारोबारियों की हड़ताल का असर यहां काम करने वाले एक हजार से अधिक पल्लेदारों पर भी पड़ने लगा है। व्यापारियों, कारोबार और सरकारी राजस्व के नुकसान के बाद पल्लेदार भी इस आंदोलन से परेशानी में आ गए हैं। रोजाना 600-700 रुपये कमाने वाले पल्लेदार इस समय केवल मंडी में बैठे रहते हैं और हड़ताल खत्म होने का इंतजार करते हैं। अधिकांश पल्लेदारों ने तो मंडी छोड़कर बाहर हाथ-पैर मारना भी शुरू कर दिया है। जिससे उनका परिवार पल सके।
मंडी समिति में पल्लेदारी का काम करने वाले झील का पुरवा निवासी दउवा, निमनी पार निवासी पप्पू ने बताया कि यहां पर 350 से अधिक आढ़तें हैं। हर आढ़त में तीन-चार पल्लेदार रहते हैं। ऐसे में यहां पर एक हजार से अधिक पल्लेदार काम करते हैं। रोजाना का 600-700 रुपये पल्लेदार मेहनत करके कमा लेते हैं।
हड़ताल के चलते आढ़तें बंद हैं। जिससे अब परेशानी होने लगी है। छह दिन से इंतजार कर रहे हैं कि शायद प्रशासन व कारोबारियों के बीच बातचीत हो और काम शुरू हो जाए। काम बंद होने से उनका परिवार पर प्रभाव पड़ने लगा है। रोजाना के खर्चे पूरे नहीं हो रहे हैं। घर में बच्चे हैं, पढ़ाई व छोटे-छोटे खर्चे भी नहीं निकल पा रहे हैं। प्रशासन जल्द-से-जल्द बातचीत कर इसका हल निकाले तो उनका संकट दूर हो।
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इंसेट
मटौंध से आकर बांदा में किराए पर रहकर पल्लेदारी करते हैं। अभी तक 600-700 रुपये रोजाना कमा लेता था लेकिन हड़ताल के कारण छह दिन से काम बंद है। बाहर इतनी आसानी से नियमित काम नहीं मिल सकता है। प्रशासन से मांग है कि जल्द-से-जल्द हड़ताल समाप्त करा दें।
मोनू गुप्ता, मटौंध
--
घर में पत्नी व तीन बच्चे हैं जो बच्चे पढ़ने जाते हैं। काम बंद होने से रोजाना के खर्चे नहीं निकल पा रहे हैं। सब्जी तक के लिए इधर-उधर से रुपया मांगकर काम चलाया जा रहा है। जल्द ही काम नहीं मिला तो परिवार पालना मुश्किल होगा। यहां 12 महीने मजदूरी का काम होता है तो परिवार का पालन-पोषण हो जाता है।
दिनेश, कालू कुआं
--
परिवार में कुल आठ लोग हैं। इसमें चार बेटी व दो बेटे हैं। सभी बच्चे पढ़ने जाते हैं। छह दिन से बच्चों के खर्चे पूरे नहीं हो रहे हैं। घर में कमाने वाला केवल मैं ही हूं। काम बंद होने से बच्चों का पालन-पोषण नहीं हो पा रहा है। दिक्कत तो बढ़ ही रही है।
रामदास कुशवाहा, फूटा कुआं बबेरू रोड
पांच लोगों का परिवार है। कमाने वाला एक है। काम बंद होने से रोजी-रोटी पर संकट बना हुआ है। अगर यह धरना-प्रदर्शन चलता रहा तो पल्लेदारों को अब दूसरा काम खोजना पड़ेगा। बाहर इतनी आसानी से काम नहीं मिलता है।
भाईराम, चौधरी का पुरवा
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मंडी समिति में पल्लेदारी का काम करने वाले झील का पुरवा निवासी दउवा, निमनी पार निवासी पप्पू ने बताया कि यहां पर 350 से अधिक आढ़तें हैं। हर आढ़त में तीन-चार पल्लेदार रहते हैं। ऐसे में यहां पर एक हजार से अधिक पल्लेदार काम करते हैं। रोजाना का 600-700 रुपये पल्लेदार मेहनत करके कमा लेते हैं।
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हड़ताल के चलते आढ़तें बंद हैं। जिससे अब परेशानी होने लगी है। छह दिन से इंतजार कर रहे हैं कि शायद प्रशासन व कारोबारियों के बीच बातचीत हो और काम शुरू हो जाए। काम बंद होने से उनका परिवार पर प्रभाव पड़ने लगा है। रोजाना के खर्चे पूरे नहीं हो रहे हैं। घर में बच्चे हैं, पढ़ाई व छोटे-छोटे खर्चे भी नहीं निकल पा रहे हैं। प्रशासन जल्द-से-जल्द बातचीत कर इसका हल निकाले तो उनका संकट दूर हो।
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इंसेट
मटौंध से आकर बांदा में किराए पर रहकर पल्लेदारी करते हैं। अभी तक 600-700 रुपये रोजाना कमा लेता था लेकिन हड़ताल के कारण छह दिन से काम बंद है। बाहर इतनी आसानी से नियमित काम नहीं मिल सकता है। प्रशासन से मांग है कि जल्द-से-जल्द हड़ताल समाप्त करा दें।
मोनू गुप्ता, मटौंध
घर में पत्नी व तीन बच्चे हैं जो बच्चे पढ़ने जाते हैं। काम बंद होने से रोजाना के खर्चे नहीं निकल पा रहे हैं। सब्जी तक के लिए इधर-उधर से रुपया मांगकर काम चलाया जा रहा है। जल्द ही काम नहीं मिला तो परिवार पालना मुश्किल होगा। यहां 12 महीने मजदूरी का काम होता है तो परिवार का पालन-पोषण हो जाता है।
दिनेश, कालू कुआं
परिवार में कुल आठ लोग हैं। इसमें चार बेटी व दो बेटे हैं। सभी बच्चे पढ़ने जाते हैं। छह दिन से बच्चों के खर्चे पूरे नहीं हो रहे हैं। घर में कमाने वाला केवल मैं ही हूं। काम बंद होने से बच्चों का पालन-पोषण नहीं हो पा रहा है। दिक्कत तो बढ़ ही रही है।
रामदास कुशवाहा, फूटा कुआं बबेरू रोड
पांच लोगों का परिवार है। कमाने वाला एक है। काम बंद होने से रोजी-रोटी पर संकट बना हुआ है। अगर यह धरना-प्रदर्शन चलता रहा तो पल्लेदारों को अब दूसरा काम खोजना पड़ेगा। बाहर इतनी आसानी से काम नहीं मिलता है।
भाईराम, चौधरी का पुरवा

फोटो-10-रामदास कुशवाहा। संवाद

फोटो-10-रामदास कुशवाहा। संवाद

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