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Banda News: केन नदी का जलस्तर 48 घंटे में तीन मीटर बढ़ा
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फोटाे-2-चंद्रावल नदी के अमारा रपटे के ऊपर से बहता पानी। संवाद
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बांदा। पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर केन नदी में दिखाई देने लगा है। मध्यप्रदेश से होकर बांदा पहुंचने वाली केन नदी का जलस्तर महज 48 घंटे में करीब तीन मीटर बढ़ गया।
हालांकि अभी नदी चेतावनी बिंदु से 5.79 मीटर नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। 16 अगस्त को 94.02 मीटर रहा जलस्तर 17 अगस्त को बढ़कर 96 मीटर और मंगलवार को 97.21 मीटर पहुंच गया।
पानी बढ़ने की रफ्तार ने नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। केन नदी में चेतावनी बिंदु 103 मीटर और खतरे का निशान 104 मीटर है। जलस्तर 104 मीटर पहुंचने पर नदी किनारे के इलाकों में बाढ़ का संकट खड़ा हो सकता है।
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कनवारा क्षेत्र के ब्रह्माडेरा, छावनी डेरा समेत 10 से अधिक मजरे बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। इन क्षेत्रों में नदी के बाहर की ओर कटान भी शुरू हो जाता है। लुक्तरा, मरौली और अमारा समेत आसपास के बड़े क्षेत्र की आबादी भी प्रभावित होने की आशंका रहती है। जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ नियंत्रण कक्ष से केन की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ चौकियों को भी सक्रिय कर निगरानी कराई जा रही है।
अधिकारी मौके पर पहुंचकर नदी के जलस्तर और आसपास के हालात का जायजा ले रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित गांवों में सुरक्षित स्थानों को चिह्नित कर वहां शेल्टर होम की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। पंचायत भवन, सरकारी स्कूल समेत अन्य सुरक्षित भवनों को इसके लिए चिह्नित किया गया है। केन नदी का जलस्तर 2025 में 106.10 मीटर पहुंचा था। केन में बढ़ते पानी का असर उसकी ओर आने वाले नालों और सहायक नदियों में भी दिखने लगा है। कई जगह पानी का बहाव उल्टा होने लगा है।
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साल दर साल केन का अधिकतम जलस्तर
वर्ष जलस्तर
2021 102.78 मीटर
2022 105.67 मीटर
2023 104.53 मीटर
2024 106.75 मीटर
2025 106.10 मीटर
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यमुना में भी बढ़ रहा पानी
केन के साथ यमुना नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है। मंगलवार को यमुना का जलस्तर 90.84 मीटर दर्ज किया गया। पिछले दो दिनों में इसमें करीब 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। केन यमुना की सहायक नदी है, ऐसे में केन में बाढ़ की स्थिति बनने पर यमुना के जलस्तर पर भी इसका असर पड़ सकता है। वर्ष 1978 में यमुना का जलस्तर 105.16 मीटर तक पहुंचा था, जो अब तक का सर्वाधिक दर्ज जलस्तर बताया गया है।
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चंद्रावल में उफान से दो संपर्क मार्ग डूबे
पैलानी। एसडीएम भूपेंद्र सिंह ने सिंघनकलां के तुर्री नाला पहुंचकर केन नदी के बढ़े जलस्तर की जमीनी स्थिति देखी। उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों को नदी और आसपास के इलाकों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए।
संभावित बाढ़ को देखते हुए तहसील प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। उधर, चंद्रावल नदी में उफान के कारण पड़ोहरा-नांदादेव संपर्क मार्ग जलमग्न हो गया है। गौरी कलां-अमारा संपर्क मार्ग पर भी पानी भरने से आवागमन ठप हो गया है। एसडीएम ने बताया कि केन, चंद्रावल और यमुना नदी में तेज बहाव, ऊंची लहरें, अधिक बारिश या तेज हवा होने पर नावों का संचालन रोकने के स्पष्ट निर्देश नाविकों को दिए गए हैं।
खप्टिहा कलां के नाविक भूरा निषाद और शंकर निषाद ने बताया कि तेज बहाव, लहर, बारिश और हवा के दौरान नाव चलाना जोखिम भरा है। तहसील प्रशासन के निर्देश पर ऐसे मौसम में नाव संचालन रोक दिया जाता है। इसी के तहत मंगलवार को तीन दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं को नाव से आगे भेजने के बजाय वापस घर भेज दिया गया। (संवाद)
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17 बाढ़ चौकियां सक्रिय, तीन सेक्टर में बांटा तहसील क्षेत्र
संभावित बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन पहले से तैयारी कर रहा है। जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद, जिलाधिकारी अमित आसेरी और पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल पूर्व में शंकरपुरवा में चौपाल लगाकर अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दे चुके हैं।
