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Barabanki News: खुद के बाद अब दूसरों को बना रहीं आत्मनिर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 17 Jan 2026 01:11 AM IST
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बाराबंकी। जीआईसी में लगे स्वदेशी व हस्तशिल्प मेला में कई महिलाएं अपने उत्पाद बिक्री के लिए लेकर आई हैं। आत्मनिर्भर बनने के लिए इन्होंने संघर्ष की आग में अपने को तपा कर कुंदन सरीखा बना लिया है। यह महिलाएं खुद आत्मनिर्भर बनने के बाद अब दूसरों को भी सबल व स्वावलंबी बनने की राह दिखा रही हैं। इन महिलाओं की आंखों में आत्मविश्वास की चमक है के साथ हाथों में हुनर और मन में आगे बढ़ने का संकल्प साफ दिखता है। उनका संघर्ष बताता हैं कि हिम्मत हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।
कानपुर देहात के झींझक क्षेत्र की रहने वाली नीलम गुप्ता जूट के बैग और चिड़ियों के घोंसले बनाकर आज अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत बेहद कठिन थी। कच्चा माल जुटाना, उत्पाद तैयार करना और फिर उन्हें बाजार तक पहुंचाना, हर कदम पर चुनौतियां थीं।
आर्थिक तंगी ने कई बार हिम्मत तोड़ने की कोशिश की, लेकिन हार नहीं मानी। पति अनिरुद्ध प्रकाश के सहयोग और विश्वास ने उन्हें संबल बनाया। धीरे-धीरे जूट के बैग बाजार में अपनी जगह बनाने लगे। आज नीलम के उत्पादों को सरकारी ऑर्डर भी मिलने लगे हैं। इसी तरह कानपुर देहात के रनिया क्षेत्र की निवासी खुशी की कहानी भी संघर्ष और हौसले की मिसाल है। पति रेहान की दिक्कतें आईं तो खुशी ने भी हाथ बंटाने का फैसला किया।
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आर्थिक तंगी ने कई बार हिम्मत तोड़ने की कोशिश की, लेकिन हार नहीं मानी। पति अनिरुद्ध प्रकाश के सहयोग और विश्वास ने उन्हें संबल बनाया। धीरे-धीरे जूट के बैग बाजार में अपनी जगह बनाने लगे। आज नीलम के उत्पादों को सरकारी ऑर्डर भी मिलने लगे हैं। इसी तरह कानपुर देहात के रनिया क्षेत्र की निवासी खुशी की कहानी भी संघर्ष और हौसले की मिसाल है। पति रेहान की दिक्कतें आईं तो खुशी ने भी हाथ बंटाने का फैसला किया।
