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Banda News: हाईस्कूल तक मान्यता का प्रचार, सोते रहे जिम्मेदार
Tue, 18 Aug 2026 11:25 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 18 Aug 2026 11:25 PM IST
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फोटो-3-विद्यालय जाने वाली गली में लगे पोस्टर, जिस पर कक्षा एक से 10 तक साफ लिखा है। ब्यूरो
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बांदा। झील का पुरवा स्थित बीएल विद्या मंदिर में दो बच्चों की संदिग्ध हालात में मौत के बाद जांच में स्कूल की व्यवस्थाओं पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
कक्षा आठ तक की मान्यता होने के बावजूद यहां 10वीं तक की कक्षाएं संचालित हो रहीं थीं। हैरानी यह है कि स्कूल संचालक ने इसे छिपाने के बजाय प्रचार सामग्री और पर्चों में हाईस्कूल तक प्रवेश का खुलेआम प्रचार किया। स्कूल जाने वाली गली में अब भी ऐसे पोस्टर लगे हैं। इसके बावजूद शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस ओर नहीं गई।
दो बच्चों की मौत के बाद अधिकारी स्कूल पहुंचे और जांच की लेकिन वहां खुलेआम लगे पोस्टरों और 10वीं तक कक्षाएं संचालित किए जाने के मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक दिनेश कुमार ने कहा कि विद्यालय को उनके विभाग से कोई मान्यता नहीं मिली है। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग के बीएसए अव्यक्तराम का कहना है कि विद्यालय को केवल आठवीं तक की मान्यता दी गई थी।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि स्कूल के पास सिर्फ आठवीं तक की मान्यता थी तो 10वीं तक कक्षाएं संचालित करने की जानकारी शिक्षा विभाग को कैसे नहीं हुई और जिम्मेदारों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। स्कूल में आठवीं तक मान्यता होने के बावजूद हाईस्कूल तक प्रवेश का प्रचार यदि लंबे समय से हो रहा था तो यह शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है।
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स्कूल की गली में लगे पोस्टर और प्रचार सामग्री विभागीय दावों की पोल खोल रहे हैं। अब देखना यह है कि दो बच्चों की मौत के बाद शुरू हुई जांच में इस गंभीर अनियमितता पर जिम्मेदार अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं।
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बच्चों की मौत के बाद भी जांच में खानापूरी
दो बच्चों की मौत जैसी गंभीर घटना के बाद स्कूल की व्यवस्थाओं और मान्यता की स्थिति की भी विस्तृत जांच की उम्मीद थी लेकिन शिक्षा विभाग के स्तर पर जांच अब तक सीमित नजर आ रही है। विभागीय अधिकारी इसे पुलिस जांच का मामला बताकर पल्ला झाड़ते दिख रहे हैं। ऐसे में विद्यालय में शिक्षा संबंधी नियमों के उल्लंघन का मामला पीछे छूटता नजर आ रहा है।
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दो बच्चों की मौत से कांपा दिल...घर ले गए अपने जिगर का टुकड़ा
बांदा। देवनगर यानी झील का पुरवा में संचालित निजी आवासीय विद्यालय में दो बच्चों की मौत से अन्य अभिभावक कांप रहे हैं। जैसे ही उन्हें दो छात्रों की मौत व एक छात्र के बीमार होने की खबर मिली तो वह तुरंत विद्यालय पहुंचे।
शाम होते-होते अभिभावक स्कूल में पढ़ रहे अपने बच्चों को बुलाकर घर ले गए और अपने स्तर से उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया। यह सावधानी इसलिए बरती गई, क्योंकि हादसे की रात को अधिकांश बच्चों ने बाहर से आया फास्ट फूड खाया था।