तहसीलदार पैलानी राधेश्याम सिंह ने बताया कि बाढ़ से निपटने के लिए पहले ही मॉक ड्रिल कराई गई है। गांव-गांव चौपाल लगाकर प्रधानों और ग्रामीणों से संवाद भी किया गया है। तहसील क्षेत्र को 17 बाढ़ चौकियों और तीन सेक्टर में बांटा गया है।
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हालांकि अभी नदी चेतावनी बिंदु से 5.79 मीटर नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। 16 अगस्त को 94.02 मीटर रहा जलस्तर 17 अगस्त को बढ़कर 96 मीटर और मंगलवार को 97.21 मीटर पहुंच गया।
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पानी बढ़ने की रफ्तार ने नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। केन नदी में चेतावनी बिंदु 103 मीटर और खतरे का निशान 104 मीटर है। जलस्तर 104 मीटर पहुंचने पर नदी किनारे के इलाकों में बाढ़ का संकट खड़ा हो सकता है।
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कनवारा क्षेत्र के ब्रह्माडेरा, छावनी डेरा समेत 10 से अधिक मजरे बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। इन क्षेत्रों में नदी के बाहर की ओर कटान भी शुरू हो जाता है। लुक्तरा, मरौली और अमारा समेत आसपास के बड़े क्षेत्र की आबादी भी प्रभावित होने की आशंका रहती है। जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ नियंत्रण कक्ष से केन की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ चौकियों को भी सक्रिय कर निगरानी कराई जा रही है।
अधिकारी मौके पर पहुंचकर नदी के जलस्तर और आसपास के हालात का जायजा ले रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित गांवों में सुरक्षित स्थानों को चिह्नित कर वहां शेल्टर होम की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। पंचायत भवन, सरकारी स्कूल समेत अन्य सुरक्षित भवनों को इसके लिए चिह्नित किया गया है। केन नदी का जलस्तर 2025 में 106.10 मीटर पहुंचा था। केन में बढ़ते पानी का असर उसकी ओर आने वाले नालों और सहायक नदियों में भी दिखने लगा है। कई जगह पानी का बहाव उल्टा होने लगा है।
साल दर साल केन का अधिकतम जलस्तर
वर्ष जलस्तर
2021 102.78 मीटर
2022 105.67 मीटर
2023 104.53 मीटर
2024 106.75 मीटर
2025 106.10 मीटर
यमुना में भी बढ़ रहा पानी
केन के साथ यमुना नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है। मंगलवार को यमुना का जलस्तर 90.84 मीटर दर्ज किया गया। पिछले दो दिनों में इसमें करीब 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। केन यमुना की सहायक नदी है, ऐसे में केन में बाढ़ की स्थिति बनने पर यमुना के जलस्तर पर भी इसका असर पड़ सकता है। वर्ष 1978 में यमुना का जलस्तर 105.16 मीटर तक पहुंचा था, जो अब तक का सर्वाधिक दर्ज जलस्तर बताया गया है।
चंद्रावल में उफान से दो संपर्क मार्ग डूबे
पैलानी। एसडीएम भूपेंद्र सिंह ने सिंघनकलां के तुर्री नाला पहुंचकर केन नदी के बढ़े जलस्तर की जमीनी स्थिति देखी। उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों को नदी और आसपास के इलाकों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए।
संभावित बाढ़ को देखते हुए तहसील प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। उधर, चंद्रावल नदी में उफान के कारण पड़ोहरा-नांदादेव संपर्क मार्ग जलमग्न हो गया है। गौरी कलां-अमारा संपर्क मार्ग पर भी पानी भरने से आवागमन ठप हो गया है। एसडीएम ने बताया कि केन, चंद्रावल और यमुना नदी में तेज बहाव, ऊंची लहरें, अधिक बारिश या तेज हवा होने पर नावों का संचालन रोकने के स्पष्ट निर्देश नाविकों को दिए गए हैं।
खप्टिहा कलां के नाविक भूरा निषाद और शंकर निषाद ने बताया कि तेज बहाव, लहर, बारिश और हवा के दौरान नाव चलाना जोखिम भरा है। तहसील प्रशासन के निर्देश पर ऐसे मौसम में नाव संचालन रोक दिया जाता है। इसी के तहत मंगलवार को तीन दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं को नाव से आगे भेजने के बजाय वापस घर भेज दिया गया। (संवाद)
17 बाढ़ चौकियां सक्रिय, तीन सेक्टर में बांटा तहसील क्षेत्र
संभावित बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन पहले से तैयारी कर रहा है। जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद, जिलाधिकारी अमित आसेरी और पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल पूर्व में शंकरपुरवा में चौपाल लगाकर अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दे चुके हैं।
तहसीलदार पैलानी राधेश्याम सिंह ने बताया कि बाढ़ से निपटने के लिए पहले ही मॉक ड्रिल कराई गई है। गांव-गांव चौपाल लगाकर प्रधानों और ग्रामीणों से संवाद भी किया गया है। तहसील क्षेत्र को 17 बाढ़ चौकियों और तीन सेक्टर में बांटा गया है।