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UP: 7 साल की मासूम से दरिंदगी के बाद छोटी बहन को क्रूरता से मारा; चकनाचूर हुई सिर की हड्डी; दोषी को मृत्युदंड
अमर उजाला नेटवर्क, शाहजहांपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 01 Nov 2025 02:44 PM IST
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सार
शाहजहांपुर में मासूम से दुष्कर्म और बहन की हत्या के मामले में सजा सुनाते हुए अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं विश्वास तोड़तीं हैं... इसलिए अभिभावक बच्चों को बाहर जाने देने में संकोच करते हैं। कोर्ट ने कहा कि दोषी ने लोगों और समाज के विश्वास को तोड़ दिया।
harassment case
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मासूम बच्ची से दुष्कर्म और छोटी बहन की हत्या के मामले में दोषी अनिल उर्फ चमेली को मृत्युदंड देते हुए अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐसी घटनाएं समाज के विश्वास को तोड़ती हैं। यही वजह है कि माता-पिता बच्चों को किसी परिचित के साथ भी भेजने में संकोच करते हैं। ऐसे में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषी ने सात वर्ष की मासूम से दुष्कर्म के बाद उसके सिर पर जान से मारने के लिए खंती से प्रहार किया। इसके बाद अपना अपराध छिपाने के लिए उसकी छोटी बहन के सिर पर इतनी क्रूरता से प्रहार किया कि उसके सिर और बाईं ओर आंख के नीचे की हड्डी टूट गई।
केवल अपनी हवस के लिए दोषी का आचरण अत्यधिक क्रूर और निर्दयी था। पीड़िताएं निर्दोष, असहाय थीं। दोषी अक्सर गांव के बच्चों को खाने के लिए शहद देता था। इसीलिए पीड़िताएं बिस्कुट और शहद के लालच में उसके साथ चली गई थीं। दोषी ने घटना बिना किसी प्रकोपन के सुनियोजित, अत्यंत जघन्य और क्रूर तरीके से की।
अदालत ने कहा कि पीड़िताओं के साथ ही गांव के अन्य लोग भी दोषी पर विश्वास करते थे, क्योंकि वह अक्सर गांव में आता-जाता रहता था। इस वजह से जब उन लोगों ने उसे दोनों पीड़िताओं को ले जाते हुए देखा तो किसी ने विरोध नहीं किया।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषी ने सात वर्ष की मासूम से दुष्कर्म के बाद उसके सिर पर जान से मारने के लिए खंती से प्रहार किया। इसके बाद अपना अपराध छिपाने के लिए उसकी छोटी बहन के सिर पर इतनी क्रूरता से प्रहार किया कि उसके सिर और बाईं ओर आंख के नीचे की हड्डी टूट गई।
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केवल अपनी हवस के लिए दोषी का आचरण अत्यधिक क्रूर और निर्दयी था। पीड़िताएं निर्दोष, असहाय थीं। दोषी अक्सर गांव के बच्चों को खाने के लिए शहद देता था। इसीलिए पीड़िताएं बिस्कुट और शहद के लालच में उसके साथ चली गई थीं। दोषी ने घटना बिना किसी प्रकोपन के सुनियोजित, अत्यंत जघन्य और क्रूर तरीके से की।
अदालत ने कहा कि पीड़िताओं के साथ ही गांव के अन्य लोग भी दोषी पर विश्वास करते थे, क्योंकि वह अक्सर गांव में आता-जाता रहता था। इस वजह से जब उन लोगों ने उसे दोनों पीड़िताओं को ले जाते हुए देखा तो किसी ने विरोध नहीं किया।
दोषी के इस कृत्य से समाज में इस प्रकार के विश्वास की भी कमी आएगी कि कोई व्यक्ति अपने बच्चे को किसी परिचित के साथ भेजने में भी संकोच करेगा। ऐसा करने से समाज में वृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे बच्चों का सामाजिक एवं मानसिक विकास विपरीत रूप से प्रभावित होगा।
'एक पिता से उसकी बेटी को हमेशा के लिए अलग कर दिया'
दोषी ने एक मां की गोद को उजाड़ा है, एक भाई से उसकी बहन को छीना है तथा एक पिता से उसकी बेटी को हमेशा के लिए अलग कर दिया है। बच्ची बड़ी होकर समाज में कितना बड़ा योगदान दे सकती थी, दोषी ने समाज को उससे भी वंचित किया है। सात वर्ष की बच्ची से दुष्कर्म के अपराध ने समाज को भी कलंकित करने का कार्य किया है।
