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Banda News: बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित जंगल में छोड़ा
Tue, 28 Apr 2026 11:36 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 28 Apr 2026 11:36 PM IST
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फोटो - 24 तारा गांव के पास तालाब में पानी पीती बाघिन। स्त्रोत : ग्रामीण
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करतल। पन्ना टाइगर रिजर्व के समीपवर्ती तारा गांव में बीते दिनों उस समय दहशत फैल गई जब दो साल की बाघिन रिहायशी इलाकों में घुस आई। बाघिन ने न केवल दो मवेशियों का शिकार किया, बल्कि ग्रामीणों की भीड़ ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन में अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दीं। वन विभाग को अंततः बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित जंगल में छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के अमानगंज बफर क्षेत्र से सटे तारा गांव की है। पिछले कुछ दिनों से एक युवा बाघिन, जिसे टी-213 बाघिन की चौथी संतान बताया जा रहा है। लगातार गांव के आसपास मंडरा रही थी। बाघिन की भूख ने उसे रिहायशी इलाकों की ओर आने को मजबूर किया और उसने दो मवेशियों को अपना शिकार बनाया। इस घटना ने स्थानीय लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया।
वहीं, जब बाघिन गांव के पास एक तालाब के किनारे दिखी, तो भयभीत होने के बजाय, कई ग्रामीण उसकी ओर आकर्षित हुए। अपनी जान की परवाह किए बिना वे बाघिन के बेहद करीब पहुंच गए और मोबाइल से सेल्फी और वीडियो बनाने लगे।
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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, पन्ना टाइगर रिजर्व की टीम, डिप्टी डायरेक्टर वीके पटेल के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। प्रारंभिक योजना बाघिन को बिना किसी नुकसान के जंगल में खदेड़ने की थी। इसके लिए चार प्रशिक्षित हाथियों की मदद ली गई। बाघिन के बार-बार गांव की ओर लौटने के प्रयासों के कारण, यह योजना विफल साबित हुई।
परिस्थितियों को नियंत्रित करने और बाघिन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, वन विभाग ने उसे ट्रेंकुलाइज (बेहोश करने वाली दवा देना) करने का निर्णय लिया। इस पूरे ऑपरेशन में, स्थानीय ग्रामीणों ने भी वन विभाग का सहयोग किया। उन्होंने बाघिन की लोकेशन का पता लगाने और भीड़ को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ट्रेंकुलाइज होने के बाद, बाघिन को सुरक्षित रूप से पकड़कर पार्क के कोर एरिया में छोड़ा गया है।
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घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के अमानगंज बफर क्षेत्र से सटे तारा गांव की है। पिछले कुछ दिनों से एक युवा बाघिन, जिसे टी-213 बाघिन की चौथी संतान बताया जा रहा है। लगातार गांव के आसपास मंडरा रही थी। बाघिन की भूख ने उसे रिहायशी इलाकों की ओर आने को मजबूर किया और उसने दो मवेशियों को अपना शिकार बनाया। इस घटना ने स्थानीय लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया।
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वहीं, जब बाघिन गांव के पास एक तालाब के किनारे दिखी, तो भयभीत होने के बजाय, कई ग्रामीण उसकी ओर आकर्षित हुए। अपनी जान की परवाह किए बिना वे बाघिन के बेहद करीब पहुंच गए और मोबाइल से सेल्फी और वीडियो बनाने लगे।
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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, पन्ना टाइगर रिजर्व की टीम, डिप्टी डायरेक्टर वीके पटेल के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। प्रारंभिक योजना बाघिन को बिना किसी नुकसान के जंगल में खदेड़ने की थी। इसके लिए चार प्रशिक्षित हाथियों की मदद ली गई। बाघिन के बार-बार गांव की ओर लौटने के प्रयासों के कारण, यह योजना विफल साबित हुई।
परिस्थितियों को नियंत्रित करने और बाघिन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, वन विभाग ने उसे ट्रेंकुलाइज (बेहोश करने वाली दवा देना) करने का निर्णय लिया। इस पूरे ऑपरेशन में, स्थानीय ग्रामीणों ने भी वन विभाग का सहयोग किया। उन्होंने बाघिन की लोकेशन का पता लगाने और भीड़ को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ट्रेंकुलाइज होने के बाद, बाघिन को सुरक्षित रूप से पकड़कर पार्क के कोर एरिया में छोड़ा गया है।

फोटो - 24 तारा गांव के पास तालाब में पानी पीती बाघिन। स्त्रोत : ग्रामीण