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Banda News: सवर्ण समाज यूजीसी के नए कानून के खिलाफ 7 फरवरी को करेगा बड़ा आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Wed, 04 Feb 2026 12:13 AM IST
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फोटो - 14 कनवारा गांव में ग्रामीणों को आमंत्रण देते सवर्ण एकता मंच के पदाधिकारी। स्रोत - संगठन
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बांदा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए इक्विटी रेगुलेशन कानून को लेकर सवर्ण समाज में भारी आक्रोश है। इस कानून को काला कानून बताते हुए सवर्ण एकता मंच ने आगामी 7 फरवरी को जीआईसी मैदान में एक बड़े आंदोलन की घोषणा की है। मंच के पदाधिकारी इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं और उन्हें इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।
ब्राह्मण समाज के नेता संकटा प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि देश में पहले से ही विशेष वर्गों के संरक्षण के लिए एससी, एसटी, एंटी रैगिंग एक्ट और महिला उत्पीड़न विरोधी जैसे कानून मौजूद हैं। ऐसे में शिक्षा के मंदिरों में विभाजनकारी कानून की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लोगों से सात फरवरी को जीआईसी मैदान में एकत्र होकर अपने बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया है।
अखंड भारत विप्र एकता मंच के प्रमुख अभिषेक बाजपेई ने केंद्र सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग की है। उनका तर्क है कि यह कानून सवर्ण छात्र-छात्राओं के लिए सुनियोजित मॉब लिंचिंग का हथियार बनेगा, जो योग्यता का गला घोटेगा और कैंपस में भय का माहौल पैदा करेगा। करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष शिवशरण सिंह पप्पू ने भी इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की है, ताकि भयमुक्त शिक्षा व्यवस्था और योग्यता की रक्षा हो सके।
सवर्ण एकता मंच के सदस्य शहर के विभिन्न मोहल्लों और आसपास के गांवों जैसे कनवारा, मवई, गुरेह, तिंदवारा आदि में जाकर लोगों को नए कानून की खामियों से अवगत करा रहे हैं। पर्चे और पंफलेट के माध्यम से लोगों को 7 फरवरी को जीआईसी मैदान में पहुंचने का निमंत्रण दिया जा रहा है। मंगलवार को उन्होंने कई गांवों का दौरा कर आंदोलन की रणनीति बनाई।
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ब्राह्मण समाज के नेता संकटा प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि देश में पहले से ही विशेष वर्गों के संरक्षण के लिए एससी, एसटी, एंटी रैगिंग एक्ट और महिला उत्पीड़न विरोधी जैसे कानून मौजूद हैं। ऐसे में शिक्षा के मंदिरों में विभाजनकारी कानून की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लोगों से सात फरवरी को जीआईसी मैदान में एकत्र होकर अपने बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया है।
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अखंड भारत विप्र एकता मंच के प्रमुख अभिषेक बाजपेई ने केंद्र सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग की है। उनका तर्क है कि यह कानून सवर्ण छात्र-छात्राओं के लिए सुनियोजित मॉब लिंचिंग का हथियार बनेगा, जो योग्यता का गला घोटेगा और कैंपस में भय का माहौल पैदा करेगा। करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष शिवशरण सिंह पप्पू ने भी इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की है, ताकि भयमुक्त शिक्षा व्यवस्था और योग्यता की रक्षा हो सके।
सवर्ण एकता मंच के सदस्य शहर के विभिन्न मोहल्लों और आसपास के गांवों जैसे कनवारा, मवई, गुरेह, तिंदवारा आदि में जाकर लोगों को नए कानून की खामियों से अवगत करा रहे हैं। पर्चे और पंफलेट के माध्यम से लोगों को 7 फरवरी को जीआईसी मैदान में पहुंचने का निमंत्रण दिया जा रहा है। मंगलवार को उन्होंने कई गांवों का दौरा कर आंदोलन की रणनीति बनाई।
