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Barabanki News: वकीलों ने घेरा एसपी कार्यालय, टोलकर्मियों पर रासुका की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 17 Jan 2026 01:15 AM IST
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बाराबंकी। लखनऊ-सुल्तानपुर नेशनल हाईवे पर बारा गांव के पास स्थित टोल प्लाजा पर प्रतापगढ़ के अधिवक्ता रत्नेश शुक्ला की पिटाई के मामले ने तीसरे दिन भी तूल पकड़े रखा। पीड़ित अधिवक्ता के समर्थन में शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बेंच के वकील बड़ी संख्या में बाराबंकी पहुंचे और स्थानीय अधिवक्ताओं के साथ मिलकर एसपी कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता देवकीनंदन पांडेय ने टोलकर्मियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करने और संबंधित टोल कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की।
शुक्रवार को दोपहर 12 बजे वकीलों का हुजूम एसपी कार्यालय परिसर में दाखिल हुआ तो परिसर नारों से गूंज उठा। वकीलों का आरोप था कि टोल कर्मियों की बर्बरता के बावजूद पुलिस गंभीर धाराओं में प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों को बचाने के प्रयास में जुटी है। ऐसे में मामले में शिथिलता बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई हो।
मौके पर पहुंचे सीओ सिटी संगम कुमार और एएसपी उत्तरी विकास चंद्र त्रिपाठी ने वकीलों को समझाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी वकीलों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उन्होंने पूछा कि टोल मैनेजर पर शांति भंग जैसी हल्की कार्रवाई का क्या मतलब है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जानलेवा हमले की धारा में मुकदमा दर्ज है और पांच को जेल भेजा जा चुका है। वकीलों ने इसे नाकाफी बताते हुए अन्य संलिप्त लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग रखी।
वकीलों का आक्रोश बढ़ता देख एसपी अर्पित विजयवर्गीय अपने कक्ष से निकल कर वकीलों के बीच पहुंचे। एसपी ने वकीलों को आश्वासन दिया कि मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा और शेष आरोपियों की भी गिरफ्तारी जल्द होगी। करीब एक घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई में ढिलाई बरती गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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शुक्रवार को दोपहर 12 बजे वकीलों का हुजूम एसपी कार्यालय परिसर में दाखिल हुआ तो परिसर नारों से गूंज उठा। वकीलों का आरोप था कि टोल कर्मियों की बर्बरता के बावजूद पुलिस गंभीर धाराओं में प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों को बचाने के प्रयास में जुटी है। ऐसे में मामले में शिथिलता बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई हो।
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मौके पर पहुंचे सीओ सिटी संगम कुमार और एएसपी उत्तरी विकास चंद्र त्रिपाठी ने वकीलों को समझाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी वकीलों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उन्होंने पूछा कि टोल मैनेजर पर शांति भंग जैसी हल्की कार्रवाई का क्या मतलब है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जानलेवा हमले की धारा में मुकदमा दर्ज है और पांच को जेल भेजा जा चुका है। वकीलों ने इसे नाकाफी बताते हुए अन्य संलिप्त लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग रखी।
वकीलों का आक्रोश बढ़ता देख एसपी अर्पित विजयवर्गीय अपने कक्ष से निकल कर वकीलों के बीच पहुंचे। एसपी ने वकीलों को आश्वासन दिया कि मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा और शेष आरोपियों की भी गिरफ्तारी जल्द होगी। करीब एक घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई में ढिलाई बरती गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
