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Banda News: रीढ़ व सिर की हड्डी टूटने से हुई थी बाघ की मौत, विसरा सुरक्षित
Thu, 07 May 2026 12:40 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Thu, 07 May 2026 12:40 AM IST
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करतल (बांदा)। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाध की मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रीढ़ व सिर की हट्टी टूटने से होना सामने आया है। फील्ड डायरेक्ट ने दो बाघों के संघर्ष में बाघ की मौत होने का अनुमान लगाया है। फिलहाल विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। 15 दिनों के भीतर दो नर बाघों के शव मिलने से वन्यजीव प्रेमियों और अधिकारियों के बीच चिंता बनी हुई है।
पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर बृजेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि 26 अप्रैल को इसी बाघ को तारा गांव से रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर पहनाया गया था और उसकी 24 घंटे निगरानी की जा रही थी। दुर्भाग्यवश, सोमवार को उसकी मौत हो गई। प्रथम दृष्टया में बाघों के बीच आपसी संघर्ष को मौत का कारण बताया है। वरिष्ठ वन विभाग के प्राणी चिकित्सक डॉक्टर संजीव गुप्ता ने शव का पोस्टमार्टम किया। उन्होंने बताया कि बाघ के शरीर पर कई गहरे घाव के निशान मिले हैं, और संघर्ष इतना भीषण था कि बाघ की रीड की हड्डी और सिर की हड्डी भी टूटी हुई पाई गई। हालांकि, बाघ के सभी अंग सुरक्षित मिले हैं, इससे शिकार की संभावना से फिलहाल इनकार किया गया है। मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सैंपल को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
घटना की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के तहत इलाके को सील कर डॉग स्क्वायड से जांच कराई गई। इसके बाद क्षेत्र संचालक बृजेंद्र श्रीवास्तव, उपसंचालक वीरेंद्र कुमार पटेल, एनटीसीए प्रतिनिधि चंद्रभान तिवारी सहित अन्य अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में बाघ के शव को अंतिम संस्कार किया गया। वर्तमान में सुरक्षा के लिहाज से क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं और हाथियों के जरिए सघन गश्त की जा रही है।
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इनसेट
2009 की यादें और वर्तमान चुनौतियां
यह घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के लिए एक गंभीर चेतावनी है। वर्ष 2009 में अवैध शिकार और अन्य कारणों से पन्ना टाइगर रिजर्व लगभग बाघ विहीन हो गया था, जिसने राष्ट्रीय उद्यान की प्रतिष्ठा पर गहरा आघात पहुंचाया था। उस समय से लेकर अब तक पुनर्वास के प्रयासों से रिजर्व में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई थी, लेकिन इस तरह की लगातार मौतों से एक बार फिर चिंताएं बढ़ गई हैं।
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पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर बृजेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि 26 अप्रैल को इसी बाघ को तारा गांव से रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर पहनाया गया था और उसकी 24 घंटे निगरानी की जा रही थी। दुर्भाग्यवश, सोमवार को उसकी मौत हो गई। प्रथम दृष्टया में बाघों के बीच आपसी संघर्ष को मौत का कारण बताया है। वरिष्ठ वन विभाग के प्राणी चिकित्सक डॉक्टर संजीव गुप्ता ने शव का पोस्टमार्टम किया। उन्होंने बताया कि बाघ के शरीर पर कई गहरे घाव के निशान मिले हैं, और संघर्ष इतना भीषण था कि बाघ की रीड की हड्डी और सिर की हड्डी भी टूटी हुई पाई गई। हालांकि, बाघ के सभी अंग सुरक्षित मिले हैं, इससे शिकार की संभावना से फिलहाल इनकार किया गया है। मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सैंपल को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
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घटना की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के तहत इलाके को सील कर डॉग स्क्वायड से जांच कराई गई। इसके बाद क्षेत्र संचालक बृजेंद्र श्रीवास्तव, उपसंचालक वीरेंद्र कुमार पटेल, एनटीसीए प्रतिनिधि चंद्रभान तिवारी सहित अन्य अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में बाघ के शव को अंतिम संस्कार किया गया। वर्तमान में सुरक्षा के लिहाज से क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं और हाथियों के जरिए सघन गश्त की जा रही है।
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2009 की यादें और वर्तमान चुनौतियां
यह घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के लिए एक गंभीर चेतावनी है। वर्ष 2009 में अवैध शिकार और अन्य कारणों से पन्ना टाइगर रिजर्व लगभग बाघ विहीन हो गया था, जिसने राष्ट्रीय उद्यान की प्रतिष्ठा पर गहरा आघात पहुंचाया था। उस समय से लेकर अब तक पुनर्वास के प्रयासों से रिजर्व में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई थी, लेकिन इस तरह की लगातार मौतों से एक बार फिर चिंताएं बढ़ गई हैं।