UP: महंगाई की आंच पर पक रही दाल, मेवे-मसालों में भी उछाल; खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से बिगड़ा घर का बजट
पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से महंगाई का असर बाजार पर दिखने लगा है। आटा, दाल, तेल और मेवे-मसाले समेत सभी खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ गई हैं। इससे आम जनता और गृहिणियों का रसोई बजट बिगड़ गया है।
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण स्थानीय बाजारों में खाद्य पदार्थों की महंगाई आसमान छू रही है। बरेली में दालों, मसालों, मेवों और सरसों के तेल के दामों में भारी उछाल आया है। इससे आम जनता और गृहिणियों का रसोई बजट बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
महंगाई की मुख्य वजह पेट्रोल-डीजल के दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि है। केंद्र सरकार एक महीने में तीन बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा चुकी है। ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ने से बाहरी राज्यों से मंडियों तक माल की आवक कम हो गई है। आवक घटने और मांग बनी रहने के कारण किराना सामान के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
अनाज मंडी के व्यापारियों के अनुसार, बीते एक महीने में चावल की कीमतों में करीब 20 रुपये प्रति किलो की तेजी आई है। आटे के दाम भी लगभग चार रुपये प्रति किलो बढ़े हैं। सरसों तेल 10 रुपये प्रति लीटर और अरहर दाल आठ रुपये प्रति किलो तक महंगी हुई है। कई ब्रांडेड कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने के बजाय पैकेटों का वजन कम कर दिया है, जिससे उपभोक्ताओं को कम सामग्री मिल रही है।
बाजारों पर महंगाई का असर
जिले के किराना और थोक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है। बढ़ी हुई कीमतों के कारण ग्राहकों ने अपनी जरूरतें सीमित कर ली हैं। लोग अब महीने भर का राशन एक साथ खरीदने के बजाय केवल जरूरी सामान ही खरीद रहे हैं। व्यापारियों को डर है कि यदि कीमतों में सुधार नहीं हुआ तो बाजार में बड़ी मंदी आ सकती है।
बाजार में विशेष रूप से सफेद इलायची और सूखे मेवों की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। किराना व्यापारी दिवेंद्र गंगवार ने बताया कि बादाम के दामों में एक महीने में करीब 100 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। इस महंगाई से मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार परेशान हैं। दुकानदारों का कहना है कि अगर ईंधन के दामों में जल्द कटौती नहीं हुई, तो महंगाई की मार और गंभीर हो सकती है।
| वस्तु | दाम (फरवरी) | अब |
| चने की दाल | 70 | 78 |
| उर्द की दाल | 100 | 113 |
| राजमा | 120 | 150 |
| धनिया पिसी हुई | 115 | 160 |
| मिर्च साबुत | 240 | 260 |
| हल्दी पिसी हुई | 240 | 280 |
| जावित्री | 1800 | 2200 |
| काली इलायची | 1600 | 1900 |
| सफेद इलायची | 2600 | 3400 |
| तेल | दाम (फरवरी) | अब |
| रिफाइंड (0.750 एमएल) | 135 | 145 |
| सरसों का तेल (1 लीटर ) | 168 | 180 |
| सन फ्लावर ऑयल (1 लीटर ) | 160 | 195 |
| मेवे के दाम | दाम (फरवरी) | अब |
| खजूर | 350 | 425 |
| बादाम | 870 | 960 |
| पिस्ता नमकीन | 1300 | 1450 |
| कच्चा पिस्ता | 3100 | 3300 |
मेवा व्यापारी शिवम आनंद ने बताया कि युद्ध के बाद मेवे के दामों में लगातार वृद्धि हो रही है। खासकर ईरान से रास्ते आने वाले माल में तेजी ज्यादा है।
किराना व्यापारी गुलशन गुप्ता ने बताया कि किराना की वस्तुओं के दाम बढ़ने से जनता महंगाई की मार झेल रही है, अभी भी कंपनियों के दाम रुक नहीं हो रहे हैं।
ट्रांसपोर्टर रामकृष्ण शुक्ला ने बताया कि डीजल के दाम बढ़ने ट्रांसपोर्टर पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। दूर से आने वाले सामने के बढ़े में लगातार वृद्धि हो रही है, जिस करण महंगाई बढ़ी है।
गृहिणी पारूल गुप्ता ने बताया कि रसोई में इस्तेमाल होने वाले सामान के दाम लगातार बढ़ रहे है, जिससे हर महीने का बजट बिगड़ रहा है। सरकार को महंगाई पर रोक लगानी चाहिए।
गृहिणी श्वेता ने बताया कि सिलिंडर के दाम बढ़ने से इसका असर रसोई पर सीधे तौर पर पड़ रहा है। हर महीने राशन के लिए अतिरिक्त धन खर्च कराना पड़ रहा है।