UPSC Result 2025: बरेली की सुरभि यादव ने पाई 14वीं रैंक, चौथे प्रयास में लिखी सफलता की कहानी
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में बरेली की सुरभि यादव ने सफलता का परचम लहराया है। उन्होंने 14वीं रैंक प्राप्त की है। इनके अलावा जिले के उत्कर्ष मिश्रा की 337वीं और मिनहाज शकील को 513वीं रैंक मिली है।
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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में बरेली जिले के तीन युवाओं ने सफलता प्राप्त की है। बजरंग एन्क्लेव में रहने वाली सुरभि यादव ने अखिल भारतीय स्तर पर 14वीं रैंक प्राप्त की है। जीजीआईसी रोड स्थित कॉलोनी निवासी उत्कर्ष मिश्रा ने 337वीं व रिछा के मिनहाज शकील ने 513वीं रैंक हासिल की है।
25 वर्षीय सुरभि इस समय दिल्ली में केंद्र सरकार के माय भारत के उपनिदेशक पद पर कार्यरत हैं। इस पद पर उन्होंने जनवरी में ही ज्वाइन किया है। सुरभि ने बताया कि उनकी स्कूली शिक्षा अलग-अलग स्कूलों से हुई। शुरू से ही आईएएस बनने की ठानी थी, इसलिए ग्यारहवीं में मानविकी के विषय चुने। इसके बाद दिल्ली से बीए हिस्ट्री ऑनर्स से किया है।
सिविल सेवा की तैयारी के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया का बैच ज्वॉइन किया। उन्होंने बताया कि चौथे प्रयास में उन्हें यह सफलता हासिल हुई। इससे पहले 2024 में प्रीलिम्स ही क्वालीफाई नहीं हुआ था। 2023 में सभी पड़ाव पार कर लिए। प्रतिभा सेतु पोर्टल के माध्यम से उन्हें युवा कल्याण एवं खेल मंत्रालय के माय भारत के तहत उपनिदेशक के पद पर चयनित किया गया।
मां के छलके खुशी के आंसू
सुरभि ने बताया कि जब उन्होंने अपने चयन की बात अपने घर पर बताई तो मां की आंखों से आंसू छलक आए। पिता राकेश यादव भी भावुक हो गए। सुरभि के पिता पुलिस विभाग में वाराणसी में कार्यरत हैं। वह बताती हैं कि कभी समय देखकर नहीं बल्कि लक्ष्य निर्धारित करके तैयारी करनी चाहिए।
19 लाख का पैकेज छोड़ा, पांचवें प्रयास में उत्कर्ष को मिली सफलता
जीजीआईसी के होलिका मंदिर के पास रहने वाले उत्कर्ष मिश्रा ने यूपीएससी 2025 की परीक्षा में 337वीं रैंक प्राप्त की है। उनका यह पांचवां प्रयास रहा। अपने परिवार से यूपीएससी की परीक्षा पास करने वाले वह पहले व्यक्ति हैं। वह बताते हैं कि आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग के बाद इंडियन ऑयल कंपनी में जॉब कर रहे थे। इस दौरान कई अधिकारियों के साथ मुंबई व हैदराबाद कार्य करने का अवसर मिला, तब लगा कि लोगों के साथ और जुड़कर काम करना चाहिए। तब से यूपीएससी को अपना लक्ष्य बना लिया। उन्होंने 19 लाख का पैकेज छोड़कर 2021 से तैयारी करनी शुरू की। चार बार असफल हुए, मगर हार नहीं मानी।
उन्होंने बताया कि पिता चंद्रेश कुमार मिश्रा घर के पास ही कोचिंग पढ़ाते हैं। घर में हमेशा पठन-पाठन का माहौल मिला। मां गृहिणी हैं। भाई आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग करने के बाद एक निजी कंपनी में सिविल इंजीनियर हैं। उन्होंने बताया कि सबसे मुश्किल मुख्य परीक्षा रही। इसमें उत्तर लेखन में कठिनाई आई। ऑनलाइन ही तैयारी की। अभी इस रैंक से संतुष्ट नहीं हूं। आगे रैंक बढ़ाने के लिए भी और प्रयास करूंगा।
रिछा के मिनहाज को 513वीं रैंक
रिछा कस्बे के रहने वाले मिनहाज शकील को 513वीं रैंक मिली है। उनके पिता एडवोकेट शकील गुरु बहेड़ी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे हैं। परिजनों ने बताया कि रिछा कस्बे से यूपीएससी उत्तीर्ण करने वाले मिनहाज पहले युवा हैं। उन्होंने पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई रिछा व बहेड़ी में ही की है। कक्षा छह से 11 तक की पढ़ाई अलीगढ़ से करने के बाद 12वीं की परीक्षा कोटा से उत्तीर्ण की है। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की। इसके बाद नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी की।
