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Barabanki News: अभावों को मात देकर मेधावियों ने पाई कामयाबी

संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Tue, 31 Mar 2026 01:57 AM IST
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The meritorious students achieved success by overcoming the difficulties.
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बाराबंकी। पीसीएस-2024 के परीक्षा परिणामों में बाराबंकी के 10 से अधिक मेधावियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इनमें ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं का दबदबा रहा है। किसानों व आशा कार्यकर्ता के बच्चों ने जहां संघर्ष से सफलता की इबारत लिखी है वहीं शिक्षिका ने एसडीएम बनकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
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किसान का बेटा बना जिला विपणन अधिकारी
रामनगर क्षेत्र के सरसवा गांव निवासी सत्येंद्र प्रताप सिंह ऊर्फ विपुल पहले प्रयास में 545वीं रैंक पाकर जिला खाद्य विपणन अधिकारी बने हैं। इनके पिता योगेंद्र सिंह किसान हैं, जबकि मां रमा सिंह गृहिणी हैं। बड़े भाई अपुल सिंह चुनाव आयोग में कनिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि भाभी उमा सिंह पुलिस विभाग में सिपाही हैं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सूरतगंज के निजी इंटर कॉलेज से की। ग्रेजुएशन रामनगर पीजी कॉलेज से किया है। सत्येंद्र ने बताया कि सेल्फ स्टडी सफलता का मंत्र है।
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जमीन बेचकर मां ने पढ़ाया, सिद्धार्थ बने नायब तहसीलदार
हैदरगढ़ तहसील क्षेत्र के मकनपुर गांव निवासी सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने 246वीं रैंक हासिल कर नायब तहसीलदार बन गए हैं। सिद्धार्थ के पिता आदित्य नरायन श्रीवास्तव का चार साल पहले निधन हो गया था जबकि मां आशा कार्यकर्ता हैं। सिद्धार्थ के दो बड़े भाई हैं जो प्राइवेट नाैकरी करते हैं। इन सबकी पढ़ाई के दौरान पैसे की कमी होने के कारण मां को डेढ़ बीघा जमीन भी बेच दी थी। लेखपाल चयन परीक्षा में कुछ नंबरों से चूके थे मगर आज वे नायब तहसीलदार बनकर क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया। सिद्धार्थ ने बताया कि पिता का सपना था कि अधिकारी बने। इसलिए मन लगाकर सेल्फ स्टडी की।


30वीं रैंक लाकर शिक्षिका से एसडीएम बन गई कृतिका
देवा ब्लॉक के मुरादाबाद गांव के कंपोजिट विद्यालय में सहायक पद पर तैनात कृतिका चौधरी ने पीसीएस परीक्षा में 30वीं रैंक लाकर एसडीएम बनी हैं। लखनऊ के इंदिरानगर निवासी कृतिका ने बताया कि पिता डाक विभाग में कर्मचारी व मां गृहणी हैं। तीन बहनों में वह दूसरे नंबर पर हैं। बड़ी बहन इलाहाबाद कोर्ट में समीक्षा अधिकारी हैं जबकि छोटी बहन नीट की तैयारी कर रही है। वर्ष 2020 में बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी मिलने के बाद पीसीएस की तैयारी जारी रखी। कृतिका ने बताया कि पढ़ाने के साथ वे बाकी सारा समय परीक्षा की तैयारी करती रहीं।


15 साल नेवी में रहकर अब एसडीएम बने विनय
सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के भवानीगंज निवासी राजस्व विभाग के सेवानिवृत ऑडिटर बलदेव यादव के पुत्र विनय कुमार यादव ने पीसीएस परीक्षा में 33वीं रैंक पाकर एसडीएम बने हैं। 2006 से 2021 तक भारतीय नेवी में कार्यरत रहे। सेवानिवृत होने पर अयोध्या में रहकर फिर पढ़ाई शुरू की। परिवार में छोटे भाई आलोक यादव मेडिकल कॉलेज में मेडिकल काउंसलर हैं। विनय एक पुत्री के पिता भी हैं।