दोषी ने एक मां की गोद को उजाड़ा है, एक भाई से उसकी बहन को छीना है तथा एक पिता से उसकी बेटी को हमेशा के लिए अलग कर दिया है। बच्ची बड़ी होकर समाज में कितना बड़ा योगदान दे सकती थी, दोषी ने समाज को उससे भी वंचित किया है। सात वर्ष की बच्ची से दुष्कर्म के अपराध ने समाज को भी कलंकित करने का कार्य किया है।
जिस बच्ची ने अभी जमीन पर कदम रखे ही थे और जिसके अभी खेलने-कूदने की उम्र थी, उसके साथ दोषी के यौन अपराध ने उसके सारे सपनों को चकनाचूर कर दिया तथा उसके मां-बाप के भी सारे अरमानों को कुचल दिया है। हम जिस समाज में रह रहे हैं, उस समाज में ऐसी परिकल्पना भी नहीं की जा सकती है।
ऐसी घटनाओं से ही भयभीत होकर वर्तमान समाज में मां-बाप अपने बच्चों को खेलने के लिए घर से निकलने पर प्रतिबंध लगाते हैं। यदि इस प्रकार की घटनाएं समाज में घटित होती रहेंगी तो निर्दोष और असहाय बच्चों का बचपन ही छिन जाएगा। निश्चित तौर पर ऐसी घटनाएं सामाजिक चेतना को भी विपरीत रूप से प्रभावित करती हैं। अदालत ने मुम्बई हाईकोर्ट के वर्ष 2021 के एक फैसले में टिप्पणी के दौरान कही गई कविता का भी उल्लेख किया है
‘गुलाब की एक कली खिलने से पहले ही कुचल दी गई
एक पतंग उड़ने से पहले ही टूट गई
खिलते हुए फूल को कुचलकर राख कर दिया गया
और पतंग आत्मा को ले गई।’
एक पतंग उड़ने से पहले ही टूट गई
खिलते हुए फूल को कुचलकर राख कर दिया गया
और पतंग आत्मा को ले गई।’
दोषी की किसी भी प्रकृति में सुधार की संभावना
अदालत ने माना कि ऐसा कोई भी साक्ष्य मौजूद नहीं है कि दोषी के अंदर किसी भी प्रकृति में सुधार की संभावना है। ऐसा कोई साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं है, जिससे कि यह प्रतीत होता हो कि दोषी मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है। बचाव पक्ष की यह दलील अदालत ने नहीं मानी कि दोषी अनिल पर उसकी मां के भरण-पोषण की जिम्मेदारी है।
अदालत ने माना कि ऐसा कोई भी साक्ष्य मौजूद नहीं है कि दोषी के अंदर किसी भी प्रकृति में सुधार की संभावना है। ऐसा कोई साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं है, जिससे कि यह प्रतीत होता हो कि दोषी मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है। बचाव पक्ष की यह दलील अदालत ने नहीं मानी कि दोषी अनिल पर उसकी मां के भरण-पोषण की जिम्मेदारी है।
अदालत ने कहा कि पत्रावली पर उपलब्ध तथ्य से यह स्पष्ट है कि दोषी इधर-उधर घूमता रहता है और शहद तोड़कर अपनी आवश्यकताओं को पूरा करता है। यानी वह गैरजिम्मेदार व्यक्ति है, जिससे यह भी स्पष्ट नहीं है कि वही अपनी मां का भरण-पोषण करता हो। घटना के समय तक न तो पीड़िता ने दुनिया देखी और न ही अपना प्राकृतिक जीवन जी सकी। दोषी ने दुष्कर्म पीड़िता का जीवन भी अंधेरे में डाल दिया है।
बहुत गरीब है परिवार, न्याय पर जताई संतुष्टि
थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाला पीड़ित परिवार बहुत गरीब है। घटना को याद कर आज भी परिजन सिहर जाते हैं। चार साल बीतने के बाद भी उसकी डरावनी यादें पीछा नहीं छोड़ रहीं। वहीं, पिता ने अदालत के फैसले के बाद न्याय मिलने पर संतुष्टि जताई है।
थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाला पीड़ित परिवार बहुत गरीब है। घटना को याद कर आज भी परिजन सिहर जाते हैं। चार साल बीतने के बाद भी उसकी डरावनी यादें पीछा नहीं छोड़ रहीं। वहीं, पिता ने अदालत के फैसले के बाद न्याय मिलने पर संतुष्टि जताई है।
पीड़ित बच्चियों का पिता फेरी लगाकर सामान बेचता है। उनके पास जमीन नहीं है। कभी-कभी मजदूरी कर लेता है। बेटियों के साथ हुई जघन्य वारदात को याद कर आज भी उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। पिता ने बताया कि अनिल उर्फ चमेली गांव में हर 15-20 दिन में आता था। लोग उसे सांप-बिच्छू पकड़ने के लिए भी बुला लेते थे। गांव में सभी उसे पहचानते थे। वह अक्सर टॉफी-बिस्कुट वगैरह लेकर आता था। इस वजह से बच्चे उसके पास चले जाते थे। वह एक व्यक्ति के पास अपना सामान रख जाता था।
