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Barabanki News: सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष सहित 10 पर प्राथमिकी दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 10 Jan 2026 01:02 AM IST
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बाराबंकी। शहर के मुंशी रघुनंदन प्रसाद सरदार पटेल महिला डिग्री कॉलेज में बिना अनुमति चुनाव कराने व 17 लोगों के फर्जी हस्ताक्षर कराकर कई करोड़ का गबन किए जाने का मामला सामने आया है। अदालत के आदेश पर जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार वर्मा समेत 10 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन व कूटरचित दस्तावेज बनाने की प्राथमिकी पुलिस में दर्ज कराई गई है।
कॉलेज की संस्थापक संरक्षक सदस्य कृष्णा चौधरी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उमाशंकर वर्मा और धीरेंद्र कुमार वर्मा ने फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बिना किसी चुनाव और रजिस्ट्रार सोसाइटी की स्वीकृति के ही कॉलेज की प्रबंध समिति का गठन दिखा दिया। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर स्वयं को पदाधिकारी घोषित करने के बाद कॉलेज की धनराशि का भी मनमाने ढंग से दुरुपयोग किया गया।
बताया कि प्रबंध समिति की बैठक में पहले 17 लोगों के जाली हस्ताक्षर कराए गए। फिर किसी राष्ट्रीयकृत बैंक की बजाय जिला सहकारी बैंक में कॉलेज का खाता खोलकर आठ नवंबर 2021 को बिना किसी बिल या वैध प्रक्रिया के दयाराम एंड सन्स ट्रेडिंग फर्म को 50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसके बाद उमाशंकर वर्मा ने अपने पुत्र मानव पटेल के बैंक ऑफ इंडिया खाते में दो बार 10-10 लाख रुपये ट्रांसफर कराए।
इसके साथ ही जिला सहकारी बैंक में कॉलेज के खाते में जमा दो करोड़ सात लाख रुपये शिकायत के बाद फ्रीज होने के बावजूद दूसरे खातों में स्थानांतरित कर दिए गए। उस समय धीरेंद्र कुमार वर्मा जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष थे। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर जलालपुर मोहल्ला निवासी जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार वर्मा, उमाशंकर वर्मा, मानव पटेल, मानसिंह, राजेश कुमार गुप्ता (गुप्ता एंड सन क्रेडिट कंपनी के मालिक), दशहरा बाग निवासी राजीव, कटैयाहार निवासी अशोक, लखपेड़ाबाग निवासी सुनील, मकदूमपुर निवासी अजय कुमार और दशहरा बाग निवासी भागवत के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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कॉलेज की संस्थापक संरक्षक सदस्य कृष्णा चौधरी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उमाशंकर वर्मा और धीरेंद्र कुमार वर्मा ने फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बिना किसी चुनाव और रजिस्ट्रार सोसाइटी की स्वीकृति के ही कॉलेज की प्रबंध समिति का गठन दिखा दिया। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर स्वयं को पदाधिकारी घोषित करने के बाद कॉलेज की धनराशि का भी मनमाने ढंग से दुरुपयोग किया गया।
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बताया कि प्रबंध समिति की बैठक में पहले 17 लोगों के जाली हस्ताक्षर कराए गए। फिर किसी राष्ट्रीयकृत बैंक की बजाय जिला सहकारी बैंक में कॉलेज का खाता खोलकर आठ नवंबर 2021 को बिना किसी बिल या वैध प्रक्रिया के दयाराम एंड सन्स ट्रेडिंग फर्म को 50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसके बाद उमाशंकर वर्मा ने अपने पुत्र मानव पटेल के बैंक ऑफ इंडिया खाते में दो बार 10-10 लाख रुपये ट्रांसफर कराए।
इसके साथ ही जिला सहकारी बैंक में कॉलेज के खाते में जमा दो करोड़ सात लाख रुपये शिकायत के बाद फ्रीज होने के बावजूद दूसरे खातों में स्थानांतरित कर दिए गए। उस समय धीरेंद्र कुमार वर्मा जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष थे। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर जलालपुर मोहल्ला निवासी जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार वर्मा, उमाशंकर वर्मा, मानव पटेल, मानसिंह, राजेश कुमार गुप्ता (गुप्ता एंड सन क्रेडिट कंपनी के मालिक), दशहरा बाग निवासी राजीव, कटैयाहार निवासी अशोक, लखपेड़ाबाग निवासी सुनील, मकदूमपुर निवासी अजय कुमार और दशहरा बाग निवासी भागवत के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
