{"_id":"6a8344a4f04eeb043b092c0c","slug":"education-of-1940-students-rests-on-four-teachers-barabanki-news-c-315-1-brb1038-177213-2026-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: चार शिक्षकों के भरोसे 1940 विद्यार्थियों की पढ़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: चार शिक्षकों के भरोसे 1940 विद्यार्थियों की पढ़ाई
Mon, 17 Aug 2026 10:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 17 Aug 2026 10:58 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सूरतगंज । स्कूल बड़ा है। बच्चे 1940 हैं। पढ़ाने वाले मास्टर सिर्फ चार। गणित कौन पढ़ाएगा और विज्ञान कौन सिखाएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। राजकीय विद्यालय सूरतगंज में सबसे बुरा हाल 11वीं और 12वीं कक्षा की पढ़ाई का है। यहां 990 छात्र नामांकित हैं लेकिन इंटर की कक्षाओं में पढ़ाने के लिए एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है। ऐसे में बिना शिक्षक के विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा की तैयारी को विवश हैं।
कक्षा छह से 10 के 950 छात्रों पर भी संकट कम नहीं है। इन्हें पढ़ाने के लिए जो हिंदी, संस्कृत, गृह विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषय के चार शिक्षक ही हैं। अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे मुख्य विषय के शिक्षकों के पद खाली हैं। कंप्यूटर लैब में रखे आठों सिस्टम ताले में बंद हैं। अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर काफी परेशान हैं। (संवाद)
स्मार्ट क्लास का मकसद फेल
शिक्षकों की कमी को पूरा करने और बच्चों को डिजिटल माध्यम से पढ़ाने के लिए स्मार्ट क्लास बनाई गई थी। सोच यह थी कि जब तक स्थायी शिक्षक नहीं आते, तब तक ऑनलाइन कंटेंट से पढ़ाई चलती रहेगी लेकिन गाइड करने वाले शिक्षक और सही देखभाल के अभाव में यह प्रयोग भी पूरी तरह बेअसर साबित हो रहा है। प्रधानाचार्य अरविंद सिंह ने बताया कि कॉलेज में स्मार्ट क्लास चलाई जा रही है। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए फिलहाल 10 बाहरी शिक्षकों से पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। शिक्षकों के रिक्त पदों पर जल्द ही तैनाती के लिए मुख्यालय स्तर से पत्राचार भी किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कक्षा छह से 10 के 950 छात्रों पर भी संकट कम नहीं है। इन्हें पढ़ाने के लिए जो हिंदी, संस्कृत, गृह विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषय के चार शिक्षक ही हैं। अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे मुख्य विषय के शिक्षकों के पद खाली हैं। कंप्यूटर लैब में रखे आठों सिस्टम ताले में बंद हैं। अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर काफी परेशान हैं। (संवाद)
विज्ञापन
स्मार्ट क्लास का मकसद फेल
शिक्षकों की कमी को पूरा करने और बच्चों को डिजिटल माध्यम से पढ़ाने के लिए स्मार्ट क्लास बनाई गई थी। सोच यह थी कि जब तक स्थायी शिक्षक नहीं आते, तब तक ऑनलाइन कंटेंट से पढ़ाई चलती रहेगी लेकिन गाइड करने वाले शिक्षक और सही देखभाल के अभाव में यह प्रयोग भी पूरी तरह बेअसर साबित हो रहा है। प्रधानाचार्य अरविंद सिंह ने बताया कि कॉलेज में स्मार्ट क्लास चलाई जा रही है। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए फिलहाल 10 बाहरी शिक्षकों से पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। शिक्षकों के रिक्त पदों पर जल्द ही तैनाती के लिए मुख्यालय स्तर से पत्राचार भी किया जा रहा है।
विज्ञापन