मंगलवार को बीएल विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय में गेट पर ताला बंद मिला। स्थानीय लोगों ने बताया कि दो छात्रों की मौत की घटना के बाद जैसे-जैसे बच्चों के घरवालों को जानकारी मिली तो वह स्कूल पहुंचे। अभिभावक तुरंत अपने बच्चों को स्कूल से बुलाकर ले गए। शाम होते-होते स्कूल से सभी बच्चे अपने घर चले गए थे इसलिए स्कूल में ताला बंद हो गया है।
अभिभावकों ने अपने बच्चों ने उनकी सेहत के बारे में भी बातचीत की और अपने स्तर से उनका चेकअप भी कराया। जिससे किसी प्रकार की समस्या न हो। मंगलवार को इस हादसे की चर्चा झील का पुरवा के लोगों में रही। सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि बांदा मुख्यालय से करीब तीन से चार किलोमीटर की दूर पर स्थित इस विद्यालय के संचालन की भनक बेसिक शिक्षा या माध्यमिक शिक्षा विभाग को कैसे नहीं मिली।
विद्यालय को बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा आठ तक की मान्यता दी गई थी लेकिन वह आवासीय विद्यालय संचालित कर रहे थे और यहां कक्षा दस तक के बच्चे भर्ती किए जा रहे थे।
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आज कोतवाली में दी जा सकती है तहरीर
बांदा। नितिन और अरुण का अंतिम संस्कार परिजन ने मंगलवार को किया है। परिजन ने कहा कि वे आपस में बातचीत करके एक साथ तहरीर देंगे। बुधवार को दोनों परिवार के लोग कोतवाली पहुंच सकते हैं।
परिजनों ने कहा कि विद्यालय की इस घोर लापरवाही को क्षमा नहीं किया जा सकता है। बीमार होने के बाद भी विद्यालय की ओर से परिजन को रात में सूचना नहीं दी गई थी। इसका नतीजा यह हुआ कि उनके बच्चे अब इस दुनिया में नहीं हैं।
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बच्चों के शव से लिपट गए घरवाले, पौत्र की चिता देखकर बिलखे दादा
बांदा। बेहतर इलाज नहीं मिलने से इस दुनिया से विदा हुए नितिन और अरुण का मंगलवार को परिजन ने अंतिम संस्कार कर दिया। नितिन का अंतिम संस्कार बांदा और अरुण का तिंदवारी के मुक्तिधाम में हुआ।
अपने कलेजे के टुकड़ों को विदाई देते समय परिवार के लोगों का कलेजा दहल गया। घरवाले बच्चों के शव से लिपट गए। वहीं पौत्र अरुण की चिता देखकर दादा बिलखते रहे।
थाना गिरवां क्षेत्र के सरस्वाह गांव निवासी नितिन (12) का अंतिम संस्कार बांदा के मुक्तिधाम में हुआ। मामा सुनील ने बताया कि मुक्तिधाम में परिजन ने शव को दफनाकर उसका अंतिम संस्कार किया है। इसी तरह से चिल्ला क्षेत्र के महेंदु गांव निवासी विजयपाल कुशवाहा ने बताया कि पौत्र अरुण (09) का अंतिम संस्कार तिंदवारी स्थित मुक्तिधाम में किया गया। यहां सभी रिश्तेदार परिचित आ गए थे।
मुक्तिधाम में अरुण के शव को चिता पर रखकर आग दी गई। पौत्र की अंतिम विदाई देखकर दादा विजयपाल बिलख पड़े और उस घड़ी को कोस रहे थे जब उन्होंने अरुण का प्रवेश आवासीय विद्यालय में कराया था।
विजयपाल कुशवाहा ने बताया कि उनके रिश्तेदार बांदा में रहते हैं। वह हर तरह से अरुण का बेहतर से बेहतर इलाज कराते। अगर विद्यालय की ओर से रात में ही तबीयत खराब होने की सूचना दे दी गई होती। विद्यालय के लोग दोनों बच्चों की तबीयत को हल्के में लेते रहे। बेहतर इलाज नहीं होने व लापरवाही बरतने पर दोनों परिवार के लोगों पर दुखों का पहाड़ टूटा है।
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हरकत में प्रशासन, सभी विद्यालयों के भोजन की होगी जांच
