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Barabanki News: औद्योगिक इकाइयों पर छापा
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 03 Apr 2026 02:08 AM IST
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औद्योगिक इकाईयों में छापे डालकर यूरिया प्रयोग करने वाली औद्योगिक इकाईओं की जांच करते कृषि अ
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बाराबंकी। शासन के निर्देश पर डीएम ने अनुदानित यूरिया के दुरुपयोग की जांच के आदेश दिए। कृषि, उद्योग केंद्र व गन्ना विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने बृहस्पतिवार को जिले की कुल 12 औद्योगिक इकाइयों पर छापा मारा, इस दौरान एक नमूना भरकर जांच को भेजा गया।
यह जांच प्लाईवुड, पशु आहार, मुर्गी दाना, बर्तन धोने वाले साबुन, चीनी मिल अल्कोहल और डीजल एग्जॉस्ट तरल जैसे उत्पादों के निर्माण में यूरिया के कच्चे माल के रूप में उपयोग से संबंधित थी। औद्योगिक इकाइयों द्वारा नाइट्रोजन यौगिकों, तकनीकी ग्रेड यूरिया या फार्मेल्डिहाइड यूरिया के स्थान पर अनुदानित यूरिया का डायवर्जन कर प्रयोग किया जा रहा था।
इस गंभीर मामले की जांच के लिए शासन से विशेष निर्देश प्राप्त हुए थे। टीम ने सभी चिह्नित इकाइयों में यूरिया प्रयोग की गहन जांच की। निरीक्षण के दौरान नवाबगंज तहसील की दयाल उद्योग में तकनीकी ग्रेड यूरिया का बड़ा भंडार मिला। यहां 118.653 मीट्रिक टन तकनीकी ग्रेड यूरिया उपलब्ध पाया गया। टीम ने इस भंडार से एक नमूना भी लिया।
नवाबगंज तहसील में उप कृषि निदेशक धीरेंद्र सिंह और सहायक आयुक्त रेखा श्रीवास्तव ने तीन औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया। इनमें दयाल उद्योग, सत्यम उद्योग और श्याम लकड़ी शामिल थे। फतेहपुर तहसील में जिला कृषि अधिकारी राजितराम और सांख्यिकीय निरीक्षक ऐश्वर्या गिरी ने छह औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान फतेहपुर की किसी भी इकाई में अनुदानित यूरिया उर्वरक का प्रयोग नहीं पाया गया।
इसी प्रकार रामनगर तहसील में भूमि संरक्षण अधिकारी विनोद कुमार यादव और सहायक आयुक्त हरि नारायण सिंह ने दो औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया। इनमें जय अम्बे विनियर और अल्फा विनियर सुरवारी शामिल थीं, जहां अनुदानित यूरिया का प्रयोग नहीं मिला। सिरौलीगौसपुर तहसील में कोई औद्योगिक इकाई संचालित नहीं पाई गई।
रामसनेहीघाट और हैदरगढ़ में जिला कृषि रक्षा अधिकारी विजय कुमार ने एक चीनी मिल का निरीक्षण किया। इस चीनी मिल में भी अनुदानित यूरिया का प्रयोग नहीं पाया गया।
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यह जांच प्लाईवुड, पशु आहार, मुर्गी दाना, बर्तन धोने वाले साबुन, चीनी मिल अल्कोहल और डीजल एग्जॉस्ट तरल जैसे उत्पादों के निर्माण में यूरिया के कच्चे माल के रूप में उपयोग से संबंधित थी। औद्योगिक इकाइयों द्वारा नाइट्रोजन यौगिकों, तकनीकी ग्रेड यूरिया या फार्मेल्डिहाइड यूरिया के स्थान पर अनुदानित यूरिया का डायवर्जन कर प्रयोग किया जा रहा था।
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इस गंभीर मामले की जांच के लिए शासन से विशेष निर्देश प्राप्त हुए थे। टीम ने सभी चिह्नित इकाइयों में यूरिया प्रयोग की गहन जांच की। निरीक्षण के दौरान नवाबगंज तहसील की दयाल उद्योग में तकनीकी ग्रेड यूरिया का बड़ा भंडार मिला। यहां 118.653 मीट्रिक टन तकनीकी ग्रेड यूरिया उपलब्ध पाया गया। टीम ने इस भंडार से एक नमूना भी लिया।
नवाबगंज तहसील में उप कृषि निदेशक धीरेंद्र सिंह और सहायक आयुक्त रेखा श्रीवास्तव ने तीन औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया। इनमें दयाल उद्योग, सत्यम उद्योग और श्याम लकड़ी शामिल थे। फतेहपुर तहसील में जिला कृषि अधिकारी राजितराम और सांख्यिकीय निरीक्षक ऐश्वर्या गिरी ने छह औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान फतेहपुर की किसी भी इकाई में अनुदानित यूरिया उर्वरक का प्रयोग नहीं पाया गया।
इसी प्रकार रामनगर तहसील में भूमि संरक्षण अधिकारी विनोद कुमार यादव और सहायक आयुक्त हरि नारायण सिंह ने दो औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया। इनमें जय अम्बे विनियर और अल्फा विनियर सुरवारी शामिल थीं, जहां अनुदानित यूरिया का प्रयोग नहीं मिला। सिरौलीगौसपुर तहसील में कोई औद्योगिक इकाई संचालित नहीं पाई गई।
रामसनेहीघाट और हैदरगढ़ में जिला कृषि रक्षा अधिकारी विजय कुमार ने एक चीनी मिल का निरीक्षण किया। इस चीनी मिल में भी अनुदानित यूरिया का प्रयोग नहीं पाया गया।