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Barabanki News: मेंथा की नई विधि से पानी की बचत और बेहतर उपज
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 05 Apr 2026 12:35 AM IST
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बाराबंकी। क्षेत्र के किसान अब मेंथा की रोपाई में नवाचार कर रहे हैं। नई विधि के तहत मेंथा की रोपाई आलू की तरफ बेड बनाकर की जा रही है। इससे पानी की बचत होती है लागत कम लगती है। उपज भी अच्छी मिलती है।
दरियाबाद क्षेत्र के किसान पहले पुराने तरीके से धान की तरह समतल खेत में मेंथा की रोपाई करते थे। उस विधि में लागत अधिक आती थी और उत्पादन भी कम मिलता था। पानी भी ज्यादा खर्च होता था। मथुरानगर के पूर्व प्रधान मो. सलीम ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष थोड़ी जमीन में यह तरीका आजमाया था। उन्होंने पाया कि इस तकनीक से फसल जल्दी तैयार हो जाती है। साथ ही पानी की बचत के साथ उपज का अच्छा लाभ मिलता है। इसलिए इस बार पूरी फसल नवीन विधि से रोपी है।
नई विधि में सीधे खेत में रोपाई न करके आलू की तरह मेड़ बनाई जाती है। इसमें एक मेड़ से दूसरी मेड़ की दूरी 60 सेंटीमीटर रखी जाती है। मिर्कापुर निवासी सुरेंद्र ने बताया कि चार बीघा में नई विधि से रोपाई करने पर सिंचाई की लागत कम आती है। इस विधि से उपज में भी वृद्धि होती है।
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दरियाबाद क्षेत्र के किसान पहले पुराने तरीके से धान की तरह समतल खेत में मेंथा की रोपाई करते थे। उस विधि में लागत अधिक आती थी और उत्पादन भी कम मिलता था। पानी भी ज्यादा खर्च होता था। मथुरानगर के पूर्व प्रधान मो. सलीम ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष थोड़ी जमीन में यह तरीका आजमाया था। उन्होंने पाया कि इस तकनीक से फसल जल्दी तैयार हो जाती है। साथ ही पानी की बचत के साथ उपज का अच्छा लाभ मिलता है। इसलिए इस बार पूरी फसल नवीन विधि से रोपी है।
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नई विधि में सीधे खेत में रोपाई न करके आलू की तरह मेड़ बनाई जाती है। इसमें एक मेड़ से दूसरी मेड़ की दूरी 60 सेंटीमीटर रखी जाती है। मिर्कापुर निवासी सुरेंद्र ने बताया कि चार बीघा में नई विधि से रोपाई करने पर सिंचाई की लागत कम आती है। इस विधि से उपज में भी वृद्धि होती है।

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