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Barabanki News: वाराणसी में पकड़े गए ठगों ने राजधानी में शिफ्ट किए ट्रेनी, 21 को कराया मुक्त
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गुडंबा के हॉस्टल में पड़ताल करती पुलिस।
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लखनऊ। मल्टीलेवल मार्केटिंग और पिरामिड चेन स्कीम चलाकर एक हजार से अधिक युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह का शुक्रवार को वाराणसी में भंडाफोड़ हुआ। पुलिस की कार्रवाई को देख गिरोह ने 21 युवतियों को लखनऊ के गुडंबा में कुर्सी रोड स्थित हॉस्टल में शिफ्ट कर दिया। इन्हें ट्रेनिंग के नाम पर वाराणसी में रखा गया था। हालांकि, वहां छापा पड़ने पर इन्हें शनिवार को लखनऊ शिफ्ट कर दिया गया। रविवार को गुडंबा पुलिस ने सभी युवतियों को मुक्त कराया।
इंस्पेक्टर गुडंबा अंजनी कुमार मिश्र ने बताया कि वाराणसी में रॉयल हेल्थ इंडिया और महादेव इंटरप्राइजेज के नाम से फर्जी मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनी चल रही थी। वाराणसी पुलिस ने इसका खुलासा कर 19 लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की कार्रवाई को देख गिरोह में शामिल लोग शनिवार रात 21 लड़कियों को लखनऊ लेकर पहुंचे। इन्हें कुर्सी रोड के बसहा स्थित अमित शुक्ला के हॉस्टल में ठहराया गया।
गिरोह ने जल्दबाजी में युवतियों को उनका सामान भी लेने नहीं दिया। इनमें शामिल अर्चना ने शक होने पर रिश्तेदार भानू को फोन कर मामले की सूचना दी। भानू ने गुडंबा पुलिस से शिकायत की। इसके बाद पुलिस हॉस्टल पहुंची। पूछताछ में अर्चना ने बताया कि उन्हें नौकरी के नाम पर बुलाया गया था। गिरोह के लोगों ने 25 हजार रुपये प्रति माह वेतन देने की बात कही थी। गिरोह बिहार, झारखंड, यूपी और मध्य प्रदेश के बेरोजगार युवक-युवतियों को निशाना बनाता था। पुलिस ने मुक्त कराईं युवतियों के परिजनों को सूचना दे दी है।
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कई शहरों में फैला रखा है जाल
छानबीन में सामने आया कि गिरोह ने कई शहरों में जाल बिछा रखा है। सबसे पहले बेरोजगार युवाओं को वाराणसी बुलाया जाता। यहां रजिस्ट्रेशन और साक्षात्कार के नाम पर 30 से 35 हजार रुपये जमा कराए जाते थे। फिर सामान्य किट थमाकर अलग-अलग शहरों में भेज दिया जाता था। सभी से तीन लोगों को जोड़ने के लिए कहा जाता था। ऐसा नहीं करने पर वेतन न दिए जाने की धमकी दी जाती थी। ठहरने की व्यवस्था गिरोह की ओर से ही की जाती थी।
विदेश घुमाने, लग्जरी गाड़ियों का देते थे लालच
पूछताछ में युवतियों ने बताया कि टारगेट पूरा करने पर उन्हें विदेश घुमाने और लग्जरी गाड़ियां खरीदकर देने का लालच दिया जाता था। कोई विरोध करता तो उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। खास बात है कि युवाओं को आपस में बात करने की भी मनाही थी। पीड़ितों में ज्यादातर बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं। गिरोह का सरगना बिहार का दीपक शाह है, जिसके खाते में सात महीने में चार करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया है।
महादेव इंटरप्राइजेज के नाम से खोली फर्जी कंपनी
गिरोह ने महादेव इंटरप्राइजेज के नाम से फर्जी कंपनी खोल रखी थी। इसके अलावा रॉयल हेल्थ इंडिया, रॉयल हेल्थ वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी की फ्रेंचाइजी भी ली थी। अब तक की जांच में पता चला है कि गिरोह ने करीब एक हजार बेरोजगारों से करोड़ों रुपये ठगे हैं। सरगना दीपक की उम्र 31 वर्ष है। उसने चार राज्यों के दो हजार से अधिक लोगों को गिरोह से जोड़ा था।
हॉस्टल संचालक ने 60 लोगों को रखने से किया इन्कार
हॉस्टल संचालक अमित शुक्ला ने बताया कि गिरोह से जुड़ा अभिषेक शनिवार सुबह 60 लोगों को लेकर हॉस्टल पहुंचा था। हॉस्टल में इतने लोगों को रखने की जगह नहीं थी। इस कारण उन्होंने मना कर दिया। अभिषेक इससे पहले भी प्रशिक्षण दिलाने के नाम पर युवक-युवतियों को हॉस्टल ला चुका है। पुलिस अभिषेक और उसके साथ आए अन्य ट्रेनी के बारे में पता लगा रही है।
