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Barabanki News: डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा महिला अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 04 Apr 2026 01:54 AM IST
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बाराबंकी। जिला महिला अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। इससे सबसे ज्यादा दिक्कत प्रसूताओं को हो रही है, जिन्हें बेहतर इलाज की सुविधा नहीं मिल पाती है। कभी-कभार तो स्थिति इतनी ज्यादा गंभीर हो जाती है कि प्रसूताओं को रेफर करना मजबूरी बन जाता है।
जिला महिला अस्पताल में डॉक्टरों के 18 पद स्वीकृति हैं लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ सात डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें स्त्रीरोग के तीन, ईएमओ के छह, बालरोग के तीन, पैथोलॉजिस्ट के एक, रेडियोलॉजिस्ट के एक, एनेस्थेसिस्ट के तीन, चिकित्सा अधीक्षक का एक पद स्वीकृत है। ईएमओ के छह और बेहोशी तीन, चिकित्सा अधीक्षक और पैथोलॉजिस्ट का पद खाली पड़ा हुआ है।
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 250 से 300 प्रसूताएं इलाज के लिए आती हैं। यहीं पर प्रतिदिन 20 से 25 प्रसव ऑपरेशन से और 15 से 20 प्रसव सामान्य कराए जाते हैं। यहां पर केवल तीन स्त्रीरोग विशेषज्ञ तैनात हैं, जिनके कंधे पर पूरे अस्पताल का भार है। इनमें से एक भी चिकित्सक अवकाश पर जाता है तो पूरी व्यवस्था पटरी से ही उतर जाती है।
ईएमओ और बेहोशी की डॉक्टर न होने से दिक्कतें हो रही हैं। समस्या को दूर करने के लिए समय-समय पर शासन को पत्र भी लिखा जाता है। हाल ही में बेहोशी के दो चिकित्सकों की तैनाती हुई थी लेकिन वह आए ही नहीं।
डॉ. प्रदीप कुमार, सीएमएस महिला अस्पताल
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एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा एसएनसीयू
सिरौलीगौसपुर। स्थानीय संयुक्त चिकित्सालय के एसएनसीयू में डॉक्टरों की कमी से संचालन प्रभावित हो रहा है। दो डॉक्टरों के तबादले के एक माह बाद भी नए डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई है। वर्तमान में यह 24 घंटे की इमरजेंसी सुविधा केवल एक डॉक्टर के सहारे चल रही है।
इस स्थिति से नवजात शिशुओं की देखभाल में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। 100 बेड वाले इस अस्पताल में एसएनसीयू की स्थापना वर्ष 2024 में हुई थी। स्थापना के समय डॉ. सीपी कनौजिया, डॉ. संयुक्ता गुप्ता और डॉ. शिवम जायसवाल तैनात थे। इन तीनों डॉक्टरों पर नवजात शिशुओं की चौबीसों घंटे देखभाल की जिम्मेदारी थी। अब डॉ. संयुक्ता गुप्ता और डॉ. सीपी कनौजिया का तबादला हो चुका है। उनके तबादले को एक माह बीत गया है, लेकिन नए डॉक्टर नहीं आए हैं।
ऐसे में डॉ. शिवम जायसवाल अकेले ही पूरी इमरजेंसी सुविधा संभाल रहे हैं। सीएमएस डॉ. एके प्रियदर्शी ने बताया कि उच्च अधिकारियों को इस स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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जिला महिला अस्पताल में डॉक्टरों के 18 पद स्वीकृति हैं लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ सात डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें स्त्रीरोग के तीन, ईएमओ के छह, बालरोग के तीन, पैथोलॉजिस्ट के एक, रेडियोलॉजिस्ट के एक, एनेस्थेसिस्ट के तीन, चिकित्सा अधीक्षक का एक पद स्वीकृत है। ईएमओ के छह और बेहोशी तीन, चिकित्सा अधीक्षक और पैथोलॉजिस्ट का पद खाली पड़ा हुआ है।
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जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 250 से 300 प्रसूताएं इलाज के लिए आती हैं। यहीं पर प्रतिदिन 20 से 25 प्रसव ऑपरेशन से और 15 से 20 प्रसव सामान्य कराए जाते हैं। यहां पर केवल तीन स्त्रीरोग विशेषज्ञ तैनात हैं, जिनके कंधे पर पूरे अस्पताल का भार है। इनमें से एक भी चिकित्सक अवकाश पर जाता है तो पूरी व्यवस्था पटरी से ही उतर जाती है।
ईएमओ और बेहोशी की डॉक्टर न होने से दिक्कतें हो रही हैं। समस्या को दूर करने के लिए समय-समय पर शासन को पत्र भी लिखा जाता है। हाल ही में बेहोशी के दो चिकित्सकों की तैनाती हुई थी लेकिन वह आए ही नहीं।
डॉ. प्रदीप कुमार, सीएमएस महिला अस्पताल
एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा एसएनसीयू
सिरौलीगौसपुर। स्थानीय संयुक्त चिकित्सालय के एसएनसीयू में डॉक्टरों की कमी से संचालन प्रभावित हो रहा है। दो डॉक्टरों के तबादले के एक माह बाद भी नए डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई है। वर्तमान में यह 24 घंटे की इमरजेंसी सुविधा केवल एक डॉक्टर के सहारे चल रही है।
इस स्थिति से नवजात शिशुओं की देखभाल में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। 100 बेड वाले इस अस्पताल में एसएनसीयू की स्थापना वर्ष 2024 में हुई थी। स्थापना के समय डॉ. सीपी कनौजिया, डॉ. संयुक्ता गुप्ता और डॉ. शिवम जायसवाल तैनात थे। इन तीनों डॉक्टरों पर नवजात शिशुओं की चौबीसों घंटे देखभाल की जिम्मेदारी थी। अब डॉ. संयुक्ता गुप्ता और डॉ. सीपी कनौजिया का तबादला हो चुका है। उनके तबादले को एक माह बीत गया है, लेकिन नए डॉक्टर नहीं आए हैं।
ऐसे में डॉ. शिवम जायसवाल अकेले ही पूरी इमरजेंसी सुविधा संभाल रहे हैं। सीएमएस डॉ. एके प्रियदर्शी ने बताया कि उच्च अधिकारियों को इस स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

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