जैदपुर की प्रिया बनी पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी
कस्बा जैदपुर की प्रिया शर्मा का चयन जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी के पद पर हुआ है। पिता मदन मोहन शर्मा एक सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, जबकि माता मंजू देवी शर्मा गृहिणी हैं। प्रिया कस्बे की पहली महिला हैं जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। एमएससी की डिग्री हासिल कर वर्ष 2015 से उन्होंने शिक्षण कार्य शुरू कर पीसीएस की तैयारी प्रारंभ की। प्रिया ने बताया कि उन्होंने रटने की बजाय चीजों को समझना शुरू किया। माता पिता व भाई बहन के सहयोग से मेहनत का फल मिला।


किसान की बेटी प्रतिमा बन गई नायब तहसीलदार
सिरौलीगौसपुर की तराई में सरयू नदी के किनारे पर बसे शेषपुर टूटरु गांव के किसान राकेश सिंह की बेटी प्रतिमा सिंह ने दूसरी बार में 54वी रैंक पाकर नायब तहसीलदार बनी। पिता राकेश सिंह ने बताया कि बेटी हाईस्कूल व इंटर में मेरिट पर आई थीं। पूरे परिवार का भरण पोषण खेती से होता है। बेटी ने नाम रोशन किया, इससे बड़ा सुख का अनुभव भला और कौन हो सकता है।


पूरा परिवार शिक्षक, अब कौटिल्य निशांत बने असिस्टेंट कमिश्नर
रामनगर के हथोईया गांव के कौटिल्य निशांत शुक्ला का चयन असिस्टेंट कमिश्नर व्यापार कर के पद पर हुआ है। इनके पिता ने डा. कौशल किशोर शुक्ला लखनऊ केकेसी स्नाकोत्तर महाविद्यालय में प्राचार्य है तो मां रानी शुक्ला गृहिणी है। चाचा कृष्ण कुमार शुक्ला एवं चाची रेखा शुक्ला शिक्षक है। एक अन्य चाचा डॉ. राजेश कुमार शुक्ल गोविंद बल्लभ पंत विश्वविद्यालय में प्रोफेसर है। छोटी चाची नंदिनी शुक्ला जीआईसी में प्रधानाचार्य के दायित्व का निर्वहन कर रही है।


प्रधानाध्यापक रामानुज अब बन गए नायब तहाीलदार
मूल रूप से हरदोई के निवासी वर्तमान में लखनऊ में रह रहे रामानुज पांडेय 11 साल पहले बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक बने थे। बाराबंकी के निंदूरा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय खंडसरा में प्रधानाध्यापक हैं। पीसीएस परीक्षा में 61 रैंक पाकर रामानुज नायब तहसीलदार बने है। इनके 11 व नौ साल के दो बच्चे हैं। पिता सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी हैं।

बीडीओ बने अनुपम, पिता हैं किसान
फतेहपुर क्षेत्र के नंदना कला गांव निवासी किसान अनुपम वर्मा के पुत्र आकाश वर्मा का चयन बीडीओ पद पर हुआ है। आकाश ने हाई स्कूल की पढ़ाई क्षेत्र में ही की। इंटर करने श्री साई इंटर कॉलेज बाराबंकी आए जबकि बीए की पढ़ाई श्याम मनोहर डिग्री कॉलेज पकरियापुर फतेहपुर से की।


किसान की बिटिया प्रियंका बन गई नायब तहसीलदार
मसौली के मुबारकपुर गांव के किसान दिनेश कुमार वर्मा की पुत्री प्रियंका वर्मा का चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ है। शहर के श्री साई इंटर कॉलेज से 2018 में इंटर करने के बाद ही परीक्षा की तैयारी शुरू की थी। इनकी एक बड़ी बहन व छोटा भाई है। मां फार्मासिस्ट हैं।
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