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Barabanki News: निधन के दो साल बाद तक पेंशन, कोषाधिकारी संग दो पर परिवाद दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 11 Jan 2026 09:47 PM IST
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बाराबंकी। निधन के दो साल बाद तक पेंशन लेने का मामला सामने आया है। मृतक के पौत्र ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी देकर तत्कालीन वरिष्ठ कोषाधिकारी व अपने चाचा पर यह गंभीर आरोप लगाए हैं। अदालत ने दोनों पर परिवाद दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के बाद पेंशन विभाग और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
याचिकाकर्ता सुशील कुमार ने अदालत को बताया कि उनके पिता तीन भाई थे लल्लू राम, तुलसीराम और श्यामलाल। सुशील के अनुसार उनके पिता लल्लू राम और चाचा तुलसीराम की मृत्यु पहले ही हो चुकी है, जबकि उनके बाबा बृजलाल भारतीय सैनिक विभाग के पेंशनभोगी थे और उन्हें कोषागार से पेंशन मिलती थी। बाबा का निधन 15 अगस्त 1991 को उनके घर पर हुआ था। बाबा बृजलाल के मृत्यु प्रमाणपत्र की मूल प्रति उनके पास मौजूद है। सुशील ने अदालत को बताया कि बाबा की मृत्यु के बाद भी चाचा श्यामलाल ने कथित रूप से वरिष्ठ कोषाधिकारी की मदद से पूरी पेंशन लेना जारी रखा और विभाग को मृत्यु की कोई सूचना नहीं दी। अर्जी में यह भी कहा गया है कि 12 अप्रैल 1994 को बृजलाल की बकाया पूरी पेंशन निकाल ली गई। चौंकाने वाला आरोप यह है कि जब सुशील ने दस्तावेज मांगे तो कोषाधिकारी ने बाबा बृजलाल की मृत्यु की तिथि आठ अगस्त 1993 दर्ज कर दी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा सिंह ने प्रकरण को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने संबंधित पत्रावली दो फरवरी 2026 को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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याचिकाकर्ता सुशील कुमार ने अदालत को बताया कि उनके पिता तीन भाई थे लल्लू राम, तुलसीराम और श्यामलाल। सुशील के अनुसार उनके पिता लल्लू राम और चाचा तुलसीराम की मृत्यु पहले ही हो चुकी है, जबकि उनके बाबा बृजलाल भारतीय सैनिक विभाग के पेंशनभोगी थे और उन्हें कोषागार से पेंशन मिलती थी। बाबा का निधन 15 अगस्त 1991 को उनके घर पर हुआ था। बाबा बृजलाल के मृत्यु प्रमाणपत्र की मूल प्रति उनके पास मौजूद है। सुशील ने अदालत को बताया कि बाबा की मृत्यु के बाद भी चाचा श्यामलाल ने कथित रूप से वरिष्ठ कोषाधिकारी की मदद से पूरी पेंशन लेना जारी रखा और विभाग को मृत्यु की कोई सूचना नहीं दी। अर्जी में यह भी कहा गया है कि 12 अप्रैल 1994 को बृजलाल की बकाया पूरी पेंशन निकाल ली गई। चौंकाने वाला आरोप यह है कि जब सुशील ने दस्तावेज मांगे तो कोषाधिकारी ने बाबा बृजलाल की मृत्यु की तिथि आठ अगस्त 1993 दर्ज कर दी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा सिंह ने प्रकरण को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने संबंधित पत्रावली दो फरवरी 2026 को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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