बांदा। बीएल विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय में दो छात्रों की संदिग्ध हालात में मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया है। जिलाधिकारी अमित आसेरी ने मंगलवार को जिले में बच्चों को भोजन परोसने वाले सभी विद्यालयों में खाने की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीमें विद्यालयों में पहुंचकर भोजन के नमूने लेंगी और गुणवत्ता की जांच करेंगी।
डीएम ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय समेत ऐसे सभी विद्यालयों में जांच कराई जाए, जहां बच्चों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। टीमों को भोजन बनाने की प्रक्रिया, साफ-सफाई और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि किसी विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता में लापरवाही या मानकों का उल्लंघन मिलता है तो उसकी रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराई जाए। लापरवाही सामने आने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बीएल विद्या मंदिर में दो छात्रों की मौत के बाद विद्यालय में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे हैं। (संवाद)
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रिश्तेदारी और प्रचार का बुना जाल... आवासीय विद्यालय बना मासूमों का काल
बांदा। आवासीय विद्यालय के संचालक ने कहीं रिश्तेदारी का सहारा लिया तो कहीं गांव-गांव जाकर प्रचार किया। गरीब परिवारों के अभिभावकों को आवासीय विद्यालय में बेहतर शिक्षा और सुविधाओं का सपना दिखाकर बच्चों का प्रवेश कराया गया।
अभिभावकों ने भी रिश्तेदारी और प्रचार पर भरोसा कर विद्यालय की हकीकत जानने की कोशिश नहीं की। उन्हें क्या पता था कि बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में उठाया गया कदम उनके लिए जिंदगी का सबसे बड़ा दुख बन जाएगा।
शहर के वार्ड नंबर 16 देव नगर (झील का पुरवा) में स्थित बीएल विद्या मंदिर निजी आवासीय एवं दैनिक विद्यालय गली में काफी अंदर बना है। आसपास अब नए मकान बन रहे हैं। दो छात्रों की संदिग्ध हालात में मौत के बाद सवाल खड़ा हुआ कि बांदा से 40 से 60 किलोमीटर दूर गांवों के बच्चे यहां कैसे पहुंचे। पड़ताल में सामने आया कि विद्यालय में रहने वाले 33 बच्चों में अधिकांश दूर-दराज के गांवों के हैं।
थाना चिल्ला क्षेत्र के महेंदु गांव निवासी पूर्व फौजी विजयपाल कुशवाहा ने बताया कि उनके दोनों पौत्र अरुण और उत्कर्ष पहले कोतवाली देहात क्षेत्र के जमालपुर के पास एक नामी विद्यालय में पढ़ते थे। बीएल विद्या मंदिर के संचालक उनके रिश्तेदार हैं।
उन्होंने संपर्क कर आवासीय विद्यालय की खूबियां बताईं और बच्चों का प्रवेश कराने के लिए दबाव बनाया। रिश्तेदारी पर भरोसा कर उन्होंने विद्यालय की जांच-पड़ताल नहीं की। दोनों बच्चों का प्रवेश करा दिया। एक बच्चे की फीस करीब 40 हजार रुपये थी।
हैरत की बात यह है कि विद्यालय में रहने वाले 33 बच्चे भी दूर-दराज के गांवों से लाकर दाखिल किए गए थे। ऐसे में अब यह सवाल भी उठ रहा है कि अभिभावकों को विद्यालय की वास्तविक सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जानकारी क्यों नहीं हो सकी और प्रवेश से पहले विद्यालय की समुचित जांच क्यों नहीं की गई।
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गांव में प्रचार कर दिखाया बेहतर भविष्य का सपना