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इंस्पेक्टर गुडंबा अंजनी कुमार मिश्र ने बताया कि वाराणसी में रॉयल हेल्थ इंडिया और महादेव इंटरप्राइजेज के नाम से फर्जी मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनी चल रही थी। वाराणसी पुलिस ने इसका खुलासा कर 19 लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की कार्रवाई को देख गिरोह में शामिल लोग शनिवार रात 21 लड़कियों को लखनऊ लेकर पहुंचे। इन्हें कुर्सी रोड के बसहा स्थित अमित शुक्ला के हॉस्टल में ठहराया गया।
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गिरोह ने जल्दबाजी में युवतियों को उनका सामान भी लेने नहीं दिया। इनमें शामिल अर्चना ने शक होने पर रिश्तेदार भानू को फोन कर मामले की सूचना दी। भानू ने गुडंबा पुलिस से शिकायत की। इसके बाद पुलिस हॉस्टल पहुंची। पूछताछ में अर्चना ने बताया कि उन्हें नौकरी के नाम पर बुलाया गया था। गिरोह के लोगों ने 25 हजार रुपये प्रति माह वेतन देने की बात कही थी। गिरोह बिहार, झारखंड, यूपी और मध्य प्रदेश के बेरोजगार युवक-युवतियों को निशाना बनाता था। पुलिस ने मुक्त कराईं युवतियों के परिजनों को सूचना दे दी है।
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कई शहरों में फैला रखा है जाल
छानबीन में सामने आया कि गिरोह ने कई शहरों में जाल बिछा रखा है। सबसे पहले बेरोजगार युवाओं को वाराणसी बुलाया जाता। यहां रजिस्ट्रेशन और साक्षात्कार के नाम पर 30 से 35 हजार रुपये जमा कराए जाते थे। फिर सामान्य किट थमाकर अलग-अलग शहरों में भेज दिया जाता था। सभी से तीन लोगों को जोड़ने के लिए कहा जाता था। ऐसा नहीं करने पर वेतन न दिए जाने की धमकी दी जाती थी। ठहरने की व्यवस्था गिरोह की ओर से ही की जाती थी।
विदेश घुमाने, लग्जरी गाड़ियों का देते थे लालच
पूछताछ में युवतियों ने बताया कि टारगेट पूरा करने पर उन्हें विदेश घुमाने और लग्जरी गाड़ियां खरीदकर देने का लालच दिया जाता था। कोई विरोध करता तो उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। खास बात है कि युवाओं को आपस में बात करने की भी मनाही थी। पीड़ितों में ज्यादातर बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं। गिरोह का सरगना बिहार का दीपक शाह है, जिसके खाते में सात महीने में चार करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया है।
महादेव इंटरप्राइजेज के नाम से खोली फर्जी कंपनी
गिरोह ने महादेव इंटरप्राइजेज के नाम से फर्जी कंपनी खोल रखी थी। इसके अलावा रॉयल हेल्थ इंडिया, रॉयल हेल्थ वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी की फ्रेंचाइजी भी ली थी। अब तक की जांच में पता चला है कि गिरोह ने करीब एक हजार बेरोजगारों से करोड़ों रुपये ठगे हैं। सरगना दीपक की उम्र 31 वर्ष है। उसने चार राज्यों के दो हजार से अधिक लोगों को गिरोह से जोड़ा था।
हॉस्टल संचालक ने 60 लोगों को रखने से किया इन्कार
हॉस्टल संचालक अमित शुक्ला ने बताया कि गिरोह से जुड़ा अभिषेक शनिवार सुबह 60 लोगों को लेकर हॉस्टल पहुंचा था। हॉस्टल में इतने लोगों को रखने की जगह नहीं थी। इस कारण उन्होंने मना कर दिया। अभिषेक इससे पहले भी प्रशिक्षण दिलाने के नाम पर युवक-युवतियों को हॉस्टल ला चुका है। पुलिस अभिषेक और उसके साथ आए अन्य ट्रेनी के बारे में पता लगा रही है।

गुडंबा के हॉस्टल में पड़ताल करती पुलिस।

गुडंबा के हॉस्टल में पड़ताल करती पुलिस।

गुडंबा के हॉस्टल में पड़ताल करती पुलिस।

गुडंबा के हॉस्टल में पड़ताल करती पुलिस।

गुडंबा के हॉस्टल में पड़ताल करती पुलिस।

गुडंबा के हॉस्टल में पड़ताल करती पुलिस।

गुडंबा के हॉस्टल में पड़ताल करती पुलिस।

गुडंबा के हॉस्टल में पड़ताल करती पुलिस।