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Barabanki News: कोर्ट ने कहा, तहसीलदार को कोई विधिक ज्ञान नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 25 Mar 2026 01:49 AM IST
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बाराबंकी। हैदरगढ़ के तहसीलदार ने एक भरण-पोषण मामले में पारिवारिक न्यायालय को मौखिक संपत्ति बिक्री की भ्रामक आख्या दी। इस पर अपर प्रधान न्यायाधीश प्रथम सत्येंद्र पांडेय ने नाराजगी व्यक्त करते हुए डीएम को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। जज ने तहसीलदार की आख्या पर नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि तहसीलदार को कोई विधिक ज्ञान नहीं है। विधिक रूप से मौखिक विक्रय का कोई महत्व नहीं होता है। एक जिम्मेदार लोक सेवक से ऐसी आख्या घोर आपत्तिजनक है। यह तहसीलदार की विधिक अज्ञानता को दर्शाती है।
वादी महिला सविता देवी का करीब तीन लाख 12 हजार रुपये का गुजारा भत्ता धनराशि अगस्त 2022 से बकाया है। पारिवारिक न्यायालय ने संपत्ति कुर्क कर महिला को यह धनराशि दिलाने का आदेश 12 जून 2024 को डीएम को दिया था। इस आदेश के अनुपालन में तहसीलदार हैदरगढ़ ने 18 मार्च 2025 को पहली आख्या प्रस्तुत की। इसमें कहा गया कि विपक्षी की कोठी थाने के इनायतपुर मजरे सादुल्लापुर गांव में कोई चल-अचल संपत्ति नहीं है। आबादी के मकान में मां और खेत के मकान में भाई रहता है। बकाएदार का कोई अंश नहीं है। इससे पहले 17 फरवरी 2025 के आदेश के क्रम में तहसीलदार ने छह जून 2025 को दूसरी भ्रामक आख्या दी। इस आख्या में बताया गया कि विपक्षी प्रिंस ने अपना हिस्सा भाई आशीष कुमार को मौखिक रूप से बेच दिया है।
न्यायालय का जांच आदेश
न्यायालय ने इसे विपक्षी को जानबूझकर बचाने का प्रयास माना है। कोर्ट ने डीएम को इस मामले में तहसीलदार की भूमिका जांच कराने का आदेश दिया है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि न्यायालय के आदेश का अनुपालन क्यों नहीं हुआ। डीएम को अगले माह 24 अप्रैल 2026 को न्यायालय पर आख्या प्रस्तुत करनी है।
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वादी महिला सविता देवी का करीब तीन लाख 12 हजार रुपये का गुजारा भत्ता धनराशि अगस्त 2022 से बकाया है। पारिवारिक न्यायालय ने संपत्ति कुर्क कर महिला को यह धनराशि दिलाने का आदेश 12 जून 2024 को डीएम को दिया था। इस आदेश के अनुपालन में तहसीलदार हैदरगढ़ ने 18 मार्च 2025 को पहली आख्या प्रस्तुत की। इसमें कहा गया कि विपक्षी की कोठी थाने के इनायतपुर मजरे सादुल्लापुर गांव में कोई चल-अचल संपत्ति नहीं है। आबादी के मकान में मां और खेत के मकान में भाई रहता है। बकाएदार का कोई अंश नहीं है। इससे पहले 17 फरवरी 2025 के आदेश के क्रम में तहसीलदार ने छह जून 2025 को दूसरी भ्रामक आख्या दी। इस आख्या में बताया गया कि विपक्षी प्रिंस ने अपना हिस्सा भाई आशीष कुमार को मौखिक रूप से बेच दिया है।
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न्यायालय का जांच आदेश
न्यायालय ने इसे विपक्षी को जानबूझकर बचाने का प्रयास माना है। कोर्ट ने डीएम को इस मामले में तहसीलदार की भूमिका जांच कराने का आदेश दिया है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि न्यायालय के आदेश का अनुपालन क्यों नहीं हुआ। डीएम को अगले माह 24 अप्रैल 2026 को न्यायालय पर आख्या प्रस्तुत करनी है।