थाना गिरवां क्षेत्र के सरस्वाह गांव निवासी मृतक नितिन के मामा सुनील ने बताया कि विद्यालय संचालक एक दिन गांव में प्रचार करने पहुंचे थे। प्रचार के दौरान वह नितिन के बहनोई के घर भी गए। वहां आवासीय विद्यालय की सुविधाओं और शिक्षा के बारे में बेहतर भविष्य का सपना दिखाया गया।
इसके बाद बहनोई ने बच्चों का प्रवेश कराने का मन बना लिया और करीब एक साल पहले नितिन का दाखिला करा दिया। सुनील ने बताया कि बहनोई ने उनसे भी स्कूल जाकर देखने के लिए कहा था, लेकिन कामकाज के चलते वह नहीं जा सके। उन्हें लगा कि विद्यालय ठीक ही होगा। उन्हें क्या पता था कि बेहतर भविष्य की उम्मीद में घर से भेजा गया बच्चा वापस नहीं लौटेगा।
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कक्षा आठ तक की मान्यता होने के बावजूद यहां 10वीं तक की कक्षाएं संचालित हो रहीं थीं। हैरानी यह है कि स्कूल संचालक ने इसे छिपाने के बजाय प्रचार सामग्री और पर्चों में हाईस्कूल तक प्रवेश का खुलेआम प्रचार किया। स्कूल जाने वाली गली में अब भी ऐसे पोस्टर लगे हैं। इसके बावजूद शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस ओर नहीं गई।
दो बच्चों की मौत के बाद अधिकारी स्कूल पहुंचे और जांच की लेकिन वहां खुलेआम लगे पोस्टरों और 10वीं तक कक्षाएं संचालित किए जाने के मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक दिनेश कुमार ने कहा कि विद्यालय को उनके विभाग से कोई मान्यता नहीं मिली है। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग के बीएसए अव्यक्तराम का कहना है कि विद्यालय को केवल आठवीं तक की मान्यता दी गई थी।
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ऐसे में सवाल उठता है कि यदि स्कूल के पास सिर्फ आठवीं तक की मान्यता थी तो 10वीं तक कक्षाएं संचालित करने की जानकारी शिक्षा विभाग को कैसे नहीं हुई और जिम्मेदारों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। स्कूल में आठवीं तक मान्यता होने के बावजूद हाईस्कूल तक प्रवेश का प्रचार यदि लंबे समय से हो रहा था तो यह शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है।
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बच्चों की मौत के बाद भी जांच में खानापूरी
दो बच्चों की मौत जैसी गंभीर घटना के बाद स्कूल की व्यवस्थाओं और मान्यता की स्थिति की भी विस्तृत जांच की उम्मीद थी लेकिन शिक्षा विभाग के स्तर पर जांच अब तक सीमित नजर आ रही है। विभागीय अधिकारी इसे पुलिस जांच का मामला बताकर पल्ला झाड़ते दिख रहे हैं। ऐसे में विद्यालय में शिक्षा संबंधी नियमों के उल्लंघन का मामला पीछे छूटता नजर आ रहा है।
दो बच्चों की मौत से कांपा दिल...घर ले गए अपने जिगर का टुकड़ा
बांदा। देवनगर यानी झील का पुरवा में संचालित निजी आवासीय विद्यालय में दो बच्चों की मौत से अन्य अभिभावक कांप रहे हैं। जैसे ही उन्हें दो छात्रों की मौत व एक छात्र के बीमार होने की खबर मिली तो वह तुरंत विद्यालय पहुंचे।
शाम होते-होते अभिभावक स्कूल में पढ़ रहे अपने बच्चों को बुलाकर घर ले गए और अपने स्तर से उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया। यह सावधानी इसलिए बरती गई, क्योंकि हादसे की रात को अधिकांश बच्चों ने बाहर से आया फास्ट फूड खाया था।
मंगलवार को बीएल विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय में गेट पर ताला बंद मिला। स्थानीय लोगों ने बताया कि दो छात्रों की मौत की घटना के बाद जैसे-जैसे बच्चों के घरवालों को जानकारी मिली तो वह स्कूल पहुंचे। अभिभावक तुरंत अपने बच्चों को स्कूल से बुलाकर ले गए। शाम होते-होते स्कूल से सभी बच्चे अपने घर चले गए थे इसलिए स्कूल में ताला बंद हो गया है।
