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Bareilly News: चार दशक से शोध का विषय बने हैं आला हजरत

Sun, 02 Aug 2026 01:45 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Sun, 02 Aug 2026 01:45 AM IST
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Ala Hazrat has been a subject of research for four decades.
बरेली। आला हजरत का व्यक्तित्व अकादमिक जगत में भी अध्ययन और शोध का विषय रहा है। उनके इस्लामी न्यायशास्त्र, फतवा, नातिया शायरी, तसव्वुफ, उर्दू साहित्य और धार्मिक सुधारों पर भारत समेत कई देशों के विश्वविद्यालयों में शोध किए गए हैं। जानकारों के अनुसार, आज भी उनके साहित्य और विचारों पर अध्ययन जारी है।
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वर्ष 1979 में पटना विश्वविद्यालय में डा. हसन रजा ने आला हजरत के इस्लामी न्यायशास्त्र पर पहला शोध किया था। वर्ष 1990 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क में डाॅ. ऊषा सान्याल ने ‘ब्रिटिश भारत में धार्मिक आस्था और राजनीति’ के संदर्भ में उनके योगदान का अध्ययन किया। वर्ष 1992 से 2003 के बीच काशी हिंदू विश्वविद्यालय, रुहेलखंड विवि, कानपुर विवि, वीर कुंवर सिंह विवि, मैसूर विवि, रांची विवि, कराची विवि और सिंध विवि सहित अन्य संस्थानों में आला हजरत पर आधारित शोध हुए।
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, उस्मानिया यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन के बर्मिंघम विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों में भी उनके विभिन्न पहलुओं पर शोध होने का उल्लेख है।
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नई पीढ़ी के शोधार्थियों के लिए भी प्रासंगिक हैं आला हजरत के विचार

दरगाह के प्रवक्ता नासिर कुरैशी के अनुसार, आला हजरत के विचार और साहित्य पर आज भी शोधार्थी अध्ययन कर रहे हैं। यही वजह है कि उनकी रचनाएं धार्मिक, साहित्यिक और सामाजिक विमर्श के लिए आज भी महत्वपूर्ण और प्रासांगिक हैं।
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