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Barabanki News: आपदा में जान बचाने वाले वीरों को खोजेगा शिक्षा विभाग
Mon, 17 Aug 2026 10:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 17 Aug 2026 10:59 PM IST
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बाराबंकी। आपदा के वक्त जो हाथ जिंदगी बचाते हैं, उन्हें अब देश सलाम करेगा। मुसीबत में ढाल बनने वाले जुझारू लोगों और संस्थाओं की खोज शुरू हो गई है। केंद्र सरकार के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने जिले के सभी स्कूलों को पत्र जारी किया है। विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वह विद्यार्थियों को जागरूक करें और क्षेत्र के योग्य नायकों को चिह्नित कर उनका नामांकन कराएं।
यह सम्मान हर साल 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर घोषित होता है। आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन हैं और पोर्टल पर साल भर नामांकन खुले रहते हैं। इसमें खुद के साथ किसी अन्य योग्य व्यक्ति या संस्था का (थर्ड-पार्टी) नामांकन भी किया जा सकता है।
आपदा से बचाव, राहत, पुनर्वास, अनुसंधान और नवाचार में जुटे व्यक्ति, एनजीओ, नागरिक समाज संगठन, शैक्षणिक संस्थान व निजी संगठन इसके पात्र हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन प्राप्त होने के बाद सबसे पहले जिला स्तर पर आवेदनों की जांच और छंटनी की जाती है। इसके बाद मंडल व राज्य स्तर से संस्तुति होकर मामले गृह मंत्रालय की उच्चस्तरीय समिति के पास भेजे जाते हैं, जहां अंतिम विजेताओं का चयन होता है।
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आपदा प्रबंधन में निस्वार्थ सेवा देने वालों को भारत सरकार यह पुरस्कार देती है। इसके तहत संस्थागत श्रेणी में विजेता को प्रमाणपत्र के साथ 51 लाख और व्यक्तिगत श्रेणी में प्रमाणपत्र व पदक के साथ पांच लाख की नकद राशि दी जाती है।डीआईओएस अमिता सिंह ने बताया कि आपदा प्रबंधन और जोखिम कम करने में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए यह पहल की गई है। जिले के सभी विद्यालय इसका प्रचार-प्रसार करें ताकि जिले से भी योग्य दावेदारों के नाम सामने आ सकें।
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यह सम्मान हर साल 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर घोषित होता है। आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन हैं और पोर्टल पर साल भर नामांकन खुले रहते हैं। इसमें खुद के साथ किसी अन्य योग्य व्यक्ति या संस्था का (थर्ड-पार्टी) नामांकन भी किया जा सकता है।
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आपदा से बचाव, राहत, पुनर्वास, अनुसंधान और नवाचार में जुटे व्यक्ति, एनजीओ, नागरिक समाज संगठन, शैक्षणिक संस्थान व निजी संगठन इसके पात्र हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन प्राप्त होने के बाद सबसे पहले जिला स्तर पर आवेदनों की जांच और छंटनी की जाती है। इसके बाद मंडल व राज्य स्तर से संस्तुति होकर मामले गृह मंत्रालय की उच्चस्तरीय समिति के पास भेजे जाते हैं, जहां अंतिम विजेताओं का चयन होता है।
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आपदा प्रबंधन में निस्वार्थ सेवा देने वालों को भारत सरकार यह पुरस्कार देती है। इसके तहत संस्थागत श्रेणी में विजेता को प्रमाणपत्र के साथ 51 लाख और व्यक्तिगत श्रेणी में प्रमाणपत्र व पदक के साथ पांच लाख की नकद राशि दी जाती है।डीआईओएस अमिता सिंह ने बताया कि आपदा प्रबंधन और जोखिम कम करने में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए यह पहल की गई है। जिले के सभी विद्यालय इसका प्रचार-प्रसार करें ताकि जिले से भी योग्य दावेदारों के नाम सामने आ सकें।