अभिभावकों ने अपने बच्चों ने उनकी सेहत के बारे में भी बातचीत की और अपने स्तर से उनका चेकअप भी कराया। जिससे किसी प्रकार की समस्या न हो। मंगलवार को इस हादसे की चर्चा झील का पुरवा के लोगों में रही। सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि बांदा मुख्यालय से करीब तीन से चार किलोमीटर की दूर पर स्थित इस विद्यालय के संचालन की भनक बेसिक शिक्षा या माध्यमिक शिक्षा विभाग को कैसे नहीं मिली।
विद्यालय को बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा आठ तक की मान्यता दी गई थी लेकिन वह आवासीय विद्यालय संचालित कर रहे थे और यहां कक्षा दस तक के बच्चे भर्ती किए जा रहे थे।
आज कोतवाली में दी जा सकती है तहरीर
बांदा। नितिन और अरुण का अंतिम संस्कार परिजन ने मंगलवार को किया है। परिजन ने कहा कि वे आपस में बातचीत करके एक साथ तहरीर देंगे। बुधवार को दोनों परिवार के लोग कोतवाली पहुंच सकते हैं।
परिजनों ने कहा कि विद्यालय की इस घोर लापरवाही को क्षमा नहीं किया जा सकता है। बीमार होने के बाद भी विद्यालय की ओर से परिजन को रात में सूचना नहीं दी गई थी। इसका नतीजा यह हुआ कि उनके बच्चे अब इस दुनिया में नहीं हैं।
बच्चों के शव से लिपट गए घरवाले, पौत्र की चिता देखकर बिलखे दादा
बांदा। बेहतर इलाज नहीं मिलने से इस दुनिया से विदा हुए नितिन और अरुण का मंगलवार को परिजन ने अंतिम संस्कार कर दिया। नितिन का अंतिम संस्कार बांदा और अरुण का तिंदवारी के मुक्तिधाम में हुआ।
अपने कलेजे के टुकड़ों को विदाई देते समय परिवार के लोगों का कलेजा दहल गया। घरवाले बच्चों के शव से लिपट गए। वहीं पौत्र अरुण की चिता देखकर दादा बिलखते रहे।
थाना गिरवां क्षेत्र के सरस्वाह गांव निवासी नितिन (12) का अंतिम संस्कार बांदा के मुक्तिधाम में हुआ। मामा सुनील ने बताया कि मुक्तिधाम में परिजन ने शव को दफनाकर उसका अंतिम संस्कार किया है। इसी तरह से चिल्ला क्षेत्र के महेंदु गांव निवासी विजयपाल कुशवाहा ने बताया कि पौत्र अरुण (09) का अंतिम संस्कार तिंदवारी स्थित मुक्तिधाम में किया गया। यहां सभी रिश्तेदार परिचित आ गए थे।
मुक्तिधाम में अरुण के शव को चिता पर रखकर आग दी गई। पौत्र की अंतिम विदाई देखकर दादा विजयपाल बिलख पड़े और उस घड़ी को कोस रहे थे जब उन्होंने अरुण का प्रवेश आवासीय विद्यालय में कराया था।
विजयपाल कुशवाहा ने बताया कि उनके रिश्तेदार बांदा में रहते हैं। वह हर तरह से अरुण का बेहतर से बेहतर इलाज कराते। अगर विद्यालय की ओर से रात में ही तबीयत खराब होने की सूचना दे दी गई होती। विद्यालय के लोग दोनों बच्चों की तबीयत को हल्के में लेते रहे। बेहतर इलाज नहीं होने व लापरवाही बरतने पर दोनों परिवार के लोगों पर दुखों का पहाड़ टूटा है।
हरकत में प्रशासन, सभी विद्यालयों के भोजन की होगी जांच
बांदा। बीएल विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय में दो छात्रों की संदिग्ध हालात में मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया है। जिलाधिकारी अमित आसेरी ने मंगलवार को जिले में बच्चों को भोजन परोसने वाले सभी विद्यालयों में खाने की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीमें विद्यालयों में पहुंचकर भोजन के नमूने लेंगी और गुणवत्ता की जांच करेंगी।
