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Barabanki News: बुजुर्गों को अखबार, युवाओं को डिजिटल पुस्तकालय का संसार
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 31 Mar 2026 02:02 AM IST
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बाराबंकी। रामनगर के गांवों में अब शिक्षा की नई रोशनी बिखरेगी। डिजिटल इंडिया की तर्ज पर अभ्युदय योजना के तहत ब्लॉक की 10 ग्राम पंचायतों में डिजिटल पुस्तकालय स्थापित किए जा रहे हैं।
अब गांव के मेधावियों को यूपीएससी, नीट और एसएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहरों की ओर पलायन नहीं करना होगा, बल्कि उनके अपने गांव में ही वाई-फाई और सौर ऊर्जा से लैस डिजिटल संसाधन उपलब्ध होंगे। डिजिटल पुस्तकालय न केवल किताबों का घर होंगे, बल्कि उन सपनों की उड़ान का केंद्र बनेंगे जो अक्सर संसाधनों के अभाव में दम तोड़ देते थे। 1.40 लाख की लागत और 2000 पुस्तकों के संग्रह के साथ ये पुस्तकालय गांवों में पठन-पाठन की एक नई संस्कृति को जन्म दे रहे हैं।
n डिजिटल सुविधाओं से लैस होंगे पुस्तकालय : इन पुस्तकालयों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इन्हें पूर्णतः डिजिटल बनाया जा रहा है।
यहां विद्युत आपूर्ति के साथ-साथ सौर ऊर्जा और हाई-स्पीड वाई-फाई की सुविधा होगी। इससे छात्र सिविल सेवा, नीट और एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी ऑनलाइन माध्यम से कर सकेंगे। एडीओ पंचायत अभय शुक्ला के अनुसार, इन पुस्तकालयों में साहित्य, कला, खेल, कहानियों और सामान्य ज्ञान से जुड़ी लगभग दो हजार पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनकी अनुमानित लागत करीब 1.40 लाख रुपये है।
n पलायन पर लगेगी रोक, बुजुर्गों को भी मिलेगा लाभ : अक्सर संसाधनों के अभाव में ग्रामीण क्षेत्र के मेधावी छात्र शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर होते हैं। गांव में ही निशुल्क अध्ययन संसाधन मिलने से इस पलायन में भारी कमी आएगी। पुस्तकालयों में बुजुर्गों के लिए दैनिक समाचार पत्र और उपन्यासों की व्यवस्था भी की गई है।
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अब गांव के मेधावियों को यूपीएससी, नीट और एसएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहरों की ओर पलायन नहीं करना होगा, बल्कि उनके अपने गांव में ही वाई-फाई और सौर ऊर्जा से लैस डिजिटल संसाधन उपलब्ध होंगे। डिजिटल पुस्तकालय न केवल किताबों का घर होंगे, बल्कि उन सपनों की उड़ान का केंद्र बनेंगे जो अक्सर संसाधनों के अभाव में दम तोड़ देते थे। 1.40 लाख की लागत और 2000 पुस्तकों के संग्रह के साथ ये पुस्तकालय गांवों में पठन-पाठन की एक नई संस्कृति को जन्म दे रहे हैं।
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n डिजिटल सुविधाओं से लैस होंगे पुस्तकालय : इन पुस्तकालयों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इन्हें पूर्णतः डिजिटल बनाया जा रहा है।
यहां विद्युत आपूर्ति के साथ-साथ सौर ऊर्जा और हाई-स्पीड वाई-फाई की सुविधा होगी। इससे छात्र सिविल सेवा, नीट और एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी ऑनलाइन माध्यम से कर सकेंगे। एडीओ पंचायत अभय शुक्ला के अनुसार, इन पुस्तकालयों में साहित्य, कला, खेल, कहानियों और सामान्य ज्ञान से जुड़ी लगभग दो हजार पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनकी अनुमानित लागत करीब 1.40 लाख रुपये है।
n पलायन पर लगेगी रोक, बुजुर्गों को भी मिलेगा लाभ : अक्सर संसाधनों के अभाव में ग्रामीण क्षेत्र के मेधावी छात्र शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर होते हैं। गांव में ही निशुल्क अध्ययन संसाधन मिलने से इस पलायन में भारी कमी आएगी। पुस्तकालयों में बुजुर्गों के लिए दैनिक समाचार पत्र और उपन्यासों की व्यवस्था भी की गई है।