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Banda News: पत्नी के फर्जी हस्ताक्षर करने का मामला अब पहुंचा एमपी-एमएलए कोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 09 Jan 2026 10:57 PM IST
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बांदा। सदर क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रकाश द्विवेदी और उनकी पत्नी व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता द्विवेदी के खिलाफ पत्नी के फर्जी हस्ताक्षर का मामला अब एमपी-एमएलए कोर्ट पहुंच गया है। सीजेएम कोर्ट द्वारा साक्ष्य के अभाव में खारिज किए गए इस मामले को जिला न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। मामले की पहली सुनवाई पांच फरवरी को निर्धारित की गई है।
जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल ने अदालत में प्रार्थना पत्र दायर कर वर्ष 2018 से 2020 के दौरान जिला पंचायत में 120 करोड़ रुपये के गबन और कृषि महाविद्यालय में 11 नियुक्तियां करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि विधायक प्रकाश द्विवेदी ने तत्कालीन अध्यक्ष सरिता द्विवेदी के फर्जी हस्ताक्षर का प्रयोग कर भारी आर्थिक क्षति पहुंचाई।
हालांकि, सीजेएम कोर्ट में इन आरोपों के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण मामला खारिज कर दिया गया था। जिला न्यायालय में अपील करने पर मामले को एमपी-एमएलए कोर्ट भेज दिया गया है। अध्यक्ष पटेल का कहना है कि उन्होंने दो फोरेंसिक विशेषज्ञों से जांच कराई है, जिसमें पाया गया कि उपस्थित पंजिका में किए गए हस्ताक्षर और निर्माण संबंधी पत्रावलियों, बिल भुगतान व नियुक्ति संबंधी पत्रावलियों में किए गए हस्ताक्षर भिन्न थे।
इस मामले में सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि जब एक अदालत ने सबूतों के अभाव में मामले को खारिज कर दिया था, तो यह देखना बाकी है कि यह अन्य अदालतों में कितना टिक पाएगा। विधायक द्विवेदी ने यह भी कहा कि वे हर जांच के लिए तैयार हैं और उनका मानना है कि यह मामला पूरी तरह से फर्जी है।
सीजेएम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल ने छह जनवरी को जिला न्यायालय का रुख किया था। जिला न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए इसे एमपी-एमएलए कोर्ट को भेज दिया है, जहाँ पांच फरवरी को पहली सुनवाई होगी।
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जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल ने अदालत में प्रार्थना पत्र दायर कर वर्ष 2018 से 2020 के दौरान जिला पंचायत में 120 करोड़ रुपये के गबन और कृषि महाविद्यालय में 11 नियुक्तियां करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि विधायक प्रकाश द्विवेदी ने तत्कालीन अध्यक्ष सरिता द्विवेदी के फर्जी हस्ताक्षर का प्रयोग कर भारी आर्थिक क्षति पहुंचाई।
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हालांकि, सीजेएम कोर्ट में इन आरोपों के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण मामला खारिज कर दिया गया था। जिला न्यायालय में अपील करने पर मामले को एमपी-एमएलए कोर्ट भेज दिया गया है। अध्यक्ष पटेल का कहना है कि उन्होंने दो फोरेंसिक विशेषज्ञों से जांच कराई है, जिसमें पाया गया कि उपस्थित पंजिका में किए गए हस्ताक्षर और निर्माण संबंधी पत्रावलियों, बिल भुगतान व नियुक्ति संबंधी पत्रावलियों में किए गए हस्ताक्षर भिन्न थे।
इस मामले में सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि जब एक अदालत ने सबूतों के अभाव में मामले को खारिज कर दिया था, तो यह देखना बाकी है कि यह अन्य अदालतों में कितना टिक पाएगा। विधायक द्विवेदी ने यह भी कहा कि वे हर जांच के लिए तैयार हैं और उनका मानना है कि यह मामला पूरी तरह से फर्जी है।
सीजेएम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल ने छह जनवरी को जिला न्यायालय का रुख किया था। जिला न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए इसे एमपी-एमएलए कोर्ट को भेज दिया है, जहाँ पांच फरवरी को पहली सुनवाई होगी।