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Barabanki News: लकड़ी के धुएं में सुलगता बचपन

संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Mon, 16 Mar 2026 01:38 AM IST
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A childhood smothered in wood smoke
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बाराबंकी। परिषदीय विद्यालयों में इन दिनों मिड-डे मील की खुशबू कम और अव्यवस्था का धुआं ज्यादा नजर आ रहा है। जिले के लगभग 2700 स्कूलों में रसोई गैस सिलिंडरों की समय पर आपूर्ति न होने से मध्याह्न भोजन व्यवस्था पटरी से उतर गई है। आलम यह है कि जो हाथ कभी ब्लैकबोर्ड पर चॉक चलाते थे, वे अब गैस एजेंसियों के बाहर खाली सिलिंडर लेकर कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं। अभिभावकों को कहना है कि सिलिंडर न होने से स्कूलों में लकड़ी के धुएं में बचपन सुलग रहा है।
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जिले के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में हर महीने करीब 8700 गैस सिलिंडरों की खपत होती है। समय पर रिफिल न मिलने के कारण कई स्कूलों में चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि शिक्षकों को शिक्षण कार्य छोड़कर स्वयं गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल गिर रहा है, बल्कि नौनिहालों की पढ़ाई का भी कीमती समय बर्बाद हो रहा है। अभिभावकों का कहना है कि अगर मास्टर साहब गैस की जुगाड़ में ही लगे रहेंगे, तो बच्चों को पढ़ाएगा कौन?
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जिन स्कूलों में सिलेंडर खत्म हो चुके हैं, वहां मजबूरी में पुराने दौर की तरह लकड़ी के चूल्हों पर खाना पकाया जा रहा है। धुएं के बीच रसोइया भोजन तैयार कर रही हैं, जिससे परिसर का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है।
विभागीय सुस्ती ने बढ़ाई मुसीबत
हैरानी की बात यह है कि इस संकट का समाधान फाइलों में दबा हुआ है। जिला पूर्ति विभाग ने बेसिक शिक्षा विभाग से विद्यालयवार सिलिंडरों की सूची मांगी थी, ताकि आपूर्ति की ठोस व्यवस्था की जा सके। लेकिन बीएसए कार्यालय की सुस्ती के चलते अब तक यह सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। जिला पूर्ति अधिकारी
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