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Barabanki News: इंदौर में छिपा है अमेरिकी नागरिकों से ठगी का मास्टरमाइंड चार्ल्स
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ज्ञान बिहारी मिश्र
लखनऊ। समिट बिडिंग में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर अमेरिकी नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट कर 250 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड चार्ल्स इंदौर में छिपा है। गिरोह के पकड़े जाने के बाद चार्ल्स ने बड़े पदों पर काबिज कुछ करीबियों से संपर्क कर मदद मांगी थी। आरोपी मोटी रकम भी खर्च करने के लिए तैयार था। हालांकि, वह कामयाब नहीं हो सका।
समिट बिल्डिंग से 119 लागों को गिरफ्तार किए जाने के बाद चार्ल्स ने अपना फोन नंबर बदल दिया था। आरोपी ने कई सारे सिम कार्ड खरीदे और अलग-अलग नंबरों से अपने करीबियों के संपर्क में रहा। इस बीच पुलिस ने कोलकाता से चार्ल्स के साथी नायकर जयराज, विनीत धर्मेंद्र और रिंकी दास गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। तीनों के पकड़े जाने के बाद आरोपी मध्य प्रदेश पहुंचा। अलग-अलग शहरों में ठहरने के बाद वह इंदौर गया और सारे फोन नंबर बंद कर लिए। सूत्रों का कहना है कि आरोपी ने अपना फोन भी बदल लिया है। क्राइम ब्रांच और साइबर थाने की पुलिस आरोपी की तलाश कर रही हैं। आरोपी के साथियों से पूछताछ में सामने आया है कि मास्टर माइंड का असली नाम चार्ल्स नहीं है। वह अपना नाम और पहचान छिपाकर लोगों से मिलता था। यही वजह है कि पुलिस को उसे गिरफ्तार करने में मशक्कत करनी पड़ रही है।
जाली दस्तावेज तैयार करने में माहिर है आरोपी
चार्ल्स जाली दस्तावेज तैयार करने में माहिर है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने कई नाम से पहचान पत्र बनवा रखे हैं। चार्ल्स अमेरिका में बैठे जालसाजों के संपर्क में है, जिनसे वह आई फोन के फेसटाइम एप से बात करता है। लखनऊ पुलिस ने आरोपी की लोकेशन के आधार पर एमपी पुलिस से भी संपर्क किया है। आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहा है।
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यह है मामला
क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की पुलिस ने एक जुलाई को 119 लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपी समिट बिल्डिंग में फर्जी कॉल सेंटर से विदेशी नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट करते थे। खुद को अमेरिका पुलिस का अफसर बताकर जेल भेजने की धमकी देते थे। गिरोह सभी के रहने की व्यवस्था भी करता था। ज्यादातर आरोपी महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मेघालय, असम और गुजरात के रहने वाले हैं।
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लखनऊ। समिट बिडिंग में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर अमेरिकी नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट कर 250 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड चार्ल्स इंदौर में छिपा है। गिरोह के पकड़े जाने के बाद चार्ल्स ने बड़े पदों पर काबिज कुछ करीबियों से संपर्क कर मदद मांगी थी। आरोपी मोटी रकम भी खर्च करने के लिए तैयार था। हालांकि, वह कामयाब नहीं हो सका।
समिट बिल्डिंग से 119 लागों को गिरफ्तार किए जाने के बाद चार्ल्स ने अपना फोन नंबर बदल दिया था। आरोपी ने कई सारे सिम कार्ड खरीदे और अलग-अलग नंबरों से अपने करीबियों के संपर्क में रहा। इस बीच पुलिस ने कोलकाता से चार्ल्स के साथी नायकर जयराज, विनीत धर्मेंद्र और रिंकी दास गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। तीनों के पकड़े जाने के बाद आरोपी मध्य प्रदेश पहुंचा। अलग-अलग शहरों में ठहरने के बाद वह इंदौर गया और सारे फोन नंबर बंद कर लिए। सूत्रों का कहना है कि आरोपी ने अपना फोन भी बदल लिया है। क्राइम ब्रांच और साइबर थाने की पुलिस आरोपी की तलाश कर रही हैं। आरोपी के साथियों से पूछताछ में सामने आया है कि मास्टर माइंड का असली नाम चार्ल्स नहीं है। वह अपना नाम और पहचान छिपाकर लोगों से मिलता था। यही वजह है कि पुलिस को उसे गिरफ्तार करने में मशक्कत करनी पड़ रही है।
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जाली दस्तावेज तैयार करने में माहिर है आरोपी
चार्ल्स जाली दस्तावेज तैयार करने में माहिर है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने कई नाम से पहचान पत्र बनवा रखे हैं। चार्ल्स अमेरिका में बैठे जालसाजों के संपर्क में है, जिनसे वह आई फोन के फेसटाइम एप से बात करता है। लखनऊ पुलिस ने आरोपी की लोकेशन के आधार पर एमपी पुलिस से भी संपर्क किया है। आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहा है।
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यह है मामला
क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की पुलिस ने एक जुलाई को 119 लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपी समिट बिल्डिंग में फर्जी कॉल सेंटर से विदेशी नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट करते थे। खुद को अमेरिका पुलिस का अफसर बताकर जेल भेजने की धमकी देते थे। गिरोह सभी के रहने की व्यवस्था भी करता था। ज्यादातर आरोपी महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मेघालय, असम और गुजरात के रहने वाले हैं।