डीएम ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय समेत ऐसे सभी विद्यालयों में जांच कराई जाए, जहां बच्चों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। टीमों को भोजन बनाने की प्रक्रिया, साफ-सफाई और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि किसी विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता में लापरवाही या मानकों का उल्लंघन मिलता है तो उसकी रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराई जाए। लापरवाही सामने आने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बीएल विद्या मंदिर में दो छात्रों की मौत के बाद विद्यालय में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे हैं। (संवाद)
रिश्तेदारी और प्रचार का बुना जाल... आवासीय विद्यालय बना मासूमों का काल
बांदा। आवासीय विद्यालय के संचालक ने कहीं रिश्तेदारी का सहारा लिया तो कहीं गांव-गांव जाकर प्रचार किया। गरीब परिवारों के अभिभावकों को आवासीय विद्यालय में बेहतर शिक्षा और सुविधाओं का सपना दिखाकर बच्चों का प्रवेश कराया गया।
अभिभावकों ने भी रिश्तेदारी और प्रचार पर भरोसा कर विद्यालय की हकीकत जानने की कोशिश नहीं की। उन्हें क्या पता था कि बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में उठाया गया कदम उनके लिए जिंदगी का सबसे बड़ा दुख बन जाएगा।
शहर के वार्ड नंबर 16 देव नगर (झील का पुरवा) में स्थित बीएल विद्या मंदिर निजी आवासीय एवं दैनिक विद्यालय गली में काफी अंदर बना है। आसपास अब नए मकान बन रहे हैं। दो छात्रों की संदिग्ध हालात में मौत के बाद सवाल खड़ा हुआ कि बांदा से 40 से 60 किलोमीटर दूर गांवों के बच्चे यहां कैसे पहुंचे। पड़ताल में सामने आया कि विद्यालय में रहने वाले 33 बच्चों में अधिकांश दूर-दराज के गांवों के हैं।
थाना चिल्ला क्षेत्र के महेंदु गांव निवासी पूर्व फौजी विजयपाल कुशवाहा ने बताया कि उनके दोनों पौत्र अरुण और उत्कर्ष पहले कोतवाली देहात क्षेत्र के जमालपुर के पास एक नामी विद्यालय में पढ़ते थे। बीएल विद्या मंदिर के संचालक उनके रिश्तेदार हैं।
उन्होंने संपर्क कर आवासीय विद्यालय की खूबियां बताईं और बच्चों का प्रवेश कराने के लिए दबाव बनाया। रिश्तेदारी पर भरोसा कर उन्होंने विद्यालय की जांच-पड़ताल नहीं की। दोनों बच्चों का प्रवेश करा दिया। एक बच्चे की फीस करीब 40 हजार रुपये थी।
हैरत की बात यह है कि विद्यालय में रहने वाले 33 बच्चे भी दूर-दराज के गांवों से लाकर दाखिल किए गए थे। ऐसे में अब यह सवाल भी उठ रहा है कि अभिभावकों को विद्यालय की वास्तविक सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जानकारी क्यों नहीं हो सकी और प्रवेश से पहले विद्यालय की समुचित जांच क्यों नहीं की गई।
गांव में प्रचार कर दिखाया बेहतर भविष्य का सपना
थाना गिरवां क्षेत्र के सरस्वाह गांव निवासी मृतक नितिन के मामा सुनील ने बताया कि विद्यालय संचालक एक दिन गांव में प्रचार करने पहुंचे थे। प्रचार के दौरान वह नितिन के बहनोई के घर भी गए। वहां आवासीय विद्यालय की सुविधाओं और शिक्षा के बारे में बेहतर भविष्य का सपना दिखाया गया।
इसके बाद बहनोई ने बच्चों का प्रवेश कराने का मन बना लिया और करीब एक साल पहले नितिन का दाखिला करा दिया। सुनील ने बताया कि बहनोई ने उनसे भी स्कूल जाकर देखने के लिए कहा था, लेकिन कामकाज के चलते वह नहीं जा सके। उन्हें लगा कि विद्यालय ठीक ही होगा। उन्हें क्या पता था कि बेहतर भविष्य की उम्मीद में घर से भेजा गया बच्चा वापस नहीं लौटेगा।