पीड़ित पिता ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। छोटी बेटी मरणासन्न हो गई थी, जिसका बरेली में काफी इलाज चला था। बाद में वह बच गई। वह अदालत में तारीख पड़ने पर जाता रहता था। शुक्रवार को मृत्युदंड मिलने की जानकारी हुई है। अदालत पर पूरा भरोसा था। उन्हें और उनकी बच्चियों को न्याय मिला है।
मासूम से दुष्कर्म और छोटी बहन की हत्या के दोषी को मृत्युदंड
शाहजहांपुर में सात वर्ष की मासूम से दुष्कर्म और छोटी बहन की क्रूरतापूर्वक हत्या के 57 माह पुराने मामले में दोषी अनिल उर्फ चमेली को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अपने फैसले में केस को विरलतम श्रेणी का मानते हुए कहा कि दोषी को मृत्युदंड दिया जाना ही न्यायोचित होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो समाज में गलत संदेश जाएगा और न्यायिक प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न उठेगा।
शाहजहांपुर में सात वर्ष की मासूम से दुष्कर्म और छोटी बहन की क्रूरतापूर्वक हत्या के 57 माह पुराने मामले में दोषी अनिल उर्फ चमेली को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अपने फैसले में केस को विरलतम श्रेणी का मानते हुए कहा कि दोषी को मृत्युदंड दिया जाना ही न्यायोचित होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो समाज में गलत संदेश जाएगा और न्यायिक प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न उठेगा।
कांट थाना क्षेत्र के एक गांव में पांच और सात साल की सगी बहनें 22 फरवरी 2021 को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे प्राथमिक विद्यालय में लगे नल पर नहाने गई थीं। शाम तक दोनों नहीं लौटीं तो परिजनों को चिंता हुई। वे लोग बच्चियों को तलाशते रहे। शाम को गांव से बाहर खेत पर पांच वर्ष की बच्ची मृत अवस्था में मिली। उसके सिर से खून बह रहा था।
दूसरी बहन की तलाश शुरू की तो रात करीब 11 बजे घटनास्थल से लगभग सौ मीटर की दूरी पर बच्ची लहूलुहान हालत में पड़ी मिली। उसकी सांसें चल रही थीं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। इसके बाद उसे बरेली के एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
पुलिस ने इस मामले में बच्चियों के दादा की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस की विवेचना में अजीजगंज में जिला अस्पताल के पीछे रहने वाले अनिल उर्फ चमेली का नाम सामने आया। वारदात के दिन गांव वालों ने बच्चियों को उसके साथ जाते देखा था। अनिल मधुमक्खियों के छत्ते तोड़कर शहद निकालने के लिए गांव में अक्सर आता-जाता रहता था।
पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो अनिल ने बताया कि वह बच्चियों को बिस्कुट देने के बाद शहद खिलाने का लालच देकर उन्हें गांव के बाहर खेत पर ले गया था। उसने बड़ी बहन से दुष्कर्म किया और शहद तोड़ने में इस्तेमाल होने वाली लोहे की खंती से उसके सिर पर वार कर दिया।उसके चीखने-चिल्लाने पर छोटी बहन गांव की ओर भागने लगी। पकड़े जाने के डर से उसने सौ मीटर आगे उसे पकड़ लिया और सीने पर बैठकर खंती से ही उसके सिर पर भी कई वार किए। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दोनों बहनों को मरा समझकर वह भाग गया था।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर अनिल के खिलाफ दो अप्रैल 2021 को आरोपपत्र अदालत भेजा। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मनोज कुमार सिद्धू ने केस को विरलतम श्रेणी का मानते हुए अनिल को मृत्युदंड से दंडित किया। अदालत ने कहा कि मृत्युदंड के लिए अनिल उर्फ चमेली की गर्दन में फंदा डालकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। उस पर 